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आज का मौसम 29 मई: 16 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट, दिल्ली में राहत की उम्मीद लेकिन मानसून अभी दूर

दिल्ली एक बार फिर उस मौसम से गुजर रही है जिसे शहर के लोग हर साल जानते भी हैं और उससे डरते भी हैं। राजधानी में प्री-मानसून गर्मी अपने चरम की ओर बढ़ रही है। तापमान 34°C के आसपास बना हुआ है, जबकि आने वाले दिनों में बारिश की कुछ संभावना दिखाई दे रही है। हालांकि सप्ताहांत में होने वाली संभावित बारिश अस्थायी राहत दे सकती है, लेकिन असली राहत अभी कई सप्ताह दूर है। सड़कों पर तपिश, लू के थपेड़े, रातों की बेचैनी और कामकाजी वर्ग पर बढ़ता दबाव इस मौसम की कठोर वास्तविकता को उजागर करता है। दिल्ली एक बार फिर मानसून का इंतजार कर रही है—वैसा ही इंतजार जैसा सदियों से करती आई है।

उबलते तवे जैसी बन चुकी है दिल्ली

नई दिल्ली में घर से बाहर कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो किसी विशाल भट्टी के भीतर प्रवेश कर लिया हो। हवा शुष्क है, भारी है और लगातार शरीर पर दबाव बनाती है। राजधानी का तापमान आज लगभग 34°C दर्ज किया गया, जबकि आसमान आंशिक रूप से साफ और धूप वाला बना हुआ है। बादलों की मौजूदगी देखने में राहत का संकेत देती है, लेकिन वास्तव में वे गर्मी को कम करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। यह दिल्ली की देर-मई वाली गर्मियों का परिचित चेहरा है—एक ऐसा मौसम जो शहर पर पूरी तरह हावी हो जाता है। दिल्ली के करोड़ों निवासी इस मौसम का सामना अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं। सड़क किनारे दुकानदार, रिक्शा चालक, कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी और स्कूल जाने वाले बच्चे—सभी इस तपिश को सहने के लिए मजबूर हैं।

अगले पांच दिनों का मौसम: राहत और तपिश के बीच झूलता पूर्वानुमान

मौसम के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली फिलहाल प्री-मानसून सीजन के सबसे कठिन चरण में प्रवेश कर चुकी है। यह वह समय होता है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पहले गर्मी अपनी चरम सीमा तक पहुंचती है। शनिवार को बारिश की संभावना सबसे अधिक दिखाई दे रही है। रविवार को भी बादल और वर्षा का असर बना रह सकता है। लेकिन सप्ताह की शुरुआत के साथ तापमान फिर तेजी से ऊपर चढ़ने की आशंका है। दिल्लीवासियों के लिए यह पैटर्न नया नहीं है। कुछ घंटों की बारिश, थोड़ी ठंडक और फिर तेज धूप के साथ गर्मी की वापसी—यह हर साल की कहानी है।

मौसम ऐप से कहीं अधिक कठोर है जमीनी हकीकत

सिर्फ तापमान का आंकड़ा दिल्ली की गर्मी का पूरा चित्र नहीं दिखाता। जब आधिकारिक तापमान 34°C होता है, तब सड़कों, इमारतों और कंक्रीट की सतहों पर महसूस होने वाला तापमान इससे काफी अधिक हो सकता है। दोपहर के समय सड़कें मृगतृष्णा जैसी चमकने लगती हैं। कारों की छतें, रेलिंग और धातु की सतहें इतनी गर्म हो जाती हैं कि उन्हें नंगे हाथ से छूना मुश्किल हो जाता है। इस मौसम में दिल्ली की सबसे चर्चित पहचान है—लू। राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों से आने वाली यह गर्म और धूलभरी हवा कुछ ही घंटों में तापमान को कई डिग्री तक बढ़ा सकती है। यह कोई सामान्य हवा नहीं होती, बल्कि तपिश से भरा एक तीखा झोंका होती है जो शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म कर देता है। रातें भी राहत नहीं देतीं। दिन भर गर्म हुई सड़कें और इमारतें देर रात तक गर्मी छोड़ती रहती हैं। परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट के बावजूद वातावरण गर्म बना रहता है और बिना पंखे या एयर कंडीशनर के आरामदायक नींद लगभग असंभव हो जाती है।

सबसे ज्यादा कीमत कौन चुका रहा है?

