गुरुग्राम आधारित रियल एस्टेट कंपनी M3M समूह ने अप्रैल 2023 से अगस्त 2024 के बीच अपने ऋण में 65% की महत्वपूर्ण कमी की है, जिससे यह घटकर 1,302 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी ने वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए आंतरिक नकदी प्रवाह, परियोजनाओं की सफल डिलीवरी, कुशल लागत प्रबंधन, और मजबूत बिक्री गति पर जोर दिया है। इस ऋण कमी से कंपनी की वित्तीय प्रोफाइल में सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त, M3M समूह ने शीर्ष वित्तीय संस्थानों के साथ अपने कर्ज़ को निपटाने की पहल की है, जिससे इसे आगे और विस्तार करने में मदद मिलेगी।
ऋण में 65% कमी
ऋण में 65% की कमी: M3M समूह ने अप्रैल 2023 से अगस्त 2024 के बीच अपने कुल ऋण में 65% की भारी कमी की है, जिससे यह ऋण 1,302 करोड़ रुपये पर आ गया है। कंपनी ने 3,726 करोड़ रुपये का ऋण मार्च 2023 तक लिया हुआ था, जिसे घटाकर इस स्तर तक लाया गया है।
प्रमुख वित्तीय संस्थानों को भुगतान
प्रमुख ऋणदाताओं को भुगतान: M3M समूह ने अपने प्रमुख ऋणदाताओं, जिनमें ICICI बैंक, इंडसइंड बैंक, L&T फाइनेंस, पंजाब नेशनल बैंक, और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे संस्थान शामिल हैं, को 2,400 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। इससे समूह की वित्तीय साख में सुधार हुआ है और भविष्य में यह और मजबूत हो सकता है।
सफल परियोजना डिलीवरी से नकदी प्रवाह बेहतर
बेहतर आंतरिक नकदी प्रवाह: M3M समूह ने अपने ऋण को कम करने में आंतरिक नकदी प्रवाह को एक प्रमुख कारक बताया है। सफल परियोजनाओं की डिलीवरी, कुशल लागत प्रबंधन और उच्च बिक्री गति ने कंपनी को पर्याप्त नकदी सृजित करने में मदद की है, जिससे उसे अपने ऋण का बड़ा हिस्सा चुकाने का अवसर मिला।
मजबूत बिक्री प्रदर्शन
मजबूत बिक्री आंकड़े: अप्रैल-जून 2024 की अवधि में कंपनी ने 3,911 करोड़ रुपये की बिक्री की है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 37% अधिक है। इस बिक्री वृद्धि ने कंपनी को अपने कर्ज का एक बड़ा हिस्सा चुकाने में सहायता प्रदान की है।
परियोजनाओं का विस्तृत पोर्टफोलियो
56 परियोजनाओं का पोर्टफोलियो: M3M इंडिया वर्तमान में 56 परियोजनाओं का संचालन कर रहा है, जिसमें खुदरा, आवासीय, ऑफिस, सेवा अपार्टमेंट आदि शामिल हैं। इस व्यापक पोर्टफोलियो के माध्यम से कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति को और सशक्त बना रही है, जिससे उसे भविष्य में अधिक निवेश और विकास के अवसर मिल सकते हैं।
Payoneer ने भारतीय आईटी कंपनी Tech Mahindra के crowdsourcing प्लेटफ़ॉर्म Populii के साथ साझेदारी की है, ताकि भुगतान क्षमताओं को अनुकूलित किया जा सके। यह साझेदारी अंतर्राष्ट्रीय गिग कामगारों को उनकी सेवाओं के लिए आसान और तेज़ भुगतान प्राप्त करने में मदद करेगी। Payoneer की क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट तकनीक Populii के उपयोगकर्ताओं को बहु-मुद्रा विकल्पों के साथ भुगतान ट्रैक करने की सुविधा प्रदान करती है। एक Nasscom रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गिग वर्कफोर्स तेजी से बढ़ रही है और 2030 तक यह 23.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह सहयोग अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सरल बनाने के लिए एक बड़ा कदम है।
Payoneer और Tech Mahindra के बीच सहयोग
Fintech दिग्गज Payoneer और Tech Mahindra ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। Payoneer ने Tech Mahindra के crowdsourcing प्लेटफ़ॉर्म Populii के साथ अपने क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को एकीकृत किया है। यह साझेदारी gig workers को आसान और समय पर भुगतान प्राप्त करने में सहायता करेगी, जिससे उनके लिए अंतर्राष्ट्रीय भुगतान और भी सुलभ हो जाएंगे।
Populii उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर भुगतान अनुभव
Gig workers को भुगतान ट्रैक करने और समय पर प्राप्त करने की सुविधा। Payoneer की नई प्रणाली Populii के उपयोगकर्ताओं को उनके कार्य समाप्ति के बाद सुरक्षित और तेज़ अंतर्राष्ट्रीय भुगतान प्रदान करेगी। इसके साथ ही, वे कई मुद्राओं में भुगतान कर सकेंगे, जिससे उनका समग्र अनुभव बेहतर होगा।
Tech Mahindra की व्यावसायिक प्रक्रिया सेवाओं के अध्यक्ष का वक्तव्य
Payoneer की तकनीक से भुगतान प्रक्रिया में बदलाव। Tech Mahindra के बिज़नेस प्रोसेस सर्विसेज़ के अध्यक्ष, बिरेन्द्र सेन ने कहा कि Payoneer के भुगतान सिस्टम की सहायता से Populii समुदाय को एक तयशुदा समय पर भुगतान किया जाएगा, जिससे अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन में विश्वसनीयता और गति बढ़ेगी।
Populii: एक अग्रणी crowdsourcing प्लेटफ़ॉर्म
गिग कामगारों के लिए अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में सहयोग का मंच। Populii एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जो gig workers को शीर्ष कंपनियों के साथ ऑनलाइन परियोजनाओं के माध्यम से जोड़ता है। ये परियोजनाएं मानव-इन-द-लूप सेवाओं की मांग करती हैं, जिससे गिग कामगारों को घर बैठे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका मिलता है।
गिग अर्थव्यवस्था का उज्ज्वल भविष्य
भारत की gig वर्कफोर्स का तेज़ी से विस्तार। Payoneer के भारत के उपाध्यक्ष, गौरव शिसोदिया ने Nasscom की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत की gig वर्कफोर्स 2030 तक 23.5 मिलियन तक पहुंचने की संभावना है। यह विकास अंतर्राष्ट्रीय कामगारों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न करेगा।
Payoneer की बहु-मुद्रा प्लेटफ़ॉर्म
वैश्विक स्तर पर 11 से अधिक प्रमुख मुद्राओं का समर्थन। Payoneer का बहु-मुद्रा वित्तीय प्लेटफ़ॉर्म दुनिया भर के 190 से अधिक देशों और क्षेत्रों में काम करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म gig workers को अलग-अलग मुद्राओं में भुगतान प्राप्त करने की सुविधा देता है, जिससे वे आसानी से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कर सकते हैं।
