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Updated: 14 min 37 sec ago

एचडीएफसी एएमसी (HDFC AMC) Share पर BUY की सलाह; लक्ष्य मूल्य Rs 3,006: बीओबी कैपिटल मार्केट्स

Mon, 10/19/2026 - 21:10
बीओबी कैपिटल मार्केट्स (BOBCAPS) ने एचडीएफसी एएमसी पर ‘खरीदें’ (BUY) की सलाह बरकरार रखी है, हालांकि लक्ष्य मूल्य Rs 3,200 से घटाकर Rs 3,006 कर दिया है। यह 15 अक्टूबर के बंद भाव Rs 2,415 से करीब 24 फीसदी की बढ़त दर्शाता है। सितंबर तिमाही में कंपनी का तिमाही औसत एयूएम सालाना 10 फीसदी बढ़कर Rs 9.69 लाख करोड़ पहुंचा, जबकि इक्विटी एयूएम 13.9 फीसदी चढ़ा। अन्य खर्च घटने से एबिटडा मार्जिन 79.5 फीसदी पर पहुंच गया और ईल्ड बढ़कर 48 बेसिस पॉइंट हो गई। मुनाफा केवल 4.2 फीसदी बढ़ा, क्योंकि पिछले साल की तिमाही में टैक्स प्रावधान की वापसी का फायदा शामिल था। ब्रोकरेज इसे अपनी शीर्ष पसंद बताता है। BUY बरकरार Q2FY27 नतीजा समीक्षा एसेट मैनेजमेंट एचडीएफसी एएमसी: किफायती खर्च, चौड़ा मार्जिन और ऊपर सरकती ईल्ड; बीओबीकैप्स ने कहा ‘खरीदें’, लक्ष्य Rs 3,006

देश की तीसरी सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी ने इक्विटी के बढ़ते हिस्से के दम पर मजबूत परिचालन प्रदर्शन दिखाया। ब्रोकरेज ने अनुमान थोड़े घटाए, पर भरोसा नहीं।

निवेशक के नाम पोस्टकार्ड · बीओबी कैपिटल मार्केट्स की ओर से

आज का भाव: Rs 2,415 (15 अक्टूबर 2026)

लक्ष्य मूल्य: Rs 3,006 (पहले Rs 3,200)

संभावित बढ़त: करीब 24%

52 हफ्ते का दायरा: Rs 2,206 से Rs 2,967

मूल्यांकन आधार: सितंबर 2028 अनुमानित ईपीएस का 34 गुना

रेटिंग टिकट

BUY

16 अक्टूबर 2026

बाजार पूंजी
~Rs 1.03
लाख करोड़

तिमाही का सार: आय बढ़ी, खर्च काबू में

एसेट मैनेजमेंट सेवाओं से कंपनी की मुख्य आय सालाना 13.9 फीसदी और तिमाही आधार पर 6.4 फीसदी बढ़कर Rs 1,170.2 करोड़ रही। एबिटडा 16.1 फीसदी उछलकर Rs 929.9 करोड़ पर पहुंचा। मार्जिन एक साल पहले के 77.9 फीसदी से बढ़कर 79.5 फीसदी हो गया, यानी 152 बेसिस पॉइंट का सुधार।

शुद्ध मुनाफा Rs 748.7 करोड़ रहा, जो सालाना केवल 4.2 फीसदी ज्यादा और पिछली तिमाही से 10.6 फीसदी कम है। ब्रोकरेज के मुताबिक यह तुलना सीधी नहीं है, क्योंकि पिछले साल की सितंबर तिमाही में Rs 46.8 करोड़ के आयकर प्रावधान की वापसी का लाभ मिला था। इसी वजह से टैक्स दर 18 फीसदी से बढ़कर 23.3 फीसदी दिखी। अन्य आय भी मार्क-टू-मार्केट लाभ घटने से Rs 71.3 करोड़ पर सिमट गई, जो पिछली तिमाही में Rs 262.8 करोड़ थी। इन दोनों असर को हटाकर देखें तो कोर मुनाफा सालाना 8.5 फीसदी बढ़कर Rs 694.1 करोड़ रहा।

खर्च के चार लिफाफे (Q2FY27 बनाम Q2FY26)

कर्मचारी खर्च

Rs 141.7 करोड़

सालाना +14.5%; ईसॉप खर्च Rs 18.6 करोड़

अन्य खर्च

Rs 94.8 करोड़

सालाना -6.1%; मार्जिन सुधार की असली वजह

फीस और कमीशन

Rs 3.9 करोड़

छोटा आधार, सालाना दोगुना

कुल परिचालन खर्च

Rs 240.4 करोड़

सालाना +6.1%, जबकि आय +13.9%

प्रबंधन के अनुसार पूरे वित्त वर्ष 2027 में ईसॉप खर्च Rs 79 से 80 करोड़ के बीच रहने की उम्मीद है।

ईल्ड का पलड़ा: इक्विटी ने बढ़ाया वजन

कुल राजस्व ईल्ड 48 बेसिस पॉइंट रही, जो पिछली तिमाही में 47 और मार्च तिमाही में 45 बेसिस पॉइंट थी। प्रबंधन ने साफ किया कि यह सुधार एयूएम में गिरावट से नहीं, बल्कि उत्पाद मिश्रण में इक्विटी का हिस्सा बढ़ने से आया है। नीचे दिए बाट हर श्रेणी की ईल्ड का वजन दिखाते हैं।

61

58

48

28-29

13

सिर्फ इक्विटी योजनाएं

इक्विटी

कुल

डेट

लिक्विड

आंकड़े बेसिस पॉइंट में, Q2FY27। बाट की ऊंचाई ईल्ड के अनुपात में।

प्रबंधन ने बताया कि विवेकाधीन पीएमएस पर ईल्ड इक्विटी के बराबर है, जबकि वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) पर उत्पाद के हिसाब से 80 से 90 बेसिस पॉइंट मिलती है।

एयूएम की रेलगाड़ी: इंजन इक्विटी, डेट का डिब्बा हल्का

तिमाही औसत एयूएम सालाना 10 फीसदी और तिमाही आधार पर 3.6 फीसदी बढ़कर Rs 9.69 लाख करोड़ हो गया, जिससे कंपनी तीसरी सबसे बड़ी एएमसी बनी हुई है। इक्विटी एयूएम 13.9 फीसदी बढ़कर Rs 6.09 लाख करोड़ हुआ और इक्विटी बाजार हिस्सेदारी 12.7 फीसदी पर टिकी रही, जिसका श्रेय ब्रोकरेज फंडों के व्यापक सुधरे प्रदर्शन को देता है। इसके उलट डेट एयूएम 12.9 फीसदी घटकर Rs 1.62 लाख करोड़ रह गया। ईटीएफ एयूएम 90 फीसदी उछलकर Rs 43,700 करोड़ पहुंचा।

एयूएम मिश्रण, Q2FY27 (डिब्बे की लंबाई हिस्सेदारी के अनुपात में)

इक्विटी 67.1% डेट 16.7% 8.9% 7.3%

गहरा नीला: इक्विटी (ईटीएफ सहित) · मध्यम: डेट · हल्का: लिक्विड 8.9% · सबसे हल्का: अन्य 7.3%। एक साल पहले इक्विटी 64.9% और डेट 21.1% थे।

निवेशकों की पहुंच: एसआईपी का भरोसा

एसआईपी बुक: एसआईपी एयूएम सालाना 14.2 फीसदी बढ़कर Rs 2.34 लाख करोड़ हो गया। सितंबर 2026 में मासिक एसआईपी और एसटीपी प्रवाह Rs 4,800 करोड़ रहा।

अनोखे निवेशक: कंपनी के यूनिक निवेशक 1.77 करोड़ पहुंच गए, जो सालाना 22.1 फीसदी की बढ़त है। उद्योग के कुल यूनिक निवेशकों में कंपनी की पैठ 25 से बढ़कर 28 फीसदी हुई। सक्रिय व्यक्तिगत खाते 24.1 फीसदी बढ़कर करीब 3.2 करोड़ हुए।

छोटे शहर: शीर्ष 30 शहरों के बाहर (बी-30) से आने वाली एयूएम की हिस्सेदारी 19.7 से बढ़कर 20 फीसदी हुई। कुल एयूएम का करीब 45 फीसदी अब डायरेक्ट चैनल से आता है।

उद्योग पर भरोसा: प्रबंधन ने मध्यम से लंबी अवधि में उद्योग की वृद्धि पर भरोसा जताया, जिसे लगातार मजबूत एसआईपी प्रवाह और बढ़ती निवेशक भागीदारी का सहारा है।

नए मोर्चे: ईपीएफओ, एआईएफ और एसआईएफ
  • कंपनी ने इस तिमाही ईपीएफओ के फिक्स्ड इनकम मैंडेट का प्रबंधन शुरू किया, जो पिछली तिमाही में मिले एक अन्य सरकारी मैंडेट के अलावा है।
  • दो नए वैकल्पिक फंड लॉन्च हुए: लेट-स्टेज वेंचर और शुरुआती ग्रोथ कंपनियों के लिए एचडीएफसी एएमसी सिलेक्ट अपॉर्चुनिटी फंड (कैटेगरी-2) और एचडीएफसी एएमसी इमर्जिंग अपॉर्चुनिटीज फंड (कैटेगरी-3)।
  • पीएमएस और वैकल्पिक निवेश में 20 से अधिक निवेश पेशेवर हैं। प्रबंधन का जोर आकार से ज्यादा नतीजों पर है, और गैर-म्यूचुअल फंड आय अभी कुल आय का छोटा हिस्सा है।
  • स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) के लिए दो वरिष्ठ निवेश पेशेवर नियुक्त किए गए हैं और अगली दो तिमाहियों में कुछ उत्पाद आने की उम्मीद है।
  • हाइब्रिड श्रेणियों (मल्टी-एसेट, एग्रेसिव हाइब्रिड, इक्विटी सेविंग्स) में बाजार हिस्सेदारी कुछ घटी। कंपनी ने नया हाइब्रिड फंड मैनेजर लाया है, जबकि बैलेंस्ड एडवांटेज फंड देश का सबसे बड़ा फंड बना हुआ है।
अनुमानों में हल्की कटौती

ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 से 2029 के मुनाफा अनुमान 0.7 से 4.1 फीसदी घटाए हैं, फिर भी इस अवधि में मुनाफे के 13.6 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ने की उम्मीद जताई है।

(Rs करोड़) FY26 (वास्तविक) FY27E FY28E FY29E कुल आय (नया)4,622.25,202.05,883.26,785.3 परिचालन लाभ (नया)3,295.33,692.74,173.84,741.5 शुद्ध मुनाफा (नया)2,858.13,179.63,580.24,106.2 शुद्ध मुनाफा (पुराना)–3,202.33,719.94,282.9 ईपीएस (Rs)66.874.387.5101.3 आरओई (%)32.933.435.237.6 पी/ई (गुना)36.232.527.623.8 प्रति शेयर लाभांश (Rs)54.060.067.677.5

स्रोत: बीओबीकैप्स अनुमान। परिचालन लाभ FY26 को कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट माना गया है। पुराने अनुमान धूसर रंग में।

लक्ष्य का हिसाब: गणित की कॉपी से

ब्रोकरेज का कहना है कि मजबूत फ्रेंचाइजी, इक्विटी का ऊंचा हिस्सा और बेहतर लाभप्रदता मिलकर प्रीमियम मूल्यांकन को सही ठहराते हैं। एचडीएफसी एएमसी उसकी शीर्ष पसंद बनी हुई है।

प्रश्न: एचडीएफसी एएमसी का 12 महीने का लक्ष्य मूल्य क्या है?

चरण 1: आधार = सितंबर 2028 का अनुमानित ईपीएस

चरण 2: लक्ष्य मल्टीपल = 34 गुना (पहले लक्ष्य Rs 3,200 था)

चरण 3: Rs 3,006 ÷ 34 = करीब Rs 88.4 का निहित ईपीएस

चरण 4: (Rs 3,006 − Rs 2,415) ÷ Rs 2,415 = 24.5%

उत्तर: लक्ष्य Rs 3,006, रेटिंग BUY, बढ़त करीब 24%

संपादक की टिप्पणी (Editor’s Note)

1. मार्जिन की व्याख्या: रिपोर्ट के पहले पन्ने पर मार्जिन सुधार का कारण “अन्य खर्च में 6.1% गिरावट और अन्य खर्च में 14.5% बढ़त” लिखा है। तालिका के अनुसार 14.5% की बढ़त कर्मचारी खर्च में है, और यह मार्जिन घटाने वाला कारक है, बढ़ाने वाला नहीं। हमने तालिका के आंकड़ों का उपयोग किया है।

2. बाजार हिस्सेदारी: टिप्पणी में कुल हिस्सेदारी को “11% पर स्थिर” बताया गया है, जबकि तालिका में यह 11.4% से घटकर 11.1% (30 बेसिस पॉइंट कम) और तिमाही आधार पर 10 बेसिस पॉइंट कम दिखती है।

3. लक्ष्य का आधार: रिपोर्ट सितंबर 2028 का ईपीएस नहीं छापती। Rs 3,006 का लक्ष्य करीब Rs 88.4 का ईपीएस मानता है, जो ब्रोकरेज के FY28E (Rs 87.5) के करीब है। FY28E और FY29E (Rs 101.3) का औसत करीब Rs 94.4 बैठता है, जिस पर 34 गुना से करीब Rs 3,210 बनता।

4. इकाई: तालिका में सक्रिय व्यक्तिगत खातों की इकाई रुपये में लिखी है, जबकि यह खातों की संख्या (करीब 3.2 करोड़) है। इक्विटी मिश्रण 67.1% में ईटीएफ शामिल माना गया है, क्योंकि केवल इक्विटी एयूएम कुल का 62.8% बैठता है।

जोखिम: किन बातों पर नजर रखें

शेयर बाजार में गिरावट: इक्विटी एयूएम और ईल्ड दोनों पर सीधा असर पड़ सकता है।

नियामकीय बदलाव: खर्च अनुपात या वितरण नियमों में बदलाव कमाई को प्रभावित कर सकते हैं।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा: हाइब्रिड श्रेणियों में हिस्सेदारी का घटना इस दबाव की झलक है।

स्तर एक नजर में: एचडीएफसी एएमसी · रेटिंग BUY (बीओबीकैप्स) · भाव Rs 2,415 · लक्ष्य Rs 3,006 (पहले Rs 3,200) · बढ़त ~24% · 52 हफ्ते Rs 2,206 से Rs 2,967 · आधार सितंबर 2028E ईपीएस का 34 गुना

स्रोत

बीओबी कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड (बीओबीकैप्स), एचडीएफसी एएमसी नतीजा समीक्षा, 16 अक्टूबर 2026; विश्लेषक रुतम येल्लापुरकर (रिसर्च एसोसिएट)। कंपनी के आंकड़े, ब्लूमबर्ग, एनएसई (भाव 15 अक्टूबर 2026 तक)। बीओबीकैप्स, बैंक ऑफ बड़ौदा की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।

करोड़ और लाख करोड़ के आंकड़े रिपोर्ट के आंकड़ों से परिवर्तित हैं। बाजार पूंजीकरण Rs 2,415 के भाव और करीब 42.8 करोड़ शेयरों के आधार पर निकाला गया है। ईल्ड बाट, एयूएम रेलगाड़ी और खर्च के लिफाफे ब्रोकरेज के छपे आंकड़ों से बनाए गए हैं।

अस्वीकरण: प्रतिभूति बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह लेख ब्रोकरेज की रिपोर्ट पर आधारित है और निवेश की सलाह नहीं है। निवेश से पहले सभी संबंधित दस्तावेज ध्यान से पढ़ें और अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

भारतीय क्रिकेट टीम बनाम इंग्लैंड क्रिकेट टीम के आंकड़े एवं टाइमलाइन

Wed, 10/14/2026 - 18:25
भारत और इंग्लैंड की पुरुष क्रिकेट टीमें इस साल नौ बार आमने-सामने आईं: मार्च में टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल और फिर जुलाई में इंग्लैंड का पांच टी20 और तीन वनडे मैचों का दौरा। मुंबई के वानखेड़े में भारत ने रोमांचक सेमीफाइनल सात रन से जीता और आगे चलकर खिताब बचाया। लेकिन जुलाई में तस्वीर पूरी तरह पलट गई। इंग्लैंड ने टी20 सीरीज 4-0 और वनडे सीरीज 2-1 से जीती, यानी दौरे के आठ में से छह मैच अपने नाम किए। इस दौरान भारत को टी20 में अपनी सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी और इंग्लैंड आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंच गया। जुलाई के बाद दोनों पुरुष टीमों के बीच कोई मैच नहीं हुआ है।

क्रिकेट · साल 2026 का लेखा-जोखा · पुरुष क्रिकेट

भारत बनाम इंग्लैंड 2026: मार्च में भारत की बादशाहत, जुलाई में इंग्लैंड का दबदबा

वानखेड़े में विश्व कप की निर्णायक जीत से लेकर ट्रेंट ब्रिज की ऐतिहासिक हार तक, नौ मुकाबलों की पूरी कहानी।

भारत की जीत

2

बेनतीजा

1

इंग्लैंड की जीत

6

कुल मुकाबले

9

नौ मैचों की फॉर्म गाइड

नीचे हर गोला एक मैच है, बाएं से दाएं तारीख के क्रम में। हरा रंग भारत की जीत, लाल इंग्लैंड की जीत और स्लेटी बेनतीजा मैच दर्शाता है।

भा

5 मार्च
WC सेमी

NR

1 जुलाई
T20I-1

इं

4 जुलाई
T20I-2

इं

7 जुलाई
T20I-3

इं

9 जुलाई
T20I-4

इं

11 जुलाई
T20I-5

भा

14 जुलाई
ODI-1

इं

16 जुलाई
ODI-2

इं

19 जुलाई
ODI-3

आंकड़े साफ हैं: नौ निर्धारित मुकाबलों में से आठ का नतीजा निकला। भारत ने दो जीते, इंग्लैंड ने छह, और डरहम का पहला टी20 बारिश की भेंट चढ़ गया।

वानखेड़े: वह मैच जो सबसे ज्यादा मायने रखता था

5 मार्च को मुंबई में खेले गए टी20 विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में गत चैंपियन भारत ने इंग्लैंड को 7 रन से हराया। यह लगातार तीसरा टी20 विश्व कप था, जिसके सेमीफाइनल में ये दोनों टीमें टकराईं।

संजू सैमसन ने सिर्फ 42 गेंदों पर 89 रन ठोके, जिनमें सात छक्के और आठ चौके शामिल थे। उनकी बदौलत भारत ने 253/7 का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में जैकब बेथेल ने 48 गेंदों पर 105 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन इंग्लैंड 246/7 पर रुक गया। इसके बाद भारत ने फाइनल जीतकर अपना खिताब बरकरार रखा।

दोनों पारियां, एक नजर में

भारत 253/7 (20 ओवर)

इंग्लैंड 246/7 (20 ओवर)

फासला सिर्फ 7 रन का, यानी भारत के कुल स्कोर का 3 प्रतिशत से भी कम।

टी20 सीरीज: इंग्लैंड ने 4-0 से धो डाला

जुलाई के दौरे में इंग्लैंड की कप्तानी हैरी ब्रूक के हाथ में थी, जबकि भारत की ओर से टी20 में श्रेयस अय्यर और वनडे में शुभमन गिल कप्तान थे। भारत इस दौरे पर आयरलैंड में 2-0 की सीरीज हार के बाद पहुंचा था, और यह झटका इंग्लैंड में और गहरा हो गया।

मैच नतीजा अहम प्रदर्शन पहला, डरहम (1 जुलाई) बेनतीजा (बारिश) बारिश के कारण मैच पूरा नहीं हो सका (स्कोर पर संपादक की टिप्पणी देखें) दूसरा, ओल्ड ट्रैफर्ड (4 जुलाई) इंग्लैंड 4 विकेट से जीता भारत 190/7 (किशन 49, अभिषेक 43); इंग्लैंड 191/6, 19 ओवर में। बेथेल 46 गेंदों पर 76 नाबाद तीसरा, ट्रेंट ब्रिज (7 जुलाई) इंग्लैंड 125 रन से जीता इंग्लैंड 201/7 (सॉल्ट 70, करन 41*); भारत 11.4 ओवर में 76 पर ऑल आउट (टंग 4-28, आर्चर 3-29, रशीद 2-14) चौथा, ब्रिस्टल (9 जुलाई) इंग्लैंड 9 विकेट से जीता भारत 158/7 (अय्यर 80*); इंग्लैंड 159/1, 13.5 ओवर में (ब्रूक 79*, सॉल्ट 59*) पांचवां, साउथैम्पटन (11 जुलाई) इंग्लैंड 56 रन से जीता इंग्लैंड 257/3 (बटलर 131, ब्रूक 95*); भारत 201/8 (किशन 56, तिलक 53; करन 3-36)

ट्रेंट ब्रिज का पतन। 202 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय पारी 70 गेंदों में सिमट गई। 125 रन की यह हार टी20 इंटरनेशनल में भारत की अब तक की सबसे बड़ी हार है। कप्तान अय्यर ने इस प्रदर्शन को सीधे शब्दों में “atrocious” (बेहद खराब) बताया।

बटलर-ब्रूक की रिकॉर्ड साझेदारी। साउथैम्पटन में जोस बटलर और हैरी ब्रूक ने 233 रन जोड़े, जो टी20 इंटरनेशनल में किसी भी विकेट के लिए इंग्लैंड की सबसे बड़ी साझेदारी है। 131 रन बनाने वाले बटलर प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए।

रैंकिंग में उलटफेर। इस सीरीज के बाद इंग्लैंड आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंच गया, जबकि भारत की इस फॉर्मेट में यह लगातार छठी हार थी।

एक सुनहरा पल भी। इसी सीरीज में वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल 99 दिन की उम्र में पदार्पण किया और भारत के सबसे कम उम्र के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बन गए।

रिकॉर्ड बोर्ड: 2026 में क्या-क्या टूटा

Honours Board · सम्मान पट्टिका

ब्रिस्टल, 9 जुलाई: भारत पर इंग्लैंड की पहली द्विपक्षीय टी20 सीरीज जीत पक्की।

पूरी टी20 सीरीज: तीन या उससे ज्यादा मैचों की टी20 सीरीज में भारत का सफाया करने वाली पहली टीम इंग्लैंड।

टी20 प्लेयर ऑफ द सीरीज: हैरी ब्रूक, चार पारियों में 229 रन।

लॉर्ड्स, 19 जुलाई: बेन डकेट के 141 रन, लॉर्ड्स पर पुरुष वनडे का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर।

लॉर्ड्स, 19 जुलाई: रोहित शर्मा, लॉर्ड्स पर वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय पुरुष (करियर का 34वां शतक)।

वनडे प्लेयर ऑफ द सीरीज: जो रूट, 249 रन।

वनडे सीरीज: भारत की अच्छी शुरुआत, इंग्लैंड की 2-1 से जीत मैच नतीजा अहम प्रदर्शन पहला, एजबेस्टन (14 जुलाई) भारत 6 विकेट से जीता इंग्लैंड 258 (रूट 76, डॉसन 68; अक्षर 4-62); भारत 262/4, 45.2 ओवर में (गिल 80 रिटायर्ड हर्ट, अक्षर 57*, सुंदर 52*) दूसरा, कार्डिफ (16 जुलाई) इंग्लैंड 4 विकेट से जीता भारत 44 ओवर में 233 (अय्यर 66, कोहली 65; आर्चर 3-47); इंग्लैंड 235/6, 44.1 ओवर में (रूट 99*) तीसरा, लॉर्ड्स (19 जुलाई) इंग्लैंड 27 रन से जीता इंग्लैंड 387/3 (डकेट 141, बेथेल 91, रूट 74*); भारत 360/7 (रोहित 138, गिल 77, कोहली 74; करन 4-75)

एजबेस्टन में भारत का पलटवार। अक्षर पटेल ने गेंद से चार विकेट लिए और फिर बल्ले से नाबाद 57 रन बनाए। वॉशिंगटन सुंदर के साथ उनकी 102 रन की अटूट साझेदारी ने जीत पक्की की। यह इंग्लैंड पर भारत की लगातार छठी वनडे जीत थी, और इसने इस मैदान पर इंग्लैंड का सात मैचों का जीत का सिलसिला भी तोड़ दिया।

कार्डिफ में रूट का अधूरा शतक। जो रूट 99 रन पर नाबाद रहे और अपने 21वें वनडे शतक से सिर्फ एक रन दूर रह गए, क्योंकि गस एटकिंसन ने विजयी चौका जड़ दिया। इसी मैच में जसप्रीत बुमराह को बाएं घुटने में चोट लगी, जिसकी सूजन के कारण वह निर्णायक मुकाबले से बाहर रहे।

लॉर्ड्स का रन-उत्सव। निर्णायक मैच में कुल 747 रन बने। डकेट और बेथेल ने पहले विकेट के लिए 192 रन जोड़े, जो पुरुष वनडे में भारत के खिलाफ इंग्लैंड की सबसे बड़ी साझेदारी है। रोहित शर्मा के 138 रनों के बावजूद भारत लक्ष्य से 27 रन पीछे रह गया। यह 2018 के बाद भारत पर इंग्लैंड की पहली द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीत रही।

लॉर्ड्स के 747 रन, एक पट्टी में

इंग्लैंड 387 भारत 360

दोनों पारियों के बीच का अंतर सिर्फ 27 रन, जबकि मैच में कुल 10 विकेट गिरे।

महिला क्रिकेट और पृष्ठभूमि

महिला क्रिकेट, मई से जुलाई 2026

महिलाओं की टी20 सीरीज इंग्लैंड ने 2-1 से जीती और एलिस कैप्सी प्लेयर ऑफ द सीरीज रहीं। एकमात्र टेस्ट भारत ने 1-0 से जीता, जो लॉर्ड्स पर खेला गया पहला महिला टेस्ट था।

पिछली टेस्ट सीरीज, 2025

दोनों टीमों के बीच आखिरी टेस्ट सीरीज 2025 की एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी थी, जो इंग्लैंड में 2-2 से बराबर रही। मोहम्मद सिराज 23 विकेट लेकर सीरीज के सबसे सफल गेंदबाज रहे।

संपादक की टिप्पणी

डरहम का स्कोर: स्रोत में पहले टी20 (बेनतीजा) का स्कोर “भारत 158/7, इंग्लैंड 159/1, 13.5 ओवर” दिया गया है, जो ब्रिस्टल के चौथे मैच के स्कोर से हूबहू मेल खाता है। अगर इंग्लैंड 159 तक पहुंच चुका होता तो वह मैच जीत जाता, बेनतीजा नहीं रहता। इसलिए हमने डरहम का स्कोर प्रकाशित नहीं किया है।

रूट “कभी आउट नहीं हुए”: स्रोत कहता है कि रूट पूरी वनडे सीरीज में आउट नहीं हुए, लेकिन एजबेस्टन में उनके 76 रन बिना नाबाद चिह्न के दर्ज हैं और इंग्लैंड उस पारी में ऑल आउट हुआ था। दोनों बातें एक साथ सही होने की पुष्टि नहीं हो सकी।

विव रिचर्ड्स का रिकॉर्ड: स्रोत के अनुसार डकेट ने रिचर्ड्स के “1975” के 138 रन का रिकॉर्ड तोड़ा। रिचर्ड्स की लॉर्ड्स पर 138 नाबाद रन की प्रसिद्ध पारी 1979 के विश्व कप फाइनल में आई थी, इसलिए हमने वर्ष का उल्लेख नहीं किया है।

“नौ मुकाबले”: नौ की गिनती में बारिश से धुला डरहम मैच भी शामिल है। नतीजे वाले मैच आठ थे, और जुलाई दौरे के आठ निर्धारित मैचों में इंग्लैंड की छह जीत का आंकड़ा तालिकाओं से मेल खाता है।

निष्कर्ष

2026 की कहानी दो हिस्सों में बंटी है। मार्च में भारत ने वह मुकाबला जीता जिसकी कीमत सबसे ज्यादा थी, और वहां से विश्व कप खिताब तक पहुंचा। लेकिन जुलाई में इंग्लैंड ने लगभग हर पैमाने पर बढ़त बनाई: टी20 में ऐतिहासिक सफाया, नंबर एक रैंकिंग और 2018 के बाद पहली वनडे सीरीज जीत। अगली भिड़ंत में भारत के सामने चुनौती साफ है: बड़े मंच की जीत को द्विपक्षीय सीरीज की निरंतरता में बदलना।

स्रोत

Wikipedia, Onmanorama, CricTracker, IANS, UNI, TV9 Tamil, TV9 Bangla, Sports Digest, SuperSport, WTOP, San Mateo Daily Journal, The Tribune, Radio X, The Daily Star। आंकड़े स्रोत रिपोर्टों के अनुसार हैं; विसंगतियां ऊपर संपादक की टिप्पणी में दर्ज हैं।

FSSAI की शराब कार्रवाई: मैकडॉवेल्स नंबर 1, Old Monk, Antiquity Blue, Royal Challenge पर बैन

Mon, 08/10/2026 - 02:15
भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ओल्ड मॉन्क के तीन वेरिएंट सहित कई जानी-मानी रम और व्हिस्की ब्रांड्स की बिक्री पर रोक लगा दी है, जिसका आधार भ्रामक फ्लेवरिंग और लेबलिंग प्रथाओं के आरोप हैं। यह पूरे ब्रांड्स पर बैन नहीं, बल्कि विशिष्ट वेरिएंट्स तक सीमित कार्रवाई है। दस से अधिक उत्पाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की फैक्ट्रियों से जुड़े हैं, और मामला अब बॉम्बे तथा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पहुंच चुका है। यह रिपोर्ट बताती है कि क्या प्रतिबंधित हुआ, क्यों हुआ, और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है। कार्रवाई की शुरुआत कैसे हुई FSSAI ने अपना पहला नोटिस 10 जुलाई को जारी किया, जिसका आधार 2018 के फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एल्कोहॉलिक बेवरेजेज) रेगुलेशंस थे। इसके बाद 29 जून को एक और आदेश जारी हुआ, जो विशेष रूप से यूनाइटेड स्पिरिट्स के मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम को निशाना बनाता था। नियामक ने 2 अगस्त को एक सार्वजनिक बयान जारी कर मामले को और आगे बढ़ाया, और अगस्त की शुरुआत में कार्रवाई तेज हो गई। 3 अगस्त, 2026 को FSSAI ने छह प्रमुख व्हिस्की और रम ब्रांड्स के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री रोकने का आदेश दिया — एक ऐसा कदम जिसने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं, मुख्यतः इसलिए क्योंकि ओल्ड मॉन्क भारत में सेना की कैंटीनों, कॉलेज के छात्रावासों और सर्दियों की शामों से जुड़ी एक सांस्कृतिक पहचान रखता है। प्रतिबंधित वेरिएंट्स की पूरी सूची यह प्रतिबंध महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की कई फैक्ट्रियों और निर्माताओं को प्रभावित करता है। पूरी सूची इस प्रकार है: ब्रांड / वेरिएंटनिर्माताफैक्ट्री स्थान ओल्ड मॉन्क द लीजेंडमोहन रॉकी स्प्रिंगवाटरखोपोली, महाराष्ट्र ओल्ड मॉन्क गोल्ड रिजर्वमोहन रॉकी स्प्रिंगवाटरखोपोली, महाराष्ट्र ओल्ड मॉन्क XXX मैच्योर्ड रममोहन रॉकी स्प्रिंगवाटरखोपोली, महाराष्ट्र मैकडॉवेल्स नंबर 1 रमयूनाइटेड स्पिरिट्स (डियाजियो)बारामती, महाराष्ट्र मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रमएसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीजमध्य प्रदेश एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्कीयूनाइटेड स्पिरिट्स (डियाजियो)मध्य प्रदेश रॉयल चैलेंज व्हिस्कीयूनाइटेड स्पिरिट्स (डियाजियो)मध्य प्रदेश बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्कीइनब्रू बेवरेजेजमध्य प्रदेश ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रमइनब्रू बेवरेजेजमध्य प्रदेश सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्कीएसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीजमध्य प्रदेश FSSAI ने महाराष्ट्र के छह अन्य निर्माताओं को भी नोटिस जारी किए हैं, और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की उम्मीद है। इसके अलावा गोवा में मंडेक्सी डिस्टिलरीज में निरीक्षण भी किया गया है। दूसरे शब्दों में, यह सूची अंतिम नहीं बल्कि शुरुआती बिंदु मानी जानी चाहिए — जांच के आगे बढ़ने के साथ इसमें और वेरिएंट्स जुड़ सकते हैं। निशाने पर क्यों आए ये उत्पाद: फ्लेवरिंग की समस्या इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में एक तकनीकी लेकिन महत्वपूर्ण अंतर है कि स्पिरिट्स कैसे बनाए जाते हैं। यह कार्रवाई FSSAI के एक आधिकारिक बयान के बाद हुई, जिसमें प्रमुख स्पिरिट्स निर्माताओं पर आरोप लगाया गया कि वे न्यूट्रल स्पिरिट में बाहरी कृत्रिम या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर मिलाकर उसे मानक व्हिस्की और रम जैसा सेंसरी अनुभव देने की कोशिश कर रहे थे। नियामक शराब में फ्लेवरिंग को श्रेणी के तौर पर खारिज नहीं कर रहा। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि कॉफी या वेनिला जैसे अलग वेरिएंट बनाने के लिए तकनीकी रूप से उचित फ्लेवरिंग की अनुमति है; नियामक की कार्रवाई सिर्फ उन बाहरी योजकों पर केंद्रित है जो मानक स्पिरिट्स के स्वाद की कृत्रिम नकल करते हैं। नियामक जो अंतर स्पष्ट कर रहा है वह मूलतः यह है: किसी नए, स्पष्ट रूप से लेबल किए गए वेरिएंट को बनाने के लिए कॉफी या वेनिला फ्लेवर मिलाना वैध उत्पाद नवाचार है। लेकिन ऐसा फ्लेवरिंग एजेंट मिलाना जो एज्ड रम या व्हिस्की के स्वाद की नकल करे, और फिर उसे मानक रम या व्हिस्की के रूप में बेचना — यह पूरी तरह अलग मामला है; यह उस मैच्योरेशन प्रक्रिया की जगह रसायन विज्ञान को रख देता है जिसके लिए उपभोक्ता कीमत चुकाते हैं। FSSAI अधिकारियों ने कथित तौर पर इसकी तुलना चाय में चाय के अर्क मिलाकर उसे और ज़्यादा “चाय जैसा” बनाने से की है — यह तुलना यह रेखांकित करती है कि यह प्रथा कितनी भ्रामक और उपभोक्ता-विरोधी है। FSSAI ने संकेत दिया है कि ऐसे उत्पादों को मानक रम या व्हिस्की के बजाय “रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट” या “व्हिस्की-फ्लेवर्ड स्पिरिट” के रूप में लेबल किया जाना चाहिए — अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह लेबलिंग भेद व्यावसायिक रूप से काफी अहम साबित होगा, क्योंकि उपभोक्ता और खुदरा विक्रेता शेल्फ उत्पादों को इसी आधार पर वर्गीकृत करते हैं। ओल्ड मॉन्क की अतिरिक्त समस्या: एज-क्लेम का उल्लंघन ओल्ड मॉन्क का मामला फ्लेवरिंग विवाद से आगे एक दूसरी, अलग समस्या भी रखता है — जो विशेष रूप से इसके XXX मैच्योर्ड रम वेरिएंट से जुड़ी है। FSSAI ने पाया कि “7 साल पुराना ब्लेंडेड” लेबल रखने वाला यह XXX वेरिएंट मुख्यतः अनएज्ड न्यूट्रल स्पिरिट से बना था, जिसमें मैच्योर्ड रम का हिस्सा 5 प्रतिशत से भी कम था। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2018 के फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एल्कोहॉलिक बेवरेजेज) रेगुलेशंस के तहत एक नियामकीय सिद्धांत लागू होता है: एज क्लेम को ब्लेंड में मौजूद सबसे कम उम्र के स्पिरिट को दर्शाना चाहिए, सबसे पुराने को नहीं। “7 साल पुराना” लेबल यह संकेत देता है कि हर घटक कम से कम उतने समय तक मैच्योर हुआ है — न कि यह कि सिर्फ एक छोटा हिस्सा मैच्योर हुआ है जबकि बाकी लगभग बिना एज़िंग के है। इसी विशिष्ट आधार पर XXX वेरिएंट नियामकीय मापदंड पर खरा नहीं उतरा — यह व्यापक फ्लेवरिंग विवाद से अलग और स्वतंत्र मुद्दा है, जो बाकी वेरिएंट्स को प्रभावित करता है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह बैन क्या नहीं है। यह बिक्री-स्तर पर लगाया गया प्रतिबंध है, न कि रखने या सेवन पर रोक, और नियामक ने इसे स्वास्थ्य के लिए खतरा भी नहीं बताया है। जो बोतलें पहले से लोगों के पास मौजूद हैं, वे इस आदेश से अप्रभावित हैं — यह मूलतः एक विनिर्माण और खुदरा-बिक्री प्रतिबंध है, जिसका मकसद पुनर्निर्माण या पुनः लेबलिंग करवाना है। कॉर्पोरेट प्रतिरोध: कानूनी लड़ाई प्रभावित निर्माताओं ने FSSAI के निष्कर्षों को चुपचाप स्वीकार नहीं किया है, और उद्योग की प्रतिक्रिया तेजी से अदालतों तक पहुंच गई है। यूनाइटेड स्पिरिट्स (डियाजियो इंडिया) सबसे मुखर चुनौती देने वाली कंपनी रही है। कंपनी ने 1 अगस्त को FSSAI के 29 जून के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की, और इस कानूनी कदम की जानकारी शेयर बाजारों को दी। अपनी नियामकीय फाइलिंग में, यूनाइटेड स्पिरिट्स ने कहा कि उसके उत्पाद लेबल लागू भारतीय सुरक्षा कानूनों का पूरी तरह पालन करते हैं और लंबे समय से चली आ रही उद्योग प्रथाओं को दर्शाते हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि यह कार्रवाई फिलहाल कोई भौतिक परिचालन या वित्तीय प्रभाव नहीं डालती, क्योंकि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीज ने एक समानांतर रास्ता अपनाया। कंपनी ने 31 जुलाई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में FSSAI के उस नोटिस के खिलाफ याचिका दाखिल की, जो उसके सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रम के कॉन्ट्रैक्ट निर्माण से जुड़ा था। मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर, जो ओल्ड मॉन्क बनाती है, ने अब तक की खबरों के अनुसार कोई समान कानूनी चुनौती दाखिल नहीं की है — हालांकि, उद्योग के बाकी साथियों की कानूनी गतिविधियों के पैमाने को देखते हुए, आगे मुकदमेबाजी होना कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। बाजार पर दांव: बोतल से आगे की कहानी निवेशकों और उद्योग पर नजर रखने वालों के लिए, विवादों में घिरे ये ब्रांड्स कोई मामूली खिलाड़ी नहीं हैं। ब्रांड चैंपियंस 2026 रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल चैलेंज दुनिया का पांचवां सबसे ज़्यादा बिकने वाला भारतीय व्हिस्की ब्रांड है — यानी यूनाइटेड स्पिरिट्स, डियाजियो की भारतीय शाखा के रूप में, बैन की गई सूची में मौजूद कई उत्पादों — मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज — में महत्वपूर्ण व्यावसायिक हिस्सेदारी रखती है। यह व्यापक एक्सपोज़र ही शायद यह बताता है कि यूनाइटेड स्पिरिट्स प्रभावित कंपनियों में सबसे आक्रामक याचिकाकर्ता क्यों रही है — तीन अलग-अलग उत्पाद श्रृंखलाओं में एक साथ बिक्री रोक, मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर जैसी संकीर्ण दायरे वाली कंपनी की तुलना में कहीं बड़ा राजस्व व्यवधान दर्शाती है। मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर के लिए गणित अलग है, लेकिन कम गंभीर नहीं। ओल्ड मॉन्क की ब्रांड पहचान दशकों से बनी उसकी “मैच्योर्ड रम” स्थिति से अविभाज्य है। यह नियामकीय निष्कर्ष कि उसका प्रमुख XXX वेरिएंट भारी मात्रा में अनएज्ड न्यूट्रल स्पिरिट है, ब्रांड के भावनात्मक और व्यावसायिक मूल्य प्रस्ताव के केंद्र पर सीधा प्रहार करता है — चाहे फ्लेवरिंग से जुड़ी मुकदमेबाजी अंततः किसी भी दिशा में क्यों न जाए। व्यापक नियामकीय और औद्योगिक निहितार्थ यह प्रकरण कुछ ऐसे संकेत देता है, जिन पर बारीकी से नज़र रखनी होगी:
  • प्रवर्तन का दायरा बढ़ रहा है, सिमट नहीं रहा। महाराष्ट्र के छह अतिरिक्त निर्माताओं को पहले से नोटिस जारी होने और गोवा में जारी निरीक्षणों को देखते हुए, मौजूदा दस वेरिएंट्स की सूची मामला सुलझने से पहले और बढ़ सकती है।
  • कानूनी सवाल अब पूरी तरह अदालतों के हाथ में है। बॉम्बे और मध्य प्रदेश, दोनों हाई कोर्ट इन चुनौतियों पर सुनवाई कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि इन प्रतिबंधों का अंतिम दायरा और अवधि काफी हद तक 2018 के एल्कोहॉलिक बेवरेजेज रेगुलेशंस की न्यायिक व्याख्या पर निर्भर करेगी, न कि सिर्फ FSSAI के मूल निष्कर्षों पर।
  • लेबलिंग सुधार, न कि पूर्ण प्रतिबंध, अंतिम परिणाम हो सकता है। FSSAI का अपना सुझाया गया समाधान — फ्लेवर्ड स्पिरिट्स को “रम-फ्लेवर्ड स्पिरिट” या “व्हिस्की-फ्लेवर्ड स्पिरिट” के रूप में पुनः लेबल करना — यह संकेत देता है कि एक बातचीत आधारित समाधान संभव है, जिससे उत्पाद संशोधित लेबलों के साथ शेल्फ पर वापस आ सकें, न कि स्थायी रूप से हटा दिए जाएं।
  • फिलहाल, प्रतिष्ठा को जोखिम वित्तीय जोखिम से आगे है। यूनाइटेड स्पिरिट्स ने खुद शेयर बाजारों को बताया है कि इस कार्रवाई का अभी कोई भौतिक वित्तीय प्रभाव नहीं है। सभी प्रभावित ब्रांड्स के लिए बड़ी निकट-अवधि की लागत उपभोक्ता विश्वास और मीडिया कथानक हो सकती है — विशेष रूप से ओल्ड मॉन्क जैसे ब्रांड के लिए, जिसका आकर्षण हमेशा से नॉस्टैल्जिया और प्रामाणिकता पर आंशिक रूप से टिका रहा है।
रणनीतिक निष्कर्ष यूनाइटेड स्पिरिट्स जैसी सूचीबद्ध स्पिरिट्स निर्माता कंपनियों पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए, यह स्थिति फिलहाल एक कानूनी और प्रतिष्ठा संबंधी दबाव के रूप में सामने आती है, न कि तत्काल आय पर असर डालने वाली घटना के रूप में — कंपनी के अपने खुलासे इसी दिशा का समर्थन करते हैं। हालांकि, लंबी मुकदमेबाजी, प्रतिबंध का और वेरिएंट्स तक विस्तार, या FSSAI के निष्कर्षों को बरकरार रखने वाला कोई अदालती फैसला यह गणित बदल सकता है — विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए जिनकी प्रभावित ब्रांड्स में केंद्रित हिस्सेदारी है। उपभोक्ताओं और खुदरा विक्रेताओं के लिए व्यावहारिक निष्कर्ष सुर्खियों से कहीं संकुचित है: विशिष्ट वेरिएंट्स शेल्फ से हटे हैं, पूरे ब्रांड परिवार नहीं, और पहले से प्रचलन में मौजूद बोतलें रखना और सेवन करना कानूनी रूप से वैध बना हुआ है।