दिल्ली की गर्मी सभी को प्रभावित करती है, लेकिन इसका सबसे बड़ा बोझ उन लोगों पर पड़ता है जिनके पास इससे बचने के संसाधन नहीं हैं। निर्माण श्रमिक, डिलीवरी एजेंट, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, सफाई कर्मचारी और दिहाड़ी मजदूर इस मौसम में सबसे अधिक जोखिम उठाते हैं। उनके लिए गर्मी केवल असुविधा नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन जाती है। हर वर्ष मई और जून के दौरान राजधानी के अस्पतालों में हीट एग्जॉशन, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। विशेष रूप से निम्नलिखित वर्ग अधिक संवेदनशील माने जाते हैं: बुजुर्ग नागरिक छोटे बच्चे गर्भवती महिलाएं पहले से बीमार लोग खुले वातावरण में काम करने वाले श्रमिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर के भीतर रहने, पर्याप्त पानी पीने और अत्यधिक शारीरिक गतिविधि से बचने की सलाह देते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि शहर की बड़ी आबादी के लिए इन सलाहों का पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता।

मानसून: राहत का सबसे बड़ा इंतजार

दिल्ली में इस समय सबसे अधिक पूछा जाने वाला सवाल यही है—मानसून कब आएगा? ऐतिहासिक रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली में 27 जून से 5 जुलाई के बीच पहुंचता रहा है। हालांकि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण इसकी समय-सीमा में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। फिलहाल राजधानी प्री-मानसून मौसम में है। इस दौरान: अत्यधिक गर्मी बनी रहती है। धूल भरी आंधियां आती हैं। गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश होती है। अस्थायी ठंडक मिलती है, लेकिन गर्मी पूरी तरह समाप्त नहीं होती। इस सप्ताहांत की बारिश भी संभवतः ऐसे ही प्री-मानसून तूफानों का परिणाम होगी। बारिश के बाद कुछ घंटों के लिए सड़कें ठंडी होंगी, मिट्टी से सोंधी खुशबू उठेगी और लोगों को राहत महसूस होगी। लेकिन इसके बाद सूरज फिर अपनी पूरी ताकत के साथ लौट सकता है। वास्तविक मानसूनी राहत अभी भी लगभग 4 से 5 सप्ताह दूर मानी जा रही है।

दिल्ली को और कितने दिन झेलनी होगी यह तपिश?

यदि सवाल यह है कि गर्मी कब खत्म होगी, तो जवाब है—अभी कुछ समय और इंतजार करना होगा। दिल्ली में गर्मी का मौसम सामान्यतः अप्रैल से जून तक रहता है, जबकि सबसे अधिक तापमान मई और जून के पहले पखवाड़े में देखने को मिलता है। इस अवधि में तापमान का 40°C के पार जाना सामान्य माना जाता है और गंभीर हीटवेव के दौरान 44°C से अधिक तापमान भी दर्ज किया जा सकता है। वर्तमान तापमान 34°C भले ही बेहद असहज महसूस हो रहा हो, लेकिन तकनीकी रूप से यह दिल्ली की संभावित अधिकतम गर्मी से अभी नीचे है। मानसून के सक्रिय होने के बाद तापमान आमतौर पर 28°C से 30°C के दायरे में आ जाता है। हालांकि इसके साथ नमी बढ़ जाती है और वातावरण अधिक उमस भरा महसूस होने लगता है। फिर भी अधिकांश दिल्लीवासी उमस को झुलसाने वाली गर्मी के मुकाबले बेहतर विकल्प मानते हैं।

