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A Defining Sporting Year: India’s Packed 2026 Calendar Signals Growth and Global Ambition

Sports News World - Fri, 05/29/2026 - 19:55
A Defining Sporting Year: India’s Packed 2026 Calendar Signals Growth and Global Ambition Gurpratap Sandhu Fri, 29 May 2026 - 10:55
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Barcelona’s Youth Blueprint Gains Momentum as Hansi Flick Backs Emerging Defender Alvaro Cortes

Sports News Europe - Fri, 05/29/2026 - 19:29
Barcelona’s Youth Blueprint Gains Momentum as Hansi Flick Backs Emerging Defender Alvaro Cortes Victor Martinelli Fri, 29 May 2026 - 10:29
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India’s Crowded 2026 Sports Calendar Signals a New Era of Competitive and Commercial Growth

Sports News Europe - Fri, 05/29/2026 - 19:29
India’s Crowded 2026 Sports Calendar Signals a New Era of Competitive and Commercial Growth Aaron Slegers Fri, 29 May 2026 - 10:29
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आज का मौसम 29 मई: 16 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट, दिल्ली में राहत की उम्मीद लेकिन मानसून अभी दूर

TopNews Hindi - Fri, 05/29/2026 - 17:38

दिल्ली एक बार फिर उस मौसम से गुजर रही है जिसे शहर के लोग हर साल जानते भी हैं और उससे डरते भी हैं। राजधानी में प्री-मानसून गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ रही है। तापमान 34°C के आसपास बना हुआ है, जबकि आने वाले दिनों में बारिश की कुछ संभावना दिखाई दे रही है। हालांकि सप्ताहांत में होने वाली संभावित बारिश अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन असली राहत अभी कई सप्ताह दूर है। सड़कों पर तपिश, लू के थपेड़े, रातों की बेचैनी और कामकाजी वर्ग पर बढ़ता दबाव इस मौसम की कठोर वास्तविकता को उजागर करता है। दिल्ली एक बार फिर मानसून का इंतजार कर रही है—वैसा ही इंतजार जैसा सदियों से करती आई है।

उबलते तवे जैसी बन चुकी है दिल्ली

नई दिल्ली में घर से बाहर कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो किसी विशाल भट्टी के भीतर प्रवेश कर लिया हो। हवा शुष्क है, भारी है और लगातार शरीर पर दबाव बनाती है। राजधानी का तापमान आज लगभग 34°C दर्ज किया गया, जबकि आसमान आंशिक रूप से साफ और धूप वाला बना हुआ है। बादलों की मौजूदगी देखने में राहत का संकेत देती है, लेकिन वास्तव में वे गर्मी को कम करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। यह दिल्ली की देर-मई वाली गर्मियों का परिचित चेहरा है—एक ऐसा मौसम जो शहर पर पूरी तरह हावी हो जाता है। दिल्ली के करोड़ों निवासी इस मौसम का सामना अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं। सड़क किनारे दुकानदार, रिक्शा चालक, कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी और स्कूल जाने वाले बच्चे—सभी इस तपिश को सहने के लिए मजबूर हैं।

अगले पांच दिनों का मौसम: राहत और तपिश के बीच झूलता पूर्वानुमान

मौसम के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली फिलहाल प्री-मानसून सीजन के सबसे कठिन चरण में प्रवेश कर चुकी है। यह वह समय होता है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पहले गर्मी अपनी चरम सीमा तक पहुंचती है। शनिवार को बारिश की संभावना सबसे अधिक दिखाई दे रही है। रविवार को भी बादल और वर्षा का असर बना रह सकता है। लेकिन सप्ताह की शुरुआत के साथ तापमान फिर तेजी से ऊपर चढ़ने की आशंका है। दिल्लीवासियों के लिए यह पैटर्न नया नहीं है। कुछ घंटों की बारिश, थोड़ी ठंडक और फिर तेज धूप के साथ गर्मी की वापसी—यह हर साल की कहानी है।