फूड डिलीवरी दिग्गज स्विगी ने भारतीय बाजार में एक बड़ा आईपीओ लॉन्च करने की योजना बनाई है। कंपनी ने अपनी प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) के तहत ₹1,250 करोड़ अतिरिक्त जुटाने का प्रावधान किया है। इसके लिए शेयरधारकों से स्वीकृति प्राप्त की गई है, जिससे आईपीओ का आकार ₹3,750 करोड़ से बढ़ाकर ₹5,000 करोड़ किया जा सकेगा। स्विगी का यह कदम भारत के टेक-संचालित फूड डिलीवरी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जो निवेशकों के लिए एक बड़े अवसर के रूप में उभर रहा है।
IPO आकार में वृद्धि को मिली मंजूरी
IPO आकार ₹3,750 करोड़ से ₹5,000 करोड़ तक बढ़ा 3 अक्टूबर को आयोजित एक असाधारण आम बैठक (EGM) में स्विगी के शेयरधारकों ने IPO के आकार को ₹3,750 करोड़ से ₹5,000 करोड़ तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस अतिरिक्त ₹1,250 करोड़ के निवेश से स्विगी अपने व्यापार का विस्तार करने के लिए नई योजनाएं बना रही है। यह कदम कंपनी की विकासशील बाजार स्थिति और बढ़ते राजस्व को दर्शाता है।
ऑफर फॉर सेल (OFS) की स्थिति हालांकि प्राथमिक इश्यू का आकार बढ़ाया गया है, OFS (ऑफर फॉर सेल) घटक लगभग ₹6,664 करोड़ पर स्थिर है। इसमें प्रमुख निवेशकों जैसे Accel India IV (Mauritius), Coatue PE Asia, और Tencent Cloud Europe के शेयर बेचे जाएंगे। इससे शुरुआती निवेशकों को अपने निवेश पर रिटर्न प्राप्त करने का मौका मिलेगा।
IPO का आकार और बाजार पर प्रभाव
IPO का संभावित आकार ₹11,664 करोड़ अतिरिक्त पूंजी जुटाने के साथ, स्विगी का IPO संभावित रूप से ₹11,664 करोड़ (लगभग $1.4 बिलियन) तक पहुंच सकता है, जो इसे हाल के सबसे बड़े IPO में से एक बनाता है। यह भारतीय स्टॉक बाजार में नई पीढ़ी की टेक कंपनियों की प्रवृत्ति का प्रतीक है, जो सार्वजनिक निवेश की ओर बढ़ रही हैं।
वित्तीय प्रदर्शन और विकास
राजस्व वृद्धि और घाटे में कमी स्विगी का वित्तीय प्रदर्शन 2023-24 में प्रभावशाली रहा, जहां कंपनी की ऑपरेशनल आय ₹11,247 करोड़ तक बढ़ी, जो पिछले वर्ष के ₹8,265 करोड़ से 36% अधिक है। इसी अवधि में, कंपनी के घाटे में 44% की कमी आई, जो ₹4,179 करोड़ से घटकर ₹2,350 करोड़ रह गया। यह कंपनी की मजबूत खर्च प्रबंधन और परिचालन दक्षता का परिणाम है।
IPO से प्राप्त धन का उपयोग
ऋण की चुकौती और रणनीतिक निवेश स्विगी के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, IPO से प्राप्त धनराशि का उपयोग ऋण चुकाने और Scootsy में निवेश करने के लिए किया जाएगा। साथ ही, कंपनी अपने डार्क स्टोर नेटवर्क को बढ़ाने और अपने क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार करने की योजना बना रही है। इससे स्विगी की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी और प्रतिस्पर्धी बाजार में उसे एक महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी।
10 मिनट की डिलीवरी सेवा “बोल्ट” की शुरुआत
स्विगी ने हाल ही में बोल्ट नामक 10 मिनट में भोजन और पेय डिलीवरी सेवा की शुरुआत की है। यह पहल स्विगी की क्विक कॉमर्स क्षेत्र में प्रमुख उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। त्वरित डिलीवरी की इस सेवा के जरिए स्विगी उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से बाजार में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।
ताइवानी टेक कंपनी ASUS भारतीय पीसी बाजार में अपना दबदबा बनाने के लिए साहसिक कदम उठा रही है। 2017 में 6.3% से 2023 में 17.8% तक अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के बाद, अब कंपनी शीर्ष स्थान हासिल करने का लक्ष्य बना रही है। इसका महत्वाकांक्षी लक्ष्य अगले दो वर्षों में बाजार के 25-30% हिस्से पर कब्जा करना है। इस रणनीति की प्रमुख बात है आक्रामक खुदरा विस्तार, विशेष रूप से भारत के टियर-3 और टियर-4 शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाना। इसके अलावा, ASUS भारतीय और वैश्विक बाजारों में उत्पाद लॉन्च के बीच के अंतर को कम करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि भारत इसके लिए प्राथमिक बाजार है।
भारत में मार्केट डोमिनेशन के लिए ASUS का लक्ष्य
वर्तमान बाजार स्थिति ASUS ने 2017 में 6.3% से 2023 में 17.8% तक अपनी बाजार हिस्सेदारी को तीन गुना बढ़ा लिया है। यह वर्तमान में भारत में दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता नोटबुक ब्रांड है और अगले दो वर्षों में 25-30% बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा करके शीर्ष स्थान हासिल करने का लक्ष्य रख रहा है।
विकास की रणनीति कंपनी की रणनीति आक्रामक खुदरा विस्तार पर केंद्रित है, खासकर छोटे शहरों में। ASUS का लक्ष्य टियर-3 और टियर-4 शहरों तक अपनी पहुंच बढ़ाना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि महानगरों के बाहर भी उपभोक्ताओं को उसकी तकनीक तक आसानी से पहुंच मिले।
खुदरा विस्तार: हर कोने तक पहुंच
600 जिलों में विस्तार ASUS वर्तमान में भारत के 400 से अधिक जिलों में मौजूद है और अगले दो वर्षों में इसे 600 जिलों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। इस विस्तार योजना में ASUS के विशेष स्टोर और चैनल डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ साझेदारी का मिश्रण शामिल होगा, जिससे देश भर में एक व्यापक खुदरा नेटवर्क स्थापित किया जा सके।
स्थानीय पहुंच पर ध्यान ASUS ने भारत के छोटे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, और इसकी योजना प्रत्येक 600 जिलों में कम से कम एक विशेष स्टोर स्थापित करने की है। इसके बाद, कंपनी तालुका स्तर पर भी अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रही है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सबसे दूरस्थ ग्राहक भी उनके नवीनतम उत्पादों तक पहुंच सकें।