एक ऐसा शहर जो हर साल गर्मी को हराता है

दिल्ली का इतिहास गर्मियों के साथ उसके संघर्ष और अनुकूलन की कहानियों से भरा पड़ा है। मुगल शासकों ने गर्मी से बचने के लिए भूमिगत कक्ष बनवाए। ब्रिटिश अधिकारी गर्मियों में पहाड़ों की ओर रुख करते थे। आधुनिक दिल्लीवासी एयर कंडीशनर, इनवर्टर, ठंडे पेय और रेफ्रिजरेटर का सहारा लेते हैं। लेकिन मूल कहानी वही रहती है। यह शहर शिकायत करता है, पसीना बहाता है, बहस करता है कि इस बार की गर्मी पिछले साल से ज्यादा है या नहीं, और फिर भी अपने दैनिक जीवन को जारी रखता है। नींबू पानी, आम पन्ना और ठंडी लस्सी के सहारे लोग दिन गुजारते हैं। शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रम शाम के समय आयोजित किए जाते हैं। और हर कोई आसमान की ओर देखता है—उस क्षण की प्रतीक्षा में जब दक्षिण-पश्चिम से बादल उठेंगे और मानसून की पहली बूंदें धरती को छूएंगी। वह दिन आएगा। लेकिन तब तक दिल्ली को अपनी सदियों पुरानी परंपरा निभानी होगी—गर्मी को सहना, उससे जूझना और अंततः उसे पीछे छोड़ देना।

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कल का मौसम: दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश में अत्यधिक गर्म मौसम

दिल्ली इस समय वर्ष के सबसे कठिन जलवायु चरणों में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ तापमान केवल एक मौसमीय आंकड़ा नहीं बल्कि एक आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य-संबंधी चुनौती बन चुका है। मई 2026 के अंतिम सप्ताह में राजधानी लगातार 42–43°C के आसपास झुलस रही है, जबकि रातें भी 35°C से नीचे राहत नहीं दे रहीं। देश के कई हिस्सों में 47–48°C तक तापमान दर्ज होना इस गर्मी की तीव्रता को और स्पष्ट करता है। अल्पकालिक आंधी-तूफान राहत देने में विफल रहे हैं, और वास्तविक राहत अब केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से ही संभव दिखती है।

दिल्ली में तापमान का असामान्य दबाव

नई दिल्ली में मौजूदा हालात सामान्य गर्मी से कहीं अधिक गंभीर रूप ले चुके हैं। 24 मई 2026 की रात को तापमान 35.6°C पर बना रहा, जो कि सामान्य रात्री तापमान से काफी ऊपर है। दिन के समय पारा 43.4°C तक पहुंच गया, जो इस सीजन के उच्चतम स्तरों में से एक है। आने वाले दिनों में स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता। पूर्वानुमान दर्शाते हैं कि तापमान लगातार 42–43°C के बीच बना रहेगा, जबकि बारिश की संभावना बेहद सीमित है। 24 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 0% 25 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 35% 26 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 0% 27 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 0% 28 मई: ~42°C, वर्षा संभावना 60% यह पैटर्न स्पष्ट करता है कि भले ही कुछ दिनों में हल्की वर्षा की संभावना हो, परंतु व्यापक राहत की उम्मीद अभी दूर है।

राष्ट्रीय स्तर पर हीटवेव का विस्तार

दिल्ली अकेला नहीं है। भारत के कई हिस्से—विशेष रूप से हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश—भीषण हीटवेव की चपेट में हैं। कई क्षेत्रों में तापमान 47–48°C तक पहुंच चुका है, जो कि मानव सहनशीलता की सीमा के करीब है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 29.3°C के आसपास बना हुआ है, जो यह संकेत देता है कि रातों में भी शरीर को ठंडक नहीं मिल पा रही। इस तरह का “हीट स्ट्रेस” शहरी अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डालता है—ऊर्जा मांग बढ़ती है, श्रम उत्पादकता घटती है, और स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ता है। हाल ही में आए आंधी-तूफान ने थोड़ी राहत जरूर दी, जिसमें 81 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, लेकिन यह राहत अल्पकालिक रही और तापमान जल्द ही वापस उच्च स्तर पर लौट आया।

राहत की संभावनाएँ और मानसून की भूमिका

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, हीटवेव की स्थिति निकट भविष्य में फिर से तेज हो सकती है, और तापमान 44–45°C तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, जून की शुरुआत से प्री-मानसून गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जो कुछ हद तक राहत दे सकती है। वास्तविक और स्थायी राहत का स्रोत हर साल की तरह दक्षिण-पश्चिम मानसून ही रहेगा। इस वर्ष मानसून केरल में सामान्य से पहले, 22 से 26 मई के बीच पहुंचने की संभावना है। इसके बाद यह धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ेगा: तमिलनाडु: 1–6 जून कर्नाटक: 1–5 जून अन्य दक्षिणी राज्य: मध्य जून तक दिल्ली में मानसून का आगमन ऐतिहासिक रूप से जून के अंत से जुलाई की शुरुआत के बीच होता है: 2025: 26 जून 2022: 30 जून 2021: 13 जुलाई 2020: 25 जून इस ट्रेंड के आधार पर, 2026 में भी राजधानी को वास्तविक राहत जून के अंतिम सप्ताह के आसपास मिलने की संभावना है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

