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सोने और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट (Gold Price Declines Today), 22Karat सोना 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम

सोने की कीमतों में शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। मजबूत डॉलर, अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित वृद्धि और फेडरल रिजर्व द्वारा इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से समर्थन मिला, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम विस्तार को लेकर हुई प्रगति ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। ऐसे माहौल में सोना एक ओर मुद्रास्फीति से सुरक्षा का साधन बना हुआ है, जबकि दूसरी ओर उच्च ब्याज दरों की आशंकाएं इसकी तेजी को सीमित कर रही हैं।

शुक्रवार, 29 मई को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। हाल के सत्रों में मजबूत प्रदर्शन के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना।

सुबह लगभग 9:10 बजे, एमसीएक्स गोल्ड जून फ्यूचर्स 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स 0.38 प्रतिशत फिसलकर 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद कुछ निवेशकों ने अपनी होल्डिंग्स में लाभ सुरक्षित करने का निर्णय लिया, जिससे कीमतों पर दबाव बना।

सोने की कीमतों पर दबाव डालने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक अमेरिकी डॉलर की मजबूती रहा। डॉलर इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की मांग बढ़ी और सोने की आकर्षण क्षमता कुछ हद तक कम हुई।

परंपरागत रूप से देखा जाए तो जब डॉलर मजबूत होता है, तब सोना अन्य मुद्राओं में निवेश करने वाले खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक मांग और कीमतों पर पड़ता है।

इसके अतिरिक्त, अमेरिकी मुद्रास्फीति के नए आंकड़ों ने भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशक अब यह आकलन कर रहे हैं कि बढ़ती महंगाई के जवाब में अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगामी महीनों में किस प्रकार की मौद्रिक नीति अपनाएगा।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स अप्रैल में साल-दर-साल आधार पर 3.8 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि मई 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर मानी जा रही है।

PCE इंडेक्स को अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक मानता है। इसलिए इस आंकड़े में तेज उछाल ने बाजार सहभागियों के बीच यह धारणा मजबूत कर दी है कि फेड इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है।

उच्च ब्याज दरें सामान्यतः सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि सोना कोई ब्याज या लाभांश नहीं देता। जब सरकारी बॉन्ड और अन्य ब्याज आधारित निवेश अधिक आकर्षक रिटर्न प्रदान करते हैं, तब निवेशकों का झुकाव उन परिसंपत्तियों की ओर बढ़ जाता है।

मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद अब निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति बैठकों पर केंद्रित है।

ऊर्जा कीमतों में हालिया मजबूती और कच्चे तेल के ऊंचे स्तरों ने भी मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो उपभोक्ता मूल्य दबाव और अधिक बढ़ सकते हैं, जिससे फेड को ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या अतिरिक्त वृद्धि पर विचार करना पड़ सकता है।

यह स्थिति सोने के लिए मिश्रित संकेत प्रस्तुत करती है। एक ओर महंगाई से बचाव के रूप में इसकी मांग बनी रहती है, जबकि दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों का जोखिम इसकी तेजी को सीमित करता है।

जहां घरेलू बाजारों में सोने पर दबाव दिखाई दिया, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तस्वीर कुछ अलग रही।

वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों को उस समय समर्थन मिला जब अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व तनाव को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की खबरें सामने आईं। दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्षविराम को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में नई सहमति बनने की सूचना ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।

इन घटनाक्रमों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मजबूत हुआ और लगभग 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।

यह बढ़त ऐसे समय आई जब इससे पहले सत्र के दौरान सोना दो महीनों के निचले स्तर तक फिसल गया था। उस समय हवाई हमलों की घटनाओं ने शांति वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी।

बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया का एक प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम विस्तार को लेकर हुई सहमति रही।

जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों ने 60 दिनों के लिए संघर्षविराम बढ़ाने और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की वार्ताओं की शुरुआत करने पर सहमति बनाई है।

यह समझौता ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में जारी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों और निवेशकों की जोखिम धारणा को प्रभावित कर रहा था। संघर्षविराम के विस्तार ने क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीदों को मजबूत किया है, जिससे वित्तीय बाजारों में कुछ राहत देखने को मिली।

हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, लेकिन वार्ता की दिशा में बढ़ते कदम निवेशकों को यह संकेत दे रहे हैं कि निकट भविष्य में तनाव में और कमी आ सकती है।

वर्तमान परिदृश्य में सोने का बाजार दो विपरीत शक्तियों के बीच संतुलन साधता दिखाई दे रहा है।

एक ओर, उच्च मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक जोखिम और आर्थिक अनिश्चितताएं सोने की सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति के रूप में मांग को समर्थन दे रही हैं।

दूसरी ओर, मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि सोने की कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं।

निवेशकों के लिए आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेड अधिकारियों के बयान और मध्य पूर्व से जुड़ी नई खबरें सोने की अगली दिशा निर्धारित कर सकती हैं। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, सोना वैश्विक वित्तीय प्रणाली में जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो विविधीकरण के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अपनी भूमिका बनाए हुए है।

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कल का मौसम: दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश में अत्यधिक गर्म मौसम

दिल्ली इस समय वर्ष के सबसे कठिन जलवायु चरणों में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ तापमान केवल एक मौसमीय आंकड़ा नहीं बल्कि एक आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य-संबंधी चुनौती बन चुका है। मई 2026 के अंतिम सप्ताह में राजधानी लगातार 42–43°C के आसपास झुलस रही है, जबकि रातें भी 35°C से नीचे राहत नहीं दे रहीं। देश के कई हिस्सों में 47–48°C तक तापमान दर्ज होना इस गर्मी की तीव्रता को और स्पष्ट करता है। अल्पकालिक आंधी-तूफान राहत देने में विफल रहे हैं, और वास्तविक राहत अब केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से ही संभव दिखती है।

दिल्ली में तापमान का असामान्य दबाव

नई दिल्ली में मौजूदा हालात सामान्य गर्मी से कहीं अधिक गंभीर रूप ले चुके हैं। 24 मई 2026 की रात को तापमान 35.6°C पर बना रहा, जो कि सामान्य रात्री तापमान से काफी ऊपर है। दिन के समय पारा 43.4°C तक पहुंच गया, जो इस सीजन के उच्चतम स्तरों में से एक है। आने वाले दिनों में स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता। पूर्वानुमान दर्शाते हैं कि तापमान लगातार 42–43°C के बीच बना रहेगा, जबकि बारिश की संभावना बेहद सीमित है। 24 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 0% 25 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 35% 26 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 0% 27 मई: ~43°C, वर्षा संभावना 0% 28 मई: ~42°C, वर्षा संभावना 60% यह पैटर्न स्पष्ट करता है कि भले ही कुछ दिनों में हल्की वर्षा की संभावना हो, परंतु व्यापक राहत की उम्मीद अभी दूर है।

राष्ट्रीय स्तर पर हीटवेव का विस्तार

दिल्ली अकेला नहीं है। भारत के कई हिस्से—विशेष रूप से हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश—भीषण हीटवेव की चपेट में हैं। कई क्षेत्रों में तापमान 47–48°C तक पहुंच चुका है, जो कि मानव सहनशीलता की सीमा के करीब है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 29.3°C के आसपास बना हुआ है, जो यह संकेत देता है कि रातों में भी शरीर को ठंडक नहीं मिल पा रही। इस तरह का “हीट स्ट्रेस” शहरी अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डालता है—ऊर्जा मांग बढ़ती है, श्रम उत्पादकता घटती है, और स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ता है। हाल ही में आए आंधी-तूफान ने थोड़ी राहत जरूर दी, जिसमें 81 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, लेकिन यह राहत अल्पकालिक रही और तापमान जल्द ही वापस उच्च स्तर पर लौट आया।

राहत की संभावनाएँ और मानसून की भूमिका

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, हीटवेव की स्थिति निकट भविष्य में फिर से तेज हो सकती है, और तापमान 44–45°C तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, जून की शुरुआत से प्री-मानसून गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जो कुछ हद तक राहत दे सकती है। वास्तविक और स्थायी राहत का स्रोत हर साल की तरह दक्षिण-पश्चिम मानसून ही रहेगा। इस वर्ष मानसून केरल में सामान्य से पहले, 22 से 26 मई के बीच पहुंचने की संभावना है। इसके बाद यह धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ेगा: तमिलनाडु: 1–6 जून कर्नाटक: 1–5 जून अन्य दक्षिणी राज्य: मध्य जून तक दिल्ली में मानसून का आगमन ऐतिहासिक रूप से जून के अंत से जुलाई की शुरुआत के बीच होता है: 2025: 26 जून 2022: 30 जून 2021: 13 जुलाई 2020: 25 जून इस ट्रेंड के आधार पर, 2026 में भी राजधानी को वास्तविक राहत जून के अंतिम सप्ताह के आसपास मिलने की संभावना है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

यह गर्मी केवल मौसम की कहानी नहीं है; इसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। लगातार उच्च तापमान: बिजली की मांग को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा देता है निर्माण और आउटडोर श्रम गतिविधियों को बाधित करता है स्वास्थ्य लागत को बढ़ाता है, विशेषकर हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों के लिए यह संकेत है कि पीक डिमांड प्रबंधन और ग्रिड स्थिरता आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होंगे। वहीं, शहरी योजना में “हीट रेजिलिएंस” अब एक अनिवार्य तत्व बनता जा रहा है।

रणनीतिक निष्कर्ष और आगे की दिशा

दिल्ली फिलहाल अपने सबसे कठोर गर्मी के चरण में है, और निकट अवधि में तापमान 42–45°C के बीच बने रहने की संभावना है। अल्पकालिक आंधी या हल्की वर्षा कुछ राहत दे सकती है, लेकिन यह टिकाऊ समाधान नहीं है। निवेश और नीति के दृष्टिकोण से: ऊर्जा अवसंरचना में निवेश प्राथमिकता बनना चाहिए शहरी कूलिंग समाधान (ग्रीन स्पेस, कूल रूफ्स) को बढ़ावा देना आवश्यक है स्वास्थ्य क्षेत्र को हीटवेव-रेडी बनाना होगा अंततः, मानसून ही वह निर्णायक कारक होगा जो इस गर्मी के दबाव को तोड़ेगा। लेकिन जब तक वह नहीं आता, दिल्ली को इस चरम तापमान के साथ जीना होगा—और यह स्थिति भविष्य के जलवायु जोखिमों का संकेत भी देती है।

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आज का मौसम: दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप, 45°C के पार पहुंचा पारा

नई दिल्ली में शुक्रवार, 22 मई 2026 का दिन राजधानीवासियों के लिए एक गंभीर हीटवेव चेतावनी लेकर आया है। शहर आज अत्यधिक गर्म और शुष्क मौसम की चपेट में है, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। सुबह से ही तेज धूप और साफ आसमान ने गर्मी की तीव्रता को और बढ़ा दिया है। मौसम विभाग और विभिन्न मौसम एजेंसियों के आंकड़े संकेत देते हैं कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र फिलहाल उत्तर भारत की सबसे कठोर प्री-मानसून गर्मी का सामना कर रहा है। कम आर्द्रता, शुष्क हवाएं और बारिश की अनुपस्थिति ने हालात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हालांकि आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ कुछ राहत ला सकता है, लेकिन फिलहाल राजधानी को अत्यधिक तापमान और हीटवेव जैसी परिस्थितियों से गुजरना होगा।

दिल्ली की सड़कों पर आग बरसाती धूप

राष्ट्रीय राजधानी आज पूरी तरह धूप की चादर में लिपटी हुई है। सफदरजंग मौसम केंद्र के अनुसार सुबह के समय तापमान लगभग 35°C दर्ज किया गया, जबकि दोपहर तक यह तेजी से बढ़कर 45°C तक पहुंच सकता है। यह तापमान सामान्य मौसमी औसत से काफी ऊपर है और इसे गंभीर हीटवेव श्रेणी में रखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मई 2026 दिल्ली के लिए पिछले कई वर्षों के सबसे गर्म महीनों में से एक बनता जा रहा है। शहर में रात का न्यूनतम तापमान भी लगभग 35°C रहने का अनुमान है, जो यह दर्शाता है कि रात में भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली।

कम आर्द्रता ने गर्मी को बनाया और खतरनाक

आज की गर्मी को और अधिक गंभीर बनाने वाला प्रमुख कारक है अत्यंत कम आर्द्रता। वर्तमान में दिल्ली की आर्द्रता केवल 19% के आसपास बनी हुई है। आमतौर पर कम नमी को अपेक्षाकृत सहनीय माना जाता है, लेकिन जब तापमान 45°C के आसपास पहुंच जाए, तब शुष्क हवा भी शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। 0% बादल छाए रहने के कारण सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों में शरीर तेजी से डिहाइड्रेट होता है, जिससे हीट स्ट्रोक, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वायुदाब लगभग 1003 mb दर्ज किया गया है, जो गर्म और अस्थिर वातावरण का संकेत देता है।

गर्म हवाएं दे रही हैं भट्टी जैसा एहसास

दिल्ली में पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी दिशाओं से हवाएं चल रही हैं। इन हवाओं की गति लगभग 21.6 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई है, जबकि कुछ स्थानों पर झोंकों की गति 8.4 मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच रही है। हालांकि तेज हवाएं सामान्य परिस्थितियों में राहत देती हैं, लेकिन मौजूदा तापमान में ये हवाएं गर्म हवा के ब्लोअर जैसी महसूस हो रही हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, यह पैटर्न प्री-मानसून सर्कुलेशन का हिस्सा है, जो उत्तर-पश्चिम भारत में अत्यधिक गर्म परिस्थितियां पैदा करता है।

बारिश की उम्मीद फिलहाल नहीं, लेकिन मौसम बदलने के संकेत

आज दिल्ली में बारिश की संभावना 0% है और पूरे दिन आसमान साफ रहने का अनुमान है। वर्षा का कोई सक्रिय सिस्टम फिलहाल राजधानी के ऊपर मौजूद नहीं है। हालांकि मौसम विज्ञानियों की नजर अब एक तेजी से बढ़ते पश्चिमी विक्षोभ पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर सकता है। अनुमान है कि सोमवार, 25 मई को दिल्ली-एनसीआर में 45% तक बारिश की संभावना बन सकती है। यदि यह सिस्टम सक्रिय हुआ, तो इसके प्रभाव से गरज-चमक, धूलभरी आंधी, बादल और हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव राजधानी को मौजूदा भीषण गर्मी से अस्थायी राहत प्रदान कर सकता है।

पूरे सप्ताह जारी रह सकती है हीटवेव

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली का तापमान लगातार अत्यधिक ऊंचे स्तर पर बना रहेगा। सप्ताहांत में अधिकतम तापमान 43°C से 45°C के बीच रह सकता है, जबकि रात का तापमान भी 31°C से 35°C के बीच रहने की संभावना है। शनिवार को तापमान में मामूली गिरावट दर्ज हो सकती है, लेकिन रविवार और अगले सप्ताह की शुरुआत में फिर से गर्मी बढ़ने के संकेत हैं। मई 2026 के लिए दिल्ली का औसत अधिकतम तापमान लगभग 41°C (106°F) के आसपास बना हुआ है, जो इस मौसम की तीव्रता को स्पष्ट करता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: यह सामान्य गर्मी नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन ने नागरिकों को दोपहर के समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • लगातार पानी पीते रहें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
  • सीधी धूप से बचें और हल्के रंग के कपड़े पहनें।
  • बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
  • खाली पेट बाहर निकलने से बचें।
  • यदि चक्कर, सिरदर्द या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली फिलहाल सामान्य गर्मी नहीं बल्कि पूर्ण विकसित हीटवेव जोन में प्रवेश कर चुकी है।

जलवायु संकेतों के बीच दिल्ली की चुनौती

दिल्ली में बढ़ती गर्मी केवल मौसमी उतार-चढ़ाव का परिणाम नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ते शहरीकरण, कंक्रीट संरचनाओं का विस्तार और हरित क्षेत्रों में कमी ने राजधानी के तापमान को और अधिक चरम बना दिया है। अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव अब दिल्ली के मौसम व्यवहार का स्थायी हिस्सा बनता जा रहा है। रात के समय भी तापमान का ऊंचा बने रहना इसी प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है।

निष्कर्ष: राहत की उम्मीद, लेकिन इंतजार लंबा

नई दिल्ली फिलहाल वर्ष 2026 की सबसे कठिन गर्मी के दौर से गुजर रही है। मौजूदा मौसम परिस्थितियां न केवल जनजीवन को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि स्वास्थ्य और ऊर्जा खपत पर भी व्यापक दबाव डाल रही हैं। आने वाले पश्चिमी विक्षोभ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन अगले कुछ दिन राजधानीवासियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बने रहने वाले हैं। मौसम विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि यह समय सतर्कता, जल संतुलन और सीमित बाहरी गतिविधियों का है। दिल्ली फिलहाल सिर्फ गर्म नहीं है — वह जल रही है।

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महंगे सोने के दौर में बदलती भारत की सोच: निवेश बनाम फैशन का नया युग

भारत में सोने के प्रति आकर्षण कमजोर नहीं पड़ा है—बल्कि यह एक गहरे परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। हाल के वर्षों में सोने की कीमतों में तेज़ उछाल, जो 2026 में कुछ बाजारों में लगभग Rs 1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, ने उपभोक्ता व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है। पारंपरिक ज्वेलरी की मांग में गिरावट आई है, जबकि निवेश की मांग मजबूत बनी हुई है। उपभोक्ता अब हल्के गहनों, निवेश विकल्पों और गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव एक बड़े संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है—जहां सोना एक निवेश संपत्ति बन रहा है और नकली ज्वेलरी एक लाइफस्टाइल उत्पाद।

सोने की कीमतों में उछाल और घटती ज्वेलरी मांग

भारत में सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने पारंपरिक खपत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। 2026 में कीमतें लगभग Rs 1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं, जिससे आम उपभोक्ता की पहुंच से सोना दूर होता जा रहा है। इसका सीधा असर मांग पर पड़ा है। 2025 में ज्वेलरी की मांग में लगभग 24% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह गिरावट 40–50% तक पहुंच गई। यहां तक कि अक्षय तृतीया जैसे पारंपरिक खरीदारी के अवसरों पर भी वॉल्यूम घटे, हालांकि कुल खर्च का मूल्य ऊंचा बना रहा। स्पष्ट है कि मांग खत्म नहीं हुई है—बल्कि खरीदने की क्षमता कम हो गई है।

उपभोक्ता का बदलता व्यवहार: नए विकल्पों की ओर रुख

महंगाई के दबाव के बीच उपभोक्ता अपने खरीद व्यवहार को बदल रहे हैं। कम शुद्धता और हल्के गहनों की ओर झुकाव तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक 22 कैरेट सोने की जगह अब 14K और 9K ज्वेलरी लोकप्रिय हो रही है। इसी के साथ लाइटवेट ज्वेलरी ब्रांड लगभग 30% सालाना की दर से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता अब गहनों के बजाय कॉइन्स, बार्स और ETFs जैसे निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव एक अलग दिशा में हो रहा है।

गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी का उभार: एक बड़ा बदलाव

भारत का आर्टिफिशियल और गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है। 2025 में इसका आकार लगभग $5 बिलियन था, जो आगे चलकर $11.7 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है, और यह लगभग 10% CAGR से बढ़ रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं: 1. कीमत का अंतर: असली सोना अब बहुत महंगा हो गया है, जबकि गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी कम कीमत में वही लुक देती है। 2. अवसर आधारित खरीदारी: शादी, त्योहार और सामाजिक आयोजनों में “गोल्ड लुक” जरूरी है, लेकिन उपभोक्ता अब स्थायी निवेश के बजाय अस्थायी उपयोग को प्राथमिकता देते हैं। 3. फास्ट फैशन का प्रभाव: भारत की 65% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जो ट्रेंड, विविधता और बार-बार स्टाइल बदलने को प्राथमिकता देती है। 4. टियर 2 और 3 शहरों में बढ़ती मांग: बढ़ती आकांक्षाएं और सीमित बजट के कारण ये बाजार तेजी से इस सेगमेंट को अपना रहे हैं।

संस्कृति में बदलाव: निवेश और लाइफस्टाइल का अलगाव

अब सोने की भूमिका दो हिस्सों में बंट रही है:

पुराना भारतनया भारत
सोना = गहना + संपत्तिसोना = निवेश
भारी गहनेहल्के या नकली गहने
जीवनभर की खरीदअवसर आधारित खरीद
लॉकर में संग्रहसोशल/दिखावे के लिए उपयोग

अब असली सोना निवेश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नकली ज्वेलरी फैशन और लाइफस्टाइल का हिस्सा बन रही है

इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया: बदलते बाजार के साथ तालमेल

ज्वेलरी इंडस्ट्री भी इस बदलाव को समझते हुए अपने मॉडल को बदल रही है। पारंपरिक ज्वेलर्स अब कम कीमत और हल्के गहनों की नई रेंज लॉन्च कर रहे हैं। वहीं, खरीदारी का आकार भी छोटा हो रहा है—0.25 ग्राम तक की यूनिट्स लोकप्रिय हो रही हैं। इसके साथ ही सिल्वर और अन्य विकल्पों की मांग बढ़ रही है। आर्टिफिशियल ज्वेलरी ब्रांड जैसे GIVA Jewellery तेजी से बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।

मनोवैज्ञानिक बदलाव: “दिखावा” बनाम “मालिकाना हक”

यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं है—यह मनोवैज्ञानिक भी है। समाज में अमीर दिखने का दबाव बना हुआ है, लेकिन उसे हासिल करने का तरीका बदल गया है। अब लोगों के लिए सोने का दिखना ज्यादा महत्वपूर्ण है, न कि उसे वास्तव में खरीदना। यह ट्रेंड अन्य क्षेत्रों में भी दिखता है: लग्ज़री फैशन की कॉपी लैब-ग्रोउन डायमंड्स रेंटल फैशन इन सभी में एक समान बात है—आकांक्षा बिना स्वामित्व

निवेशकों के लिए संकेत

इस बदलाव के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं: सोने में निवेश की मांग मजबूत बनी रहेगी, लेकिन पारंपरिक ज्वेलरी की मांग पर दबाव बना रहेगा। सबसे बड़ा अवसर आर्टिफिशियल ज्वेलरी में है, जहां: यह सेगमेंट अब विकल्प नहीं, मुख्य श्रेणी बन रहा है युवा उपभोक्ता मांग को आगे बढ़ाएंगे डिजिटल और ब्रांडिंग रणनीति निर्णायक होगी

निष्कर्ष: बदलता हुआ बाजार, खत्म नहीं होता आकर्षण

भारत में सोने का महत्व खत्म नहीं हुआ है—यह बदल रहा है। निवेश की मांग बढ़ रही है, पारंपरिक ज्वेलरी घट रही है, और गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी तेजी से बढ़ रही है। यह केवल अस्थायी बदलाव नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन है, जो कीमत, जनसांख्यिकी और उपभोक्ता सोच से प्रेरित है। आने वाले समय में भारत का गोल्ड मार्केट इस बात से तय होगा कि लोग कितना सोना खरीदते हैं—नहीं, बल्कि इस बात से कि वे उसे कैसे उपयोग करते हैं।

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प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में 90,800 से अधिक इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत 90,800 से अधिक इंटर्नशिप के अवसर 193 कंपनियों द्वारा आवेदन शुरू होने से पहले ही प्रदान किए गए हैं। पंजीकरण 12 अक्टूबर से शुरू होने वाला है, और प्रमुख कंपनियों जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज, मारुति सुजुकी और लार्सन एंड टुब्रो ने पहले ही इंटर्नशिप के अवसर पोर्टल पर पोस्ट कर दिए हैं। यह योजना, जो 800 करोड़ रुपये के पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, मार्च 2025 तक 1.25 लाख इंटर्नशिप प्रदान करने का लक्ष्य रखती है। यह कार्यक्रम 24 क्षेत्रों और 737 जिलों में फैला हुआ है और 21-24 आयु वर्ग के युवाओं को मूल्यवान कार्य अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है।

पोर्टल पर 90,800 से अधिक इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध

12 अक्टूबर से पंजीकरण शुरू होने से पहले 193 कंपनियों द्वारा 90,800 से अधिक इंटर्नशिप अवसर पोर्टल पर पोस्ट किए जा चुके हैं। कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय द्वारा विकसित प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना में प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया है, जिनमें जुबिलेंट फूडवर्क्स, मारुति सुजुकी इंडिया, आइशर मोटर्स, लार्सन एंड टुब्रो, मुथूट फाइनेंस और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल हैं।

विभिन्न उद्योगों में इंटर्नशिप अवसर

इंटर्नशिप के अवसर 24 क्षेत्रों में फैले हुए हैं, जो संभावित उम्मीदवारों के लिए विभिन्न विकल्प प्रदान करते हैं। तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे अधिक अवसर हैं, उसके बाद यात्रा और आतिथ्य, ऑटोमोटिव, और बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में भी कई अवसर उपलब्ध हैं। विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों की यह विविधता इंटर्नशिप योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाती है।

737 जिलों में इंटर्नशिप के अवसर

इंटर्नशिप के अवसर 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 737 जिलों में फैले हुए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि पूरे देश में उम्मीदवारों को मूल्यवान अनुभव प्राप्त हो। यह योजना शहर और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में इंटर्नशिप अवसर प्रदान करती है, जिससे पेशेवर विकास के लिए एक समतामूलक मंच तैयार होता है।

प्रमुख क्षेत्रों और कार्यक्षेत्रों में इंटर्नशिप

इंटर्नशिप 20 से अधिक विशिष्ट कार्यक्षेत्रों में उपलब्ध हैं, जिनमें संचालन प्रबंधन, उत्पादन और निर्माण, मेंटेनेंस, और बिक्री एवं विपणन शामिल हैं। विभिन्न कार्यक्षेत्रों की यह विविधता यह सुनिश्चित करती है कि उम्मीदवार अपने करियर के लक्ष्यों के अनुसार इंटर्नशिप पा सकते हैं, जिससे योजना उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुकूल बनती है।

वित्तीय सहायता: इंटर्न के लिए मासिक स्टाइपेंड

इंटर्न को 12 महीने के लिए प्रति माह 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त होगी और प्रारंभिक खर्चों को कवर करने के लिए एक बार 6,000 रुपये की अनुदान राशि दी जाएगी। यह वित्तीय संरचना युवाओं को व्यावहारिक कार्य अनुभव प्रदान करने के लिए है, जिससे उन्हें आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर सीखने का अवसर मिले। सरकार का यह कदम रोजगार योग्य युवाओं को प्रोत्साहित करने की अपनी व्यापक नीति का हिस्सा है।

पायलट परियोजना में 1.25 लाख उम्मीदवारों को फायदा

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का पायलट चरण 800 करोड़ रुपये की लागत से चालू वित्त वर्ष के अंत तक 1.25 लाख उम्मीदवारों को कवर करेगा। इंटर्नशिप 2 दिसंबर से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे युवा पेशेवरों को तुरंत अपने चुने हुए क्षेत्रों में कार्य अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

दीर्घकालिक लक्ष्य: 1 करोड़ युवा पेशेवरों को सशक्त बनाना

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 1 करोड़ उम्मीदवारों को इंटर्नशिप प्रदान करना है। 2024 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना का उद्देश्य 21-24 आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए कौशल विकास और रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। संरचित कार्य अनुभव प्रदान करके, सरकार शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटना चाहती है।

ऑनलाइन पोर्टल: योजना की रीढ़

योजना को पोर्टल के माध्यम से लागू किया जाएगा, जिसे कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय ने विकसित किया है। यह पोर्टल कंपनियों के लिए अवसर पोस्ट करने और उम्मीदवारों के लिए आवेदन करने का केंद्रीय मंच है, जो प्रक्रिया को सरल और कुशल बनाएगा। यह डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण रोजगार पहलों को आधुनिक बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

निष्कर्ष: भारत के युवाओं के लिए एक संभावनाशील अवसर

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना युवाओं के लिए एक परिवर्तनकारी पहल बनने के लिए तैयार है। कॉर्पोरेट क्षेत्र से बड़े पैमाने पर समर्थन और एक स्पष्ट वित्तीय संरचना के साथ, यह कार्यक्रम पहले चरण में ही हजारों इंटर्न को मूल्यवान कार्य अनुभव प्रदान करेगा। जैसे-जैसे योजना का विस्तार होगा, यह भारत के कार्यबल में कौशल विकास को बढ़ावा देने और एक पीढ़ी को दीर्घकालिक सफलता के लिए सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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एली साब वेडिंग गाउन में प्रिंसेस रजवा अल-हुसैन लगीं बेहद खूबसूरत

जॉर्डन के क्राउन प्रिंस हुसैन ने सऊदी व्यवसायी खालिद अल सैफ की बेटी रजवा अल-हुसैन से शादी की। शाही जोड़े का विवाह समारोह 1 जून, 2023 को ज़हरान पैलेस में आयोजित किया गया। आधिकारिक तौर पर क्राउन प्रिंस से शादी करने के बाद, प्रिसेस रजवा से अब शाही घराने की गतिविधियों में भाग लेने की उम्मीद है। दुल्हन अपने विशेष रूप से सिलवाए गए एली साब गाउन में बहुत खूबसूरत लग रही थी।

एली साब वेडिंग गाउन में प्रिंसेस रजवा

बहुत प्रत्याशा के बाद, जॉर्डन की नई क्राउन राजकुमारी रजवा अल-हुसैन ने गुरुवार को अम्मान में क्राउन प्रिंस हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय के साथ शादी के बंधन में बंधने के बाद अपनी शादी की पोशाक का खुलासा किया। दुल्हन, जिसे पहले रजवा अल-सैफ के नाम से जाना जाता था, ने लेबनानी डिजाइनर एली साब की पारंपरिक सफेद पोशाक पहनी थी। फुल स्लीव्स वाला गाउन, उसके पीछे कई मीटर तक फैला एक नाटकीय घूंघट और एक स्टाइलिश ड्रेप्ड नेकलाइन द्वारा पूरक था।

राजकुमारी रजवा अल-हुसैन एक सऊदी व्यवसायी और निजी स्वामित्व वाले अल सैफ समूह के सीईओ खालिद अल सैफ और उनकी पत्नी अज़्ज़ा अल सुदैरी के चार बच्चों में सबसे छोटी हैं। अल सैफ वंश सुदैर में अल-अत्तर शहर के सरदारों, सुबाई जनजाति के लिए वापस जाता है।

लगभग 140 उपस्थित लोगों ने समारोह में भाग लिया, जिसमें रॉयल हाशमाइट परिवार, आमंत्रित रॉयल्टी और राज्यों के प्रमुख शामिल थे। यहां तक कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और यूएस फर्स्ट लेडी जिल बिडेन ने भी सोशल मीडिया पर बधाई दी।

जॉर्डन के राजकुमार हुसैन

भविष्य के हशमाइट किंग का जन्म 28 जून 1994 को अम्मान के किंग हुसैन मेडिकल सेंटर में हुआ था। वह तत्कालीन-क्राउन प्रिंस अब्दुल्ला और क्राउन प्रिंसेस रानिया की पहली संतान थे। अपने नाना राजा हुसैन के नाम पर, वह हमेशा सिंहासन के उत्तराधिकारी नहीं थे। जार्डन का संविधान एक सम्राट को अपना उत्तराधिकारी चुनने की अनुमति देता है, और अब्दुल्ला ने अपने स्वर्गारोहण के समय यही किया।

क्राउन प्रिंस की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक थी जब वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सत्र की अध्यक्षता करने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने। यहां, उन्होंने वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने और युवाओं को चरमपंथी समूहों के साथ जुड़ने से रोकने पर अपने विचार व्यक्त किए।

क्राउन प्रिंस हुसैन ने कठोर सैन्य प्रशिक्षण भी लिया है, जिसमें जॉर्डन के विशेष बलों की एक विशिष्ट इकाई 71 वीं आतंकवाद विरोधी बटालियन के साथ 2013 का प्रशिक्षण सत्र भी शामिल है।

उन्होंने 2017 में सैंडहर्स्ट मिलिट्री अकादमी में अपना प्रशिक्षण पूरा किया और वर्तमान में जॉर्डन सशस्त्र बलों में कप्तान के रूप में कार्यरत हैं।

रॉयल वेडिंग जॉर्डन

रॉयल वेडिंग में प्रिंस विलियम और प्रिंसेस केट शामिल हुए

प्रिंस विलियम और राजकुमारी केट जॉर्डन के राजकुमार हुसैन और राजकुमारी रजवा की शाही शादी में अप्रत्याशित रूप से उपस्थित हुए। वेल्स की राजकुमारी ने, अपने स्टाइल के अनुरूप, हमें शादी के लिए कैसे कपड़े पहनने हैं, इस पर एक मास्टर क्लास दी।

एली साब द्वारा डिज़ाइन किए गए सुरुचिपूर्ण फीता अलंकरणों से सजी लंबी आस्तीन और एक नकली गर्दन के साथ एक धूल भरे गुलाबी गाउन में शाही फैशन दिवा चकाचौंध थी। शानदार झुमके और एक सोने के क्लच बैग के साथ, राजकुमारी अपने पोशाक में लुभावनी लग रही थी।

प्रिंसेस बीट्राइस – रॉयल वेडिंग जॉर्डन

इस कार्यक्रम में यूएस फर्स्ट लेडी जिल बिडेन सहित कई प्रतिष्ठित अतिथि शामिल हुए; कतर की शेखा मोजा बिन्त नासिर; मलेशिया और नीदरलैंड के शाही जोड़े; किंग जुआन कार्लोस I और स्पेन की रानी सोफिया; लक्ज़मबर्ग के राजकुमार सेबेस्टियन; क्राउन प्रिंस फ्रेडरिक और डेनमार्क की क्राउन राजकुमारी मैरी; स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया और वैस्टरगोटलैंड के ड्यूक प्रिंस डेनियल; हाकोन, नॉर्वे के क्राउन प्रिंस और हिसाको, राजकुमारी ताकामाडो और उनकी बेटी, जापान के ताकामाडो की राजकुमारी त्सुगुको, अन्य लोगों के साथ।

महारानी रानिया और राजा अब्दुल्ला – रॉयल वेडिंग जॉर्डन
रॉयल वेडिंग जॉर्डन
रॉयल वेडिंग जॉर्डन
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भारत स्वास्थ्य

तमिल उद्यमी जहांगीर मोहम्मद का मधुमेह रोगियों के लिए एआई-संचालित होल बॉडी डिजिटल ट्विन

जहांगीर मोहम्मद ने तमिलनाडु में विनम्र शुरुआत की लेकिन मास्टर्स डिग्री करने के लिए वे कनाडा चले गए और उन्होंने तीन सफल कंपनियों की स्थापना की जो दुनिया में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मोहम्मद ने मधुमेह और फैटी-लीवर रोगियों के लिए विकल्पों में सुधार करने का एक और महत्वाकांक्षी कार्य शुरू किया है। भारत एक बड़ी मधुमेह महामारी का सामना कर रहा है। 2021 तक, 74 मिलियन से अधिक भारतीयों को मधुमेह का पता चला था, जिससे भारत दुनिया भर में मधुमेह रोगियों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या वाला देश बन गया। यह अनुमान लगाया गया है कि यह संख्या 2045 तक बढ़कर 124 मिलियन से अधिक हो जाएगी।

Twin Health Incorporated, एक हेल्थकेयर स्टार्टअप, वैज्ञानिक समुदाय के साथ नियमित रूप से अपनी प्रगति साझा करता है। वे मंचों, पत्रिकाओं और सम्मेलनों सहित विभिन्न चैनलों के माध्यम से ऐसा करते हैं, जो उनकी तकनीक के साथ किए जा रहे कदमों को टाइमस्टैम्प करने के लिए प्लेटफॉर्म के रूप में काम करते हैं।

हाल के दिनों में, कंपनी ने सिएटल में अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी की वार्षिक बैठक में टाइप -2 मधुमेह की छूट और फैटी-लीवर मापदंडों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण परिणाम प्रदर्शित किए हैं। इस शहर को टेक हब के रूप में भी जाना जाता है, जो अमेज़ॅन और माइक्रोसॉफ्ट जैसे दिग्गजों की मेजबानी करता है। इसके अतिरिक्त, कंपनी के काम को जून में जर्नल ऑफ़ हाइपरटेंशन में चित्रित किया जाना तय है। ट्विन हेल्थ को साल भर में कई अन्य प्रकाशनों में चित्रित किया गया है, कुल मिलाकर लगभग 40 तक।

ट्विन हेल्थ अपने परिणामों की निरंतरता, गुणवत्ता और सटीकता पर ध्यान केंद्रित करके खुद को अन्य अच्छी तरह से वित्त पोषित स्वास्थ्य तकनीक स्टार्टअप से अलग करता है।

कंपनी की स्थापना पांच साल पहले जहांगीर मोहम्मद द्वारा की गई थी, यह एकमात्र अंतर्दृष्टि पर आधारित थी कि मधुमेह, एक व्यापक पुरानी बीमारी, मुख्य रूप से खराब चयापचय के कारण होती है। इस समझ को एक संभावित सफलता के रूप में माना गया था।

मोहम्मद ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों से मधुमेह के बारे में व्यापक पूछताछ