रिफर्बिश्ड पीसी स्टोर्स के माध्यम से नवाचार
रिफर्बिश्ड पीसी आउटलेट्स का लॉन्च ASUS ने नवाचार के रूप में छह चुनिंदा स्टोर्स में रिफर्बिश्ड पीसी लॉन्च किए हैं। यह रणनीति किफायती और टिकाऊ तकनीकी समाधानों के लिए बढ़ते बाजार का लाभ उठाने का हिस्सा है, जिससे कंपनी अपने ग्राहक आधार को और भी बढ़ा सके।
वैश्विक-भारत लॉन्च अंतर को कम करना
भारत को प्राथमिक बाजार के रूप में देखना ASUS सक्रिय रूप से वैश्विक बाजार और भारत के बीच उत्पाद लॉन्च के समय अंतर को कम करने की दिशा में काम कर रही है। यह कदम इस बात पर जोर देता है कि कंपनी भारत को एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में मानती है और सुनिश्चित करती है कि भारतीय उपभोक्ताओं को नवीनतम उत्पाद समय पर मिलें।
गेमिंग और उपभोक्ता पीसी बाजार में नेतृत्व ASUS, जो सबसे बड़ी गेमिंग और उपभोक्ता पीसी कंपनियों में से एक है, उत्पाद नवाचार और खुदरा रणनीति में आगे रहकर अपने ब्रांड की गति का लाभ उठा रही है। ऐसा करके कंपनी उम्मीद करती है कि वह भारत के टेक इकोसिस्टम में अपनी नेतृत्वकारी स्थिति को बनाए रखने और बढ़ाने में सक्षम होगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवीएस) को बड़े पैमाने पर अपनाने को बढ़ावा देने की भारत सरकार की प्रतिज्ञा के अनुरूप, बैंगलोर विद्युत आपूर्ति कंपनी (बेस्कॉम) ने कर्नाटक के भीतर एनएच-48 (बेंगलुरु-पुणे राजमार्ग) के साथ टोल प्लाजा पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहन गति पकड़ रहे हैं लेकिन बहुत धीमी गति से। चीन इलेक्ट्रिक वाहनों का सबसे बड़ा बाजार बन गया है और इसका श्रेय चीनी सरकार के इलेक्ट्रिक वाहनों के मजबूत समर्थन को जाता है। चीनी सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बड़े पैमाने पर सब्सिडी प्रदान की है। साथ ही, सरकार ने ईवी को पंजीकृत करना आसान कर दिया है और डीजल या पेट्रोल वाहनों को पंजीकृत करना बहुत कठिन बना दिया है।
ईवी अपनाने में प्रमुख मुद्दा चार्जिंग सुविधाओं की कमी है। बेस्कॉम के अधिकारियों ने खुलासा किया कि वे 10 टोल प्लाजा पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। पहल, जिसके लिए प्रस्ताव पहले ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को प्रस्तुत किया जा चुका है, का उद्देश्य बेंगलुरु-पुणे राजमार्ग पर चलने वाले ईवी के लिए एक कुशल चार्जिंग समाधान तक आसान पहुंच प्रदान करना है। यह कदम निस्संदेह राजमार्ग के इस व्यस्त खंड पर चलने वाले ईवी मालिकों के लिए एक बड़ी राहत प्रदान करेगा।
ईवी के लिए बेस्कॉम के उप महाप्रबंधक श्रीनाथ के ने संवाददाताओं से कहा, “हमने प्रत्येक टोल प्लाजा पर 120 किलोवाट सीसीएस2 ईवी फास्ट चार्जर से लैस दो चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का फैसला किया है। स्वीकृति मिलने के बाद हम चार्जिंग यूनिट स्थापित करने के लिए आगे बढ़ेंगे।
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेस्कॉम (Bescom) ने सुरक्षित प्रकृति के कारण राजमार्ग के उपरोक्त खंड के साथ टोल प्लाजा पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया। टोल प्लाजा पर, ईवी मालिकों को पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा मिलेगी, जिससे ईवी मालिकों को अपने वाहनों को अलग-थलग और खराब रोशनी वाले क्षेत्रों में चार्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। संक्षेप में, यह मोटर चालकों के बीच दूरी की चिंता को कम करने में मदद करेगा।
बेंगलुरु भारत के सबसे उन्नत शहरों में से एक है, और शहर में पहले से ही पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। हालांकि, राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशनों की कमी है। ओल्ड मद्रास रोड के माध्यम से बेंगलुरु-चेन्नई राजमार्ग के साथ, होसकोटे, कोलार, नंगली और मुलबगल सहित विभिन्न स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। राजमार्ग के बेंगलुरु-मैसूर खंड पर, रामनगर में चार्जिंग बुनियादी ढांचा स्थापित किया जाएगा।
इस तथ्य पर प्रकाश डालते हुए कि पर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक आसान पहुंच मोटर चालकों को गैस से चलने वाले आंतरिक दहन इंजनों से ईवीएस में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, श्रीनाथ ने यह भी खुलासा किया कि एसी और डीसी चार्जिंग के लिए निर्धारित टैरिफ रुपये है। 7.62 और रु। 8.31 प्रति किलोवाट घंटा।
इलेक्ट्रिक कैब/वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग भी बढ़ रही है। इस साल मार्च में, इलेक्ट्रिक कैब ऑपरेटर ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी ने केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 100% कैब पिकअप ज़ोन लॉन्च किया। शोफ्र, और ईएनवीआई (मालबोर्क टेक्नोलॉजीज) जैसे कुछ अन्य ऑपरेटर भी हवाईअड्डा स्थानान्तरण के लिए इलेक्ट्रिक कैब की पेशकश या पेशकश करने की योजना बना रहे हैं।
सिंपल वन, बैंगलोर स्थित स्टार्टअप सिंपल एनर्जी द्वारा विकसित एक प्रीमियम इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, आधिकारिक तौर पर भारत में लॉन्च किया गया है। इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती भीड़ के बीच, सिंपल वन दावा करता है कि इसका आकर्षण इसकी सादगी में निहित है। हालाँकि, सरल होने के बावजूद, ई-स्कूटर को उत्पादन में लाने में स्टार्टअप को लगभग दो साल लग गए।
यह स्वीकार करते हुए कि सिंपल वन को लॉन्च करने में अपेक्षा से अधिक समय लगा, भारतीय कंपनी ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए अड़ी रही कि ब्रांड-नया ई-स्कूटर अपनी कक्षा में सबसे अच्छा होगा।