यह गर्मी केवल मौसम की कहानी नहीं है; इसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। लगातार उच्च तापमान: बिजली की मांग को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा देता है निर्माण और आउटडोर श्रम गतिविधियों को बाधित करता है स्वास्थ्य लागत को बढ़ाता है, विशेषकर हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों के लिए यह संकेत है कि पीक डिमांड प्रबंधन और ग्रिड स्थिरता आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होंगे। वहीं, शहरी योजना में “हीट रेजिलिएंस” अब एक अनिवार्य तत्व बनता जा रहा है।

रणनीतिक निष्कर्ष और आगे की दिशा

दिल्ली फिलहाल अपने सबसे कठोर गर्मी के चरण में है, और निकट अवधि में तापमान 42–45°C के बीच बने रहने की संभावना है। अल्पकालिक आंधी या हल्की वर्षा कुछ राहत दे सकती है, लेकिन यह टिकाऊ समाधान नहीं है। निवेश और नीति के दृष्टिकोण से: ऊर्जा अवसंरचना में निवेश प्राथमिकता बनना चाहिए शहरी कूलिंग समाधान (ग्रीन स्पेस, कूल रूफ्स) को बढ़ावा देना आवश्यक है स्वास्थ्य क्षेत्र को हीटवेव-रेडी बनाना होगा अंततः, मानसून ही वह निर्णायक कारक होगा जो इस गर्मी के दबाव को तोड़ेगा। लेकिन जब तक वह नहीं आता, दिल्ली को इस चरम तापमान के साथ जीना होगा—और यह स्थिति भविष्य के जलवायु जोखिमों का संकेत भी देती है।

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आज का मौसम: दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप, 45°C के पार पहुंचा पारा

नई दिल्ली में शुक्रवार, 22 मई 2026 का दिन राजधानीवासियों के लिए एक गंभीर हीटवेव चेतावनी लेकर आया है। शहर आज अत्यधिक गर्म और शुष्क मौसम की चपेट में है, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। सुबह से ही तेज धूप और साफ आसमान ने गर्मी की तीव्रता को और बढ़ा दिया है। मौसम विभाग और विभिन्न मौसम एजेंसियों के आंकड़े संकेत देते हैं कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र फिलहाल उत्तर भारत की सबसे कठोर प्री-मानसून गर्मी का सामना कर रहा है। कम आर्द्रता, शुष्क हवाएं और बारिश की अनुपस्थिति ने हालात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हालांकि आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ कुछ राहत ला सकता है, लेकिन फिलहाल राजधानी को अत्यधिक तापमान और हीटवेव जैसी परिस्थितियों से गुजरना होगा।

दिल्ली की सड़कों पर आग बरसाती धूप

राष्ट्रीय राजधानी आज पूरी तरह धूप की चादर में लिपटी हुई है। सफदरजंग मौसम केंद्र के अनुसार सुबह के समय तापमान लगभग 35°C दर्ज किया गया, जबकि दोपहर तक यह तेजी से बढ़कर 45°C तक पहुंच सकता है। यह तापमान सामान्य मौसमी औसत से काफी ऊपर है और इसे गंभीर हीटवेव श्रेणी में रखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मई 2026 दिल्ली के लिए पिछले कई वर्षों के सबसे गर्म महीनों में से एक बनता जा रहा है। शहर में रात का न्यूनतम तापमान भी लगभग 35°C रहने का अनुमान है, जो यह दर्शाता है कि रात में भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली।

कम आर्द्रता ने गर्मी को बनाया और खतरनाक

आज की गर्मी को और अधिक गंभीर बनाने वाला प्रमुख कारक है अत्यंत कम आर्द्रता। वर्तमान में दिल्ली की आर्द्रता केवल 19% के आसपास बनी हुई है। आमतौर पर कम नमी को अपेक्षाकृत सहनीय माना जाता है, लेकिन जब तापमान 45°C के आसपास पहुंच जाए, तब शुष्क हवा भी शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। 0% बादल छाए रहने के कारण सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों में शरीर तेजी से डिहाइड्रेट होता है, जिससे हीट स्ट्रोक, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वायुदाब लगभग 1003 mb दर्ज किया गया है, जो गर्म और अस्थिर वातावरण का संकेत देता है।