मौसम ऐप से कहीं अधिक कठोर है जमीनी हकीकत

सिर्फ तापमान का आंकड़ा दिल्ली की गर्मी का पूरा चित्र नहीं दिखाता। जब आधिकारिक तापमान 34°C होता है, तब सड़कों, इमारतों और कंक्रीट की सतहों पर महसूस होने वाला तापमान इससे काफी अधिक हो सकता है। दोपहर के समय सड़कें मृगतृष्णा जैसी चमकने लगती हैं। कारों की छतें, रेलिंग और धातु की सतहें इतनी गर्म हो जाती हैं कि उन्हें नंगे हाथ से छूना मुश्किल हो जाता है। इस मौसम में दिल्ली की सबसे चर्चित पहचान है—लू। राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों से आने वाली यह गर्म और धूलभरी हवा कुछ ही घंटों में तापमान को कई डिग्री तक बढ़ा सकती है। यह कोई सामान्य हवा नहीं होती, बल्कि तपिश से भरा एक तीखा झोंका होती है जो शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म कर देता है। रातें भी राहत नहीं देतीं। दिन भर गर्म हुई सड़कें और इमारतें देर रात तक गर्मी छोड़ती रहती हैं। परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट के बावजूद वातावरण गर्म बना रहता है और बिना पंखे या एयर कंडीशनर के आरामदायक नींद लगभग असंभव हो जाती है।

सबसे ज्यादा कीमत कौन चुका रहा है?

दिल्ली की गर्मी सभी को प्रभावित करती है, लेकिन इसका सबसे बड़ा बोझ उन लोगों पर पड़ता है जिनके पास इससे बचने के संसाधन नहीं हैं। निर्माण श्रमिक, डिलीवरी एजेंट, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, सफाई कर्मचारी और दिहाड़ी मजदूर इस मौसम में सबसे अधिक जोखिम उठाते हैं। उनके लिए गर्मी केवल असुविधा नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन जाती है। हर वर्ष मई और जून के दौरान राजधानी के अस्पतालों में हीट एग्जॉशन, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। विशेष रूप से निम्नलिखित वर्ग अधिक संवेदनशील माने जाते हैं: बुजुर्ग नागरिक छोटे बच्चे गर्भवती महिलाएं पहले से बीमार लोग खुले वातावरण में काम करने वाले श्रमिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर के भीतर रहने, पर्याप्त पानी पीने और अत्यधिक शारीरिक गतिविधि से बचने की सलाह देते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर की बड़ी आबादी के लिए इन सलाहों का पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता।

मानसून: राहत का सबसे बड़ा इंतजार

दिल्ली में इस समय सबसे अधिक पूछा जाने वाला सवाल यही है—मानसून कब आएगा? ऐतिहासिक रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली में 27 जून से 5 जुलाई के बीच पहुंचता रहा है। हालांकि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण इसकी समय-सीमा में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। फिलहाल राजधानी प्री-मानसून मौसम में है। इस दौरान: अत्यधिक गर्मी बनी रहती है। धूल भरी आंधियां आती हैं। गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश होती है। अस्थायी ठंडक मिलती है, लेकिन गर्मी पूरी तरह समाप्त नहीं होती। इस सप्ताहांत की बारिश भी संभवतः ऐसे ही प्री-मानसून तूफानों का परिणाम होगी। बारिश के बाद कुछ घंटों के लिए सड़कें ठंडी होंगी, मिट्टी से सोंधी खुशबू उठेगी और लोगों को राहत महसूस होगी। लेकिन इसके बाद सूरज फिर अपनी पूरी ताकत के साथ लौट सकता है। वास्तविक मानसूनी राहत अभी भी लगभग 4 से 5 सप्ताह दूर मानी जा रही है।

दिल्ली को और कितने दिन झेलनी होगी यह तपिश?

यदि सवाल यह है कि गर्मी कब खत्म होगी, तो जवाब है—अभी कुछ समय और इंतजार करना होगा। दिल्ली में गर्मी का मौसम सामान्यतः अप्रैल से जून तक रहता है, जबकि सबसे अधिक तापमान मई और जून के पहले पखवाड़े में देखने को मिलता है। इस अवधि में तापमान का 40°C के पार जाना सामान्य माना जाता है और गंभीर हीटवेव के दौरान 44°C से अधिक तापमान भी दर्ज किया जा सकता है। वर्तमान तापमान 34°C भले ही बेहद असहज महसूस हो रहा हो, लेकिन तकनीकी रूप से यह दिल्ली की संभावित अधिकतम गर्मी से अभी नीचे है। मानसून के सक्रिय होने के बाद तापमान आमतौर पर 28°C से 30°C के दायरे में आ जाता है। हालांकि इसके साथ नमी बढ़ जाती है और वातावरण अधिक उमस भरा महसूस होने लगता है। फिर भी अधिकांश दिल्लीवासी उमस को झुलसाने वाली गर्मी के मुकाबले बेहतर विकल्प मानते हैं।

एक ऐसा शहर जो हर साल गर्मी को हराता है

दिल्ली का इतिहास गर्मियों के साथ उसके संघर्ष और अनुकूलन की कहानियों से भरा पड़ा है। मुगल शासकों ने गर्मी से बचने के लिए भूमिगत कक्ष बनवाए। ब्रिटिश अधिकारी गर्मियों में पहाड़ों की ओर रुख करते थे। आधुनिक दिल्लीवासी एयर कंडीशनर, इनवर्टर, ठंडे पेय और रेफ्रिजरेटर का सहारा लेते हैं। लेकिन मूल कहानी वही रहती है। यह शहर शिकायत करता है, पसीना बहाता है, बहस करता है कि इस बार की गर्मी पिछले साल से ज्यादा है या नहीं, और फिर भी अपने दैनिक जीवन को जारी रखता है। नींबू पानी, आम पन्ना और ठंडी लस्सी के सहारे लोग दिन गुजारते हैं। शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रम शाम के समय आयोजित किए जाते हैं। और हर कोई आसमान की ओर देखता है—उस क्षण की प्रतीक्षा में जब दक्षिण-पश्चिम से बादल उठेंगे और मानसून की पहली बूंदें धरती को छूएंगी। वह दिन आएगा। लेकिन तब तक दिल्ली को अपनी सदियों पुरानी परंपरा निभानी होगी—गर्मी को सहना, उससे जूझना और अंततः उसे पीछे छोड़ देना।

सोने और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट (Gold Price Declines Today), 22Karat सोना 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम

TopNews Hindi - Fri, 05/29/2026 - 17:26

सोने की कीमतों में शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। मजबूत डॉलर, अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित वृद्धि और फेडरल रिजर्व द्वारा इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से समर्थन मिला, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम विस्तार को लेकर हुई प्रगति ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। ऐसे माहौल में सोना एक ओर मुद्रास्फीति से सुरक्षा का साधन बना हुआ है, जबकि दूसरी ओर उच्च ब्याज दरों की आशंकाएं इसकी तेजी को सीमित कर रही हैं।

शुक्रवार, 29 मई को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। हाल के सत्रों में मजबूत प्रदर्शन के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना।

सुबह लगभग 9:10 बजे, एमसीएक्स गोल्ड जून फ्यूचर्स 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स 0.38 प्रतिशत फिसलकर 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद कुछ निवेशकों ने अपनी होल्डिंग्स में लाभ सुरक्षित करने का निर्णय लिया, जिससे कीमतों पर दबाव बना।

सोने की कीमतों पर दबाव डालने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक अमेरिकी डॉलर की मजबूती रहा। डॉलर इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की मांग बढ़ी और सोने की आकर्षण क्षमता कुछ हद तक कम हुई।

परंपरागत रूप से देखा जाए तो जब डॉलर मजबूत होता है, तब सोना अन्य मुद्राओं में निवेश करने वाले खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक मांग और कीमतों पर पड़ता है।

इसके अतिरिक्त, अमेरिकी मुद्रास्फीति के नए आंकड़ों ने भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशक अब यह आकलन कर रहे हैं कि बढ़ती महंगाई के जवाब में अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगामी महीनों में किस प्रकार की मौद्रिक नीति अपनाएगा।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स अप्रैल में साल-दर-साल आधार पर 3.8 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि मई 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर मानी जा रही है।

PCE इंडेक्स को अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक मानता है। इसलिए इस आंकड़े में तेज उछाल ने बाजार सहभागियों के बीच यह धारणा मजबूत कर दी है कि फेड इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है।

उच्च ब्याज दरें सामान्यतः सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि सोना कोई ब्याज या लाभांश नहीं देता। जब सरकारी बॉन्ड और अन्य ब्याज आधारित निवेश अधिक आकर्षक रिटर्न प्रदान करते हैं, तब निवेशकों का झुकाव उन परिसंपत्तियों की ओर बढ़ जाता है।

मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद अब निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति बैठकों पर केंद्रित है।

ऊर्जा कीमतों में हालिया मजबूती और कच्चे तेल के ऊंचे स्तरों ने भी मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो उपभोक्ता मूल्य दबाव और अधिक बढ़ सकते हैं, जिससे फेड को ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या अतिरिक्त वृद्धि पर विचार करना पड़ सकता है।

यह स्थिति सोने के लिए मिश्रित संकेत प्रस्तुत करती है। एक ओर महंगाई से बचाव के रूप में इसकी मांग बनी रहती है, जबकि दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों का जोखिम इसकी तेजी को सीमित करता है।

जहां घरेलू बाजारों में सोने पर दबाव दिखाई दिया, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तस्वीर कुछ अलग रही।

वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों को उस समय समर्थन मिला जब अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व तनाव को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की खबरें सामने आईं। दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्षविराम को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में नई सहमति बनने की सूचना ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।

इन घटनाक्रमों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मजबूत हुआ और लगभग 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।

यह बढ़त ऐसे समय आई जब इससे पहले सत्र के दौरान सोना दो महीनों के निचले स्तर तक फिसल गया था। उस समय हवाई हमलों की घटनाओं ने शांति वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी।

बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया का एक प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम विस्तार को लेकर हुई सहमति रही।

जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों ने 60 दिनों के लिए संघर्षविराम बढ़ाने और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की वार्ताओं की शुरुआत करने पर सहमति बनाई है।

यह समझौता ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में जारी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों और निवेशकों की जोखिम धारणा को प्रभावित कर रहा था। संघर्षविराम के विस्तार ने क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीदों को मजबूत किया है, जिससे वित्तीय बाजारों में कुछ राहत देखने को मिली।

हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, लेकिन वार्ता की दिशा में बढ़ते कदम निवेशकों को यह संकेत दे रहे हैं कि निकट भविष्य में तनाव में और कमी आ सकती है।

वर्तमान परिदृश्य में सोने का बाजार दो विपरीत शक्तियों के बीच संतुलन साधता दिखाई दे रहा है।

एक ओर, उच्च मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक जोखिम और आर्थिक अनिश्चितताएं सोने की सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति के रूप में मांग को समर्थन दे रही हैं।

दूसरी ओर, मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि सोने की कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं।

निवेशकों के लिए आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेड अधिकारियों के बयान और मध्य पूर्व से जुड़ी नई खबरें सोने की अगली दिशा निर्धारित कर सकती हैं। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, सोना वैश्विक वित्तीय प्रणाली में जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो विविधीकरण के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अपनी भूमिका बनाए हुए है।

Indian Stock Markets End Volatile Session Lower on Profit Booking and Global Uncertainty

Esteemed India - Fri, 05/29/2026 - 01:13
Indian Stock Markets End Volatile Session Lower on Profit Booking and Global Uncertainty Harish Thapar Thu, 28 May 2026 - 16:13
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India’s Toll Road Sector Faces Slower Growth in FY27 Amid Geopolitical and Freight Challenges

Esteemed India - Fri, 05/29/2026 - 01:10
India’s Toll Road Sector Faces Slower Growth in FY27 Amid Geopolitical and Freight Challenges Keshav Sharma Thu, 28 May 2026 - 16:10
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Specialized Goalkeeping Camp Enhances India Women’s Hockey Defensive Arsenal

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Specialized Goalkeeping Camp Enhances India Women’s Hockey Defensive Arsenal Victor Martinelli Thu, 28 May 2026 - 11:20
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India Maintains Bilateral Sports Freeze With Pakistan While Opening Doors for Global Tournament Participation

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Barcelona’s Transfer Strategy Under Pressure as Bastoni Grows Impatient

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