सिंपल एनर्जी द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, सिंपल वन ई-स्कूटर उल्लेखनीय विशिष्टताओं का दावा करता है। इसकी तकनीकी विशिष्टताओं की सूची में 8.5 किलोवाट (11.3 hp) की चरम शक्ति और 72 न्यूटन-मीटर (50.4 पाउंड-फीट) का टॉर्क शामिल है। 0 से 25 मील प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ने में इसे महज 2.77 सेकंड का समय लगता है, जो वास्तव में उल्लेखनीय चपलता को दर्शाता है। जब शीर्ष गति की बात आती है, तो यह 66 मील प्रति घंटा प्राप्त कर सकता है। कंपनी के दावों के मुताबिक, सिंगल चार्ज पर इसकी रेंज 133 मील है। भारत में मुख्यधारा के ई-स्कूटरों में, यह सबसे लंबी दूरी की कवरेज प्रदान करता है।
शक्ति के लिए, यह दो बैटरी पैक से सुसज्जित है: एक निश्चित 3.5-kWh बैटरी और एक हटाने योग्य 1.5-kWh बैटरी। दोनों बैटरी सामूहिक रूप से 5 kWh की क्षमता प्रदान करती हैं।
सिंपल एनर्जी सिंपल वन को “भारत का पहला प्रीमियम किफायती ईवी, भारतीयों द्वारा, दुनिया के लिए गर्व से भारत में बनाया गया” के रूप में वर्णित करता है।
जब रंगों की बात आती है, तो नया सिंपल वन ई-स्कूटर कुल चार जीवंत रंगों में उपलब्ध है, जैसे। एज़्योर ब्लू, ब्रेज़ेन ब्लैक, ग्रेस व्हाइट और नम्मा रेड। इसके अलावा, कंपनी दो नए रंग स्वरूपों की पेशकश कर रही है: ब्रेज़ेन एक्स और लाइट एक्स, जो वाहन के आधिकारिक लॉन्च के दौरान पेश किए गए थे।
सिंपल वन ई-स्कूटर रुपये की शुरुआती कीमत के साथ उपलब्ध है। 1,45,000, और टॉप-एंड वैरिएंट की कीमत रु। 1,58,000। ग्राहक 13,000 रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान करके 750W फास्ट चार्जर शामिल करने का विकल्प भी चुन सकते हैं।
प्री-ऑर्डर धारकों को नए ई-स्कूटर की डिलीवरी इस साल 6 जून से चरणों में शुरू होने वाली है, जिसमें बेंगलुरु के ग्राहक सबसे पहले अपनी यूनिट प्राप्त करेंगे। आधिकारिक लॉन्च के समय, कंपनी ने घोषणा की कि वह निकट भविष्य में धीरे-धीरे कई अन्य शहरों में डिलीवरी सेवाओं का विस्तार करने की योजना बना रही है।
सिंपल वन में एथर 450X की समानता के साथ एक न्यूनतम और भविष्यवादी डिजाइन है। इसमें बहुत सारे कट्स और एक शार्प टेल यूनिट के साथ फ्लेयर्ड बॉडी है। यह एलईडी हेडलाइट, 7 इंच के इंस्ट्रूमेंट कंसोल और ब्लूटूथ नेविगेशन से लैस है। आप फ़ोन कॉल भी ले सकते हैं, संगीत सुन सकते हैं और उस पर दस्तावेज़ संग्रहीत कर सकते हैं। अन्य विशेषताओं में ओटीए अपडेट, जियो-फेंसिंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, वाहन ट्रैकिंग और बहुत कुछ शामिल हैं। स्कूटर में 30 लीटर अंडरसीट स्टोरेज क्षमता है।
स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर 212 किमी तक का सफर तय कर सकता है और बैटरी को फुल चार्ज होने में 1 घंटा 5 मिनट का समय लगता है। इसकी रनिंग कॉस्ट 0.15 रुपये प्रति किलोमीटर है। और 5 kWh की बैटरी पर 212 किलोमीटर तक चलाया जाता है।
सिंपल वन स्कूटर का भारत में कम्पटीशन
स्कूटर के प्रतिद्वंद्वियों में एथर 450X, ओला एस1 प्रो, टीवीएस आईक्यूब एसटी और टॉर्क क्रेटोस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल शामिल हैं। सिंपल वन के सकारात्मक गुणों में से एक इसका रोमांचक प्रदर्शन और शानदार रेंज का दावा है। इसमें एक स्पोर्टी और भरोसेमंद हैंडलिंग सेटअप भी है और इसकी कीमत प्रतिस्पर्धी है। हालांकि, नकारात्मक फीचर्स में कम वांछनीय प्लास्टिक और फिटमेंट स्तर, और लंबी डिलीवरी समयसीमाएं शामिल हैं।
एथर 450X एथर 450X की मोटर 26 एनएम का टार्क और 3.3 kW की निरंतर शक्ति प्रदान करती है। इसमें IP 66 की IP रेटिंग है, जिसका अर्थ है कि यह धूल-रोधी है और शक्तिशाली जल जेट का सामना कर सकता है, और यह एक बेल्ट ड्राइव सिस्टम का उपयोग करता है। पूर्ण क्षमता तक पहुंचने में लगभग 5 घंटे 40 मिनट लगते हैं। एथर एनर्जी द्वारा निर्मित, स्कूटर को ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों से सकारात्मक समीक्षा मिली है।
एथर 450X
टीवीएस आई क्यूब TVS iQube के सभी तीन संस्करण BLDC हब-माउंटेड मोटर से लैस हैं जो 4.5 kW की अधिकतम शक्ति और 140 एनएम का टार्क प्रदान करता है। जबकि iQube और iQube S 78 किमी प्रति घंटे की शीर्ष गति प्रदान करते हैं, iQube ST 82 किमी प्रति घंटे की थोड़ी अधिक शीर्ष गति प्रदान करता है।
टीवीएस आ ईक्यूब
ओला एस1 प्रो ओला एस1 प्रो एक आकर्षक इलेक्ट्रिक स्कूटर है जो उन्नत सुविधाओं और आकर्षक डिजाइन का दावा करता है। अपनी प्रभावशाली शीर्ष गति और प्रभावशाली सीमा के साथ, यह परिवहन का एक व्यावहारिक और पर्यावरण के अनुकूल साधन प्रदान करता है।
यदि आप भारतीय शेयर बाजारों में निवेश करते हैं या ऑप्शंस ट्रेडिंग में दिलचस्पी रखते हैं, तो इस बात की संभावना है कि आपने पीआर सुंदर के बारे में सुना होगा। सुंदर पर सेबी के एक हालिया आदेश ने शायद भारत में संपन्न निवेश सलाहकार सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है जिसने हाल के वर्षों में मजबूत वृद्धि देखी है। वे दिन गए जब आपको दीपक मोहोनी जैसे तकनीकी व्यापार विशेषज्ञों द्वारा फ़ैक्स (और बाद के वर्षों के दौरान ईमेल के माध्यम से) द्वारा स्टॉक ट्रेडिंग के लिए सुझाव मिलते थे। सन 2000 की शुरुआत में उस न्यूज़लेटर की कीमत लगभग 15,000 थी और उचित लक्ष्य और स्टॉप लॉस के साथ रोज़मर्रा के स्टॉक ट्रेडिंग के विचार प्रदान करता था।
पीआर सुंदर सलाहकार सेवाएं और व्यापारिक विचार प्रदान करते रहे हैं और उनका ध्यान विकल्प व्यापार पर रहा है। वह बड़े पैमाने पर खुद का व्यापार भी करता है और लाभदायक रहा है क्योंकि विकल्प ट्रेडिंग में उसकी रणनीतियाँ दीर्घकालिक और सुरक्षित हैं। उन्होंने अपनी ट्रेडिंग रणनीतियों के बारे में बात करते हुए सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा किए हैं।
सेबी ने निवेश सलाहकार मानदंडों के कथित उल्लंघन पर सुंदर को एक साल के व्यापार प्रतिबंध और जुर्माना लगाया है। सुंदर और उनकी कंपनी मंसन कंसल्टिंग पर लगे आरोप बहुत गंभीर नहीं हैं। इसे एक निरीक्षण (शायद जानबूझकर) भी माना जा सकता है। नियमित आधार पर निवेश की सलाह देने वाले सभी लोगों को सेबी के पास पंजीकरण कराना चाहिए। सेबी द्वारा पारित आदेश में उल्लेख किया गया है, “पीआर सुंदर और उनकी कंपनी मंसन कंसल्टिंग नियामक से अपेक्षित पंजीकरण के बिना निवेश सलाहकार सेवाएं प्रदान कर रहे थे।” स्पष्ट रूप से, सेबी ने सुंदर के निवेश विचारों के साथ कोई विशेष समस्या नहीं दिखाई है, लेकिन तथ्य यह है कि उन्होंने खुद को पंजीकृत नहीं किया था।
सेबी द्वारा प्रतिबंध और जुर्माने की घोषणा के बाद, सुंदर ने एक ट्विटर पोस्ट में बहुत समझदारी से जवाब दिया है, “जो लोग आप पर विश्वास करते हैं, उन्हें स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं है। जो लोग आप पर विश्वास नहीं करते हैं, कोई स्पष्टीकरण मदद नहीं करेगा। इसलिए कम से कम कुछ समय के लिए मौन रहना सबसे अच्छी प्रतिक्रिया है।” सुनार के ट्विटर पर आधे मिलियन से अधिक और YouTube चैनल पर दस लाख से अधिक अनुयायी हैं। सेबी द्वारा यह प्रतिबंध वास्तव में उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में मदद कर सकता है और यहां तक कि निवेशकों के बीच व्यापारिक सलाहकारों के बारे में जागरूकता भी बढ़ा सकता है। निवेशकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और अपने स्वयं के चेक करने के बाद ही व्यापार करना चाहिए। अपनी तरफ से कोई प्रयास किए बिना किसी का अनुसरण करना, उच्च जोखिम वाला व्यापार माना जा सकता है।
और, हाल ही में, उन्होंने ट्विटर पर व्यापार प्रतिबंध पर फिर से टिप्पणी की है, “जब आप बीमार पड़ते हैं (या जब नियामक आपको व्यापार करने से रोकते हैं), भगवान आपको (या दोनों) इन 2 संदेशों में से एक भेज रहे हैं 1. आराम करें, आप हैं बहुत ज्यादा काम करना। 2. अपने कर्म पर चिंतन करें।
फिनफ्लुएंसर्स पर क्रैकडाउन अप्रैल में, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत में वित्तीय प्रभाव डालने वालों से संबंधित चिंताओं को संबोधित किया और वित्तीय समाधान पेश करने वाले पोंजी ऐप्स के खतरों के प्रति आगाह किया। हालांकि, कई व्यापारिक सलाहकार हैं जो सलाह देते हैं और निवेशकों को सख्त स्टॉप लॉस रखने के लिए चेतावनी भी शामिल करते हैं। बाजारों में कोई भी निवेश जोखिम के अधीन है। इसलिए, सलाह का पालन करने वाले लोगों को अच्छी तरह से पता होना चाहिए कि उनका पैसा जोखिम में है। जोखिमों और लाभों की सावधानीपूर्वक जाँच करने के बाद स्टॉक और किसी भी अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया जाना चाहिए।
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सुंदर की सोशल मीडिया फॉलोइंग और महंगी कारों के लिए ख़ास प्रेम
सोशल मीडिया पर सुंदर की तगड़ी फॉलोइंग है। जबकि सुंदर ज्यादातर समय विनम्र रहते है लेकिन कभी-कभी फोल्लोवेर्स के सामने अपनी संपत्ति दिखाना बुरी बात नहीं। सुंदर महंगी कारों के प्रति अपने प्यार को छिपाते नहीं हैं। यह वास्तव में फोल्लोवेर्स को मोटीवेट करता है। और, इसमें कोई बुराई नहीं है।
ऑप्शंस ट्रेडर पीआर सुंदरऑप्शंस ट्रेडर पीआर सुंदर रोल्स रॉयस के साथ
सुंदर निवेश समुदाय के साथ अपने विचार साझा करना जारी रखेंगे। वह एक बहुत ही संतुलित व्यापारी रहे हैं और मुझे व्यक्तिगत रूप से उनकी सलाह पसंद है।
कृपया ध्यान दें कि यह एक ओपिनियन स्टोरी है और मैंने भारतीय इक्विटी में अपने ट्रेडिंग अनुभव से इनपुट जोड़े हैं।
भारतीय शेयर बाजारों ने इस साल उल्लेखनीय सुधार दिखाया है, एनएसई निफ्टी अब पांच महीने के शिखर पर है। बाजार में इस उत्थान का श्रेय सकारात्मक वैश्विक बाजार के रुझान और अधिकांश भारतीय फर्मों के उत्साहजनक तिमाही आंकड़ों को दिया जाता है।
आज के बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों में कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और एचडीएफसी लाइफ शामिल हैं, जबकि टेक महिंद्रा, टाटा स्टील और सन फार्मा उन शेयरों में शामिल हैं, जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर तकनीकी चार्ट पर मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। स्टॉक, वर्तमान में 20, 50, 100 और 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज से ऊपर कारोबार कर रहा है, इसमें आगे लाभ की संभावना है।
प्रभावशाली तिमाही परिणामों से प्रभावित अरविंद फैशन के शेयरों ने दिन के अंत में दो प्रतिशत की बढ़त हासिल की। Marksans Pharma के शेयरों में दिन के निचले स्तर से 13 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, क्योंकि कंपनी ने 81.9 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ पोस्ट किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 28.1 करोड़ रुपये से महत्वपूर्ण उछाल था।
अरबिंदो, पीएफसी, रामको केम, आरईसी, पॉलीकैब, आईडीएफसी और इंडिगो के शेयर 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गए। आशावादी प्रबंधन टिप्पणी से उत्साहित जेके सीमेंट भी 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
मजबूत तिमाही आंकड़ों के दम पर वीनस रेमेडीज के शेयर में 20 फीसदी की तेजी आई।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आगे चलकर बाजार और मजबूती दिखा सकता है।
जहांगीर मोहम्मद ने तमिलनाडु में विनम्र शुरुआत की लेकिन मास्टर्स डिग्री करने के लिए वे कनाडा चले गए और उन्होंने तीन सफल कंपनियों की स्थापना की जो दुनिया में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मोहम्मद ने मधुमेह और फैटी-लीवर रोगियों के लिए विकल्पों में सुधार करने का एक और महत्वाकांक्षी कार्य शुरू किया है। भारत एक बड़ी मधुमेह महामारी का सामना कर रहा है। 2021 तक, 74 मिलियन से अधिक भारतीयों को मधुमेह का पता चला था, जिससे भारत दुनिया भर में मधुमेह रोगियों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या वाला देश बन गया। यह अनुमान लगाया गया है कि यह संख्या 2045 तक बढ़कर 124 मिलियन से अधिक हो जाएगी।
Twin Health Incorporated, एक हेल्थकेयर स्टार्टअप, वैज्ञानिक समुदाय के साथ नियमित रूप से अपनी प्रगति साझा करता है। वे मंचों, पत्रिकाओं और सम्मेलनों सहित विभिन्न चैनलों के माध्यम से ऐसा करते हैं, जो उनकी तकनीक के साथ किए जा रहे कदमों को टाइमस्टैम्प करने के लिए प्लेटफॉर्म के रूप में काम करते हैं।
हाल के दिनों में, कंपनी ने सिएटल में अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी की वार्षिक बैठक में टाइप -2 मधुमेह की छूट और फैटी-लीवर मापदंडों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण परिणाम प्रदर्शित किए हैं। इस शहर को टेक हब के रूप में भी जाना जाता है, जो अमेज़ॅन और माइक्रोसॉफ्ट जैसे दिग्गजों की मेजबानी करता है। इसके अतिरिक्त, कंपनी के काम को जून में जर्नल ऑफ़ हाइपरटेंशन में चित्रित किया जाना तय है। ट्विन हेल्थ को साल भर में कई अन्य प्रकाशनों में चित्रित किया गया है, कुल मिलाकर लगभग 40 तक।
ट्विन हेल्थ अपने परिणामों की निरंतरता, गुणवत्ता और सटीकता पर ध्यान केंद्रित करके खुद को अन्य अच्छी तरह से वित्त पोषित स्वास्थ्य तकनीक स्टार्टअप से अलग करता है।
कंपनी की स्थापना पांच साल पहले जहांगीर मोहम्मद द्वारा की गई थी, यह एकमात्र अंतर्दृष्टि पर आधारित थी कि मधुमेह, एक व्यापक पुरानी बीमारी, मुख्य रूप से खराब चयापचय के कारण होती है। इस समझ को एक संभावित सफलता के रूप में माना गया था।
मोहम्मद ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों से मधुमेह के बारे में व्यापक पूछताछ की। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक के साथ एक बातचीत में मानव चयापचय की जटिलता और गतिशीलता पर प्रकाश डाला गया, साथ ही यह एहसास भी हुआ कि यह भिन्न होता है और अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग तरीके से क्षतिग्रस्त हो सकता है। इस बातचीत ने किसी व्यक्ति की चयापचय स्थिति पर कब्जा करने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग करने की अवधारणा को जन्म दिया, जो कि मोहम्मद और एमए मलुक मोहम्मद (असंबंधित) द्वारा सह-स्थापित जुड़वां स्वास्थ्य के लिए एक केंद्रीय विचार बन गया।
2018 में अमेरिका और भारत में ट्विन हेल्थ की स्थापना से पहले, मोहम्मद ने जैस्पर टेक्नोलॉजीज की सह-स्थापना की। जैस्पर, एक IoT- आधारित कंपनी है जिसने टेस्ला, जनरल मोटर्स और जनरल इलेक्ट्रिक जैसे प्रमुख अमेरिकी व्यवसायों की सेवा की थी, जिसे बाद में 2016 में IT दिग्गज सिस्को द्वारा $1.4 बिलियन में अधिग्रहित कर लिया गया था।
मोहम्मद को कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी, कनाडा द्वारा मानद डॉक्टरेट और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, स्विट्जरलैंड द्वारा IoT टेक्नोलॉजी पायनियर से सम्मानित किया गया है। उन्हें आइंस्टीन फाउंडेशन की जीनियस: 100 विजन ऑफ फ्यूचर में भी नामित किया गया है। उनके उद्यमों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सॉफ्टवेयर और कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजीज में 80+ पेटेंट दिए गए हैं। उनकी कंपनी जैस्पर (सिस्को को बेची गई) ने वैश्विक IoT क्लाउड प्लेटफॉर्म का नेतृत्व किया जो वर्तमान में दुनिया भर में 20,000 से अधिक उद्यमों द्वारा उपयोग किया जाता है। उन्होंने कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तमिलनाडु से बी.टेक पूरा किया और फिर मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी, मॉन्ट्रियल चले गए।
अपने IoT अनुभव पर आकर्षित, मोहम्मद और उनके सह-संस्थापकों ने दुनिया का पहला संपूर्ण शरीर डिजिटल ट्विन (WBDT) बनाने की शुरुआत की। WBDT, औद्योगिक डिजिटल जुड़वां अवधारणा से प्रेरित है, एक भौतिक प्रणाली का एक आभासी प्रतिनिधित्व है जहां सेंसर वास्तविक दुनिया डेटा एकत्र करते हैं, डिजिटल और भौतिक क्षेत्रों के बीच एक पुल बनाते हैं।
ट्विन हेल्थ इनकॉर्पोरेटेड और होल बॉडी डिजिटल ट्विन
ट्विन हेल्थ इनकॉर्पोरेटेड एक सटीक स्वास्थ्य मंच प्रदान करता है जिसे होल बॉडी डिजिटल ट्विन™ के रूप में जाना जाता है। यह मंच प्रत्येक रोगी के अद्वितीय चयापचय कार्य के आधार पर उपचार को समझने और अनुकूलित करने के लिए चिकित्सा अनुसंधान में नवीनतम प्रगति का उपयोग करता है। प्राथमिक उद्देश्य पुराने चयापचय रोगों के मूल कारण को संबोधित करना है, जिसमें टाइप 2 मधुमेह और अन्य पुरानी बीमारियां शामिल हैं, न कि केवल लक्षणों का प्रबंधन करना।
ट्विन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है
प्रत्येक सदस्य के अद्वितीय चयापचय के अनुरूप अनुकूलित मार्गदर्शन। प्रमुख स्व-बीमित नियोक्ताओं, स्वास्थ्य योजनाओं, स्वास्थ्य प्रणालियों और प्रदाताओं के साथ साझेदारी जो संपूर्ण व्यक्ति दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध हैं। कई पुरानी चयापचय संबंधी बीमारियों को उलटने और रोकने पर ध्यान केंद्रित करना। एक प्रदर्शन-आधारित शुल्क मॉडल। मंच कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रौद्योगिकियों द्वारा संचालित है जो सदस्यों के लिए अत्यधिक तकनीकी लेकिन अत्यधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करता है। रोग के मूल कारण को ठीक करने के लिए उन्हें चिकित्सकों और प्रशिक्षकों द्वारा निर्देशित किया जाता है। ट्विन हेल्थ इंक कर्मचारियों, सदस्यों और रोगियों को स्वस्थ, खुशहाल जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे महत्वपूर्ण, निरंतर लागत बचत हो रही है।
मेजर वेंचर कैपिटल फंड्स द्वारा निवेश
अब तक, ट्विन हेल्थ ने 7 अक्टूबर, 2021 को सीरीज़ सी राउंड से नवीनतम फंडिंग के साथ, तीन राउंड में फंडिंग में $198.5M हासिल किया है। स्टार्टअप को आठ निवेशकों द्वारा समर्थित किया गया है, जिसमें हाल के योगदानकर्ताओं के रूप में ICONIQ ग्रोथ और कॉर्नर वेंचर्स शामिल हैं, जबकि Sequoia कैपिटल इंडिया, हेलेना, एलटीएस इन्वेस्टमेंट्स और परसेप्टिव एडवाइजर्स प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान नए संसद भवन के निर्माण के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की। निर्माण दिसंबर 2020 में शुरू हुआ, और आगामी संसदीय सत्र की मेजबानी के लिए परियोजना 20 मई, 2023 को पूरी हो गई है। सेंट्रल विस्टा (आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत) के रूप में संदर्भित, इस परियोजना को वास्तुकार बिमल पटेल द्वारा डिजाइन किया गया है और इसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों की स्थापत्य शैली शामिल है।
28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए भवन का उद्घाटन करेंगे। मोदी को साहसिक निर्णय लेने के लिए जाना जाता है और उन्होंने अपना ध्यान भारत के विकास पर केंद्रित किया है। आईएमएफ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत को वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक उज्ज्वल स्थान माना जाता है। भारत सरकार ने भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। हालाँकि, विपक्षी दलों ने मोदी सरकार द्वारा उठाए गए हर कदम की लगातार आलोचना की है, कई विपक्षी नेताओं ने नए संसद भवन के उद्घाटन में उनकी उपस्थिति का भी विरोध किया है।
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत $2.8 बिलियन है, आदर्श रूप से भारत सरकार के प्रयासों को देखते हुए, सभी भारतीय राजनीतिक दलों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए। भारत की बढ़ती जनसंख्या और भविष्य के परिसीमन के कारण सदस्यों की संख्या में संभावित वृद्धि को समायोजित करने के लिए लोकसभा और राज्यसभा के प्रस्तावित कक्षों में बैठने की बड़ी क्षमता होगी। लोकसभा कक्ष में 888 सीटें होंगी, जबकि राज्यसभा कक्ष में 384 सीटें होंगी।
मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई अन्य परियोजनाओं की तरह, नए संसद भवन के लिए चुने गए नाम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित हैं। भवन में ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम से तीन प्रवेश द्वार होंगे।
यह परियोजना टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा उल्लेखनीय रूप से कम समय सीमा में पूरी की गई है। सरकार ने पहली बार सितंबर 2019 में इस विचार की घोषणा की, और मई 2023 तक, इस परियोजना को साकार किया गया, जो तेजी से निर्णय लेने के सरकार के दृढ़ संकल्प को उजागर करता है। 2016 में मुद्रा विमुद्रीकरण जैसे विवादास्पद फैसलों के बावजूद, राजनीतिक विशेषज्ञ नरेंद्र मोदी को भारत की बेहतरी के लिए कठोर निर्णय लेने के संकल्प के साथ एक नेता के रूप में पहचानते हैं।
जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके सहयोगी नए संसद भवन के समर्थक हैं, इमारत के उद्घाटन को विपक्ष से काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है। 26 मई को, 19 विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा “संवैधानिक अनुपयुक्तता” का आरोप लगाते हुए इस कार्यक्रम के बहिष्कार की घोषणा की। सुप्रीम कोर्ट ने उद्घाटन समारोह से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। संयोग से, उद्घाटन की तारीख वीडी सावरकर की जयंती के साथ संरेखित है।
भाजपा ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि नई इमारत सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है और विपक्ष पर उद्घाटन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सभी राजनीतिक दलों को समारोह में आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनकी भागीदारी उनकी व्यक्तिगत भावनाओं पर निर्भर करेगी।
नया संसद भवन न केवल एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, बल्कि बैठने की बढ़ी हुई क्षमता और एयर कंडीशनिंग, प्रकाश व्यवस्था और विश्राम कक्ष जैसी बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक आवश्यक उन्नयन भी है। सरकार ने नोट किया है कि 1927 की मूल इमारत में घिसावट और अति प्रयोग के लक्षण दिखाई दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषक सेंट्रल विस्टा परियोजना को मोदी के दूसरे कार्यकाल की “कैपस्टोन परियोजना” के रूप में मानते हैं, क्योंकि यह हिंदू राष्ट्रवाद के अपने ब्रांड को मजबूत करते हुए औपनिवेशिक अतीत से भारत की भौतिक पहचान को पुनः प्राप्त करने के उनके प्रयास को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, परियोजना पर मोदी का जोर और देश भर में हिंदू मंदिरों का निर्माण उनके हिंदुत्व एजेंडे के साथ संरेखित है। अगले साल होने वाले चुनाव से पहले यह चर्चा का विषय रहा है।
बुधवार को, 19 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विपक्षी दलों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि मोदी का “खुद नए संसद भवन का उद्घाटन” करने का निर्णय “न केवल एक गंभीर अपमान है बल्कि हमारे लोकतंत्र पर सीधा हमला है जो एक समान प्रतिक्रिया की मांग करता है।” पार्टियों ने सामूहिक रूप से इस आयोजन का बहिष्कार करने की योजना बनाई है, जिसमें कहा गया है कि “लोकतंत्र की आत्मा को संसद से चूसा गया है।” लेकिन, जैसा कि विपक्ष के अधिकांश कदमों के साथ होता है, इसे ज्यादा समर्थन नहीं मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया आधिकारिक वीडियोभारत का नया संसद भवन – सेंट्रल विस्टाभारत का नया संसद भवन – सेंट्रल विस्टाभारत का नया संसद भवन – सेंट्रल विस्टा
मोदी जी की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं
भारत में मोदी सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू की हैं। यहाँ कुछ उल्लेखनीय पहलें और उपलब्धियाँ हैं:
स्वच्छ भारत अभियान: 2014 में शुरू किए गए इस राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान का उद्देश्य भारत को खुले में शौच मुक्त बनाना और स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना था। इसने लाखों शौचालयों के निर्माण, स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं को बढ़ावा देने और स्वच्छ पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने का नेतृत्व किया।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी): 2017 में लागू, जीएसटी ने भारत की खंडित अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एकीकृत किया, कर संरचना को सरल बनाया और पूरे देश में एक आम बाजार को बढ़ावा दिया। इसने कई राज्य-स्तरीय करों को समाप्त कर दिया, व्यवसायों के लिए अनुपालन बोझ को कम किया और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा दिया।
प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई): 2014 में शुरू किए गए इस वित्तीय समावेशन कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में हर घर को बैंक खाते, सस्ती क्रेडिट, बीमा और पेंशन योजनाओं तक पहुंच प्रदान करना है। इसने पहले से बिना बैंक वाले लाखों व्यक्तियों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में सफलतापूर्वक लाया।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई): 2016 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) प्रदान करना है, जिससे लकड़ी और मिट्टी के तेल जैसे पारंपरिक खाना पकाने के ईंधन से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी खतरों को कम किया जा सके। इसने लाखों परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए हैं और वायु गुणवत्ता और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार करने में योगदान दिया है।
मेक इन इंडिया: 2014 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में बढ़ावा देना है। इसने विदेशी निवेश को आकर्षित करने, व्यापार करने में आसानी में सुधार लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा और वस्त्र सहित कई क्षेत्रों में निवेश और वृद्धि देखी गई है।
डिजिटल इंडिया: इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। इसने डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से वितरित करने पर ध्यान केंद्रित किया। आधार (एक बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी पहलों ने सेवा वितरण को सुव्यवस्थित किया है और भ्रष्टाचार को कम किया है।
प्रधान मंत्री आवास योजना (PMAY): 2015 में लॉन्च की गई इस किफायती आवास योजना का उद्देश्य 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध कराना है। यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, कम आय वाले समूहों और मध्यम आय वर्ग के लिए किफायती आवास विकल्प प्रदान करने पर केंद्रित है। इसने देश भर में लाखों किफायती आवास इकाइयों का निर्माण किया है।
आयुष्मान भारत – प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई): 2018 में शुरू की गई, इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना का उद्देश्य माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए स्वास्थ्य कवरेज की पेशकश करके समाज के कमजोर वर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। यह 500 मिलियन से अधिक लोगों को बीमा कवरेज प्रदान करता है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम बन गया है।
मुद्रा विमुद्रीकरण – एक औरमास्टरस्ट्रोक
2016 में, मोदी सरकार ने मुद्रा विमुद्रीकरण की घोषणा की और यह भारतीय अर्थव्यवस्था को नकद से डिजिटल स्थानान्तरण में बदलने का एक बड़ा कदम था। भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है और हाल के वर्षों में इसने पर्याप्त प्रगति की है।
एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई): यूपीआई की शुरूआत ने भारत में डिजिटल भुगतान परिदृश्य में क्रांति ला दी। यूपीआई मोबाइल फोन के माध्यम से बैंक खातों के बीच सहज और तत्काल फंड ट्रांसफर की अनुमति देता है। इसके उपयोग में आसानी, इंटरऑपरेबिलिटी और रीयल-टाइम लेनदेन क्षमताओं के कारण इसे व्यापक लोकप्रियता मिली है।
आधार-सक्षम भुगतान: आधार, भारत की बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली, को डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत किया गया है। यह व्यक्तियों को अपने आधार नंबर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग करके भुगतान करने में सक्षम बनाता है, जिससे भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और सुरक्षा बढ़ जाती है।
डिजिटल वॉलेट और मोबाइल भुगतान ऐप: विभिन्न डिजिटल वॉलेट सेवाओं और मोबाइल भुगतान ऐप ने भारत में लोकप्रियता हासिल की है। पेटीएम, फोनपे, गूगल पे और अन्य जैसे ऐप भुगतान करने, फंड ट्रांसफर करने और यहां तक कि निवेश और बिल भुगतान के प्रबंधन के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प प्रदान करते हैं।
डिजिटल भुगतान में सरकार की पहल: भारत सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। 2016 में विमुद्रीकरण अभियान ने लोगों को डिजिटल भुगतान विधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके परिणामस्वरूप जागरूकता और उपयोग में वृद्धि हुई। भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) जैसी सरकारी योजनाओं और डिजिटल लेनदेन के लिए कैशबैक प्रोत्साहनों ने डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाने को और बढ़ावा दिया है।
वित्तीय समावेशन: वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने वित्तीय सेवाओं तक पहुंच और प्रबंधन के लिए व्यक्तियों, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वालों के लिए इसे आसान बना दिया है। डिजिटल भुगतान ने नकदी पर निर्भरता कम कर दी है, जिससे लोग औपचारिक अर्थव्यवस्था में अधिक पूर्ण रूप से भाग ले सकते हैं।
मोदी है तो मुमकिन है
सही दिशा में हर कदम के साथ, मोदी सरकार ने भारत को आगे बढ़ाया है। सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम आदमी को मिल रहा है और न कोई बिचौलिया है और न कोई भ्रष्टाचार। नए संसद भवन के साथ, भारतीयों के पास नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व पर गर्व महसूस करने का एक और कारण है।