गर्म हवाएं दे रही हैं भट्टी जैसा एहसास

दिल्ली में पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिशाओं से हवाएं चल रही हैं। इन हवाओं की गति लगभग 21.6 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई है, जबकि कुछ स्थानों पर झोंकों की गति 8.4 मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच रही है। हालांकि तेज हवाएं सामान्य परिस्थितियों में राहत देती हैं, लेकिन मौजूदा तापमान में ये हवाएं गर्म हवा के ब्लोअर जैसी महसूस हो रही हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, यह पैटर्न प्री-मानसून सर्कुलेशन का हिस्सा है, जो उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक गर्म परिस्थितियां पैदा करता है।

बारिश की उम्मीद फिलहाल नहीं, लेकिन मौसम बदलने के संकेत

आज दिल्ली में बारिश की संभावना 0% है और पूरे दिन आसमान साफ रहने का अनुमान है। वर्षा का कोई सक्रिय सिस्टम फिलहाल राजधानी के ऊपर मौजूद नहीं है। हालांकि मौसम विज्ञानियों की नजर अब एक तेजी से बढ़ते पश्चिमी विक्षोभ पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर सकता है। अनुमान है कि सोमवार, 25 मई को दिल्ली-एनसीआर में 45% तक बारिश की संभावना बन सकती है। यदि यह सिस्टम सक्रिय हुआ, तो इसके प्रभाव से गरज-चमक, धूलभरी आंधी, बादल और हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव राजधानी को मौजूदा भीषण गर्मी से अस्थायी राहत प्रदान कर सकता है।

पूरे सप्ताह जारी रह सकती है हीटवेव

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली का तापमान लगातार अत्यधिक ऊंचे स्तर पर बना रहेगा। सप्ताहांत में अधिकतम तापमान 43°C से 45°C के बीच रह सकता है, जबकि रात का तापमान भी 31°C से 35°C के बीच रहने की संभावना है। शनिवार को तापमान में मामूली गिरावट दर्ज हो सकती है, लेकिन रविवार और अगले सप्ताह की शुरुआत में फिर से गर्मी बढ़ने के संकेत हैं। मई 2026 के लिए दिल्ली का औसत अधिकतम तापमान लगभग 41°C (106°F) के आसपास बना हुआ है, जो इस मौसम की तीव्रता को स्पष्ट करता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: यह सामान्य गर्मी नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने नागरिकों को दोपहर के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • लगातार पानी पीते रहें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
  • सीधी धूप से बचें और हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  • बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
  • खाली पेट बाहर निकलने से बचें।
  • यदि चक्कर, सिरदर्द या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली फिलहाल सामान्य गर्मी नहीं बल्कि पूर्ण विकसित हीटवेव जोन में प्रवेश कर चुकी है।

जलवायु संकेतों के बीच दिल्ली की चुनौती

दिल्ली में बढ़ती गर्मी केवल मौसमी उतार-चढ़ाव का परिणाम नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट संरचनाओं का विस्तार और हरित क्षेत्रों में कमी ने राजधानी के तापमान को और अधिक चरम बना दिया है। अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव अब दिल्ली के मौसम व्यवहार का स्थायी हिस्सा बनता जा रहा है। रात के समय भी तापमान का ऊंचा बने रहना इसी प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है।

निष्कर्ष: राहत की उम्मीद, लेकिन इंतजार लंबा

नई दिल्ली फिलहाल वर्ष 2026 की सबसे कठिन गर्मी के दौर से गुजर रही है। मौजूदा मौसम परिस्थितियां न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि स्वास्थ्य और ऊर्जा खपत पर भी व्यापक दबाव डाल रही हैं। आने वाले पश्चिमी विक्षोभ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन अगले कुछ दिन राजधानीवासियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बने रहने वाले हैं। मौसम विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि यह समय सतर्कता, जल संतुलन और सीमित बाहरी गतिविधियों का है। दिल्ली फिलहाल सिर्फ गर्म नहीं है — वह जल रही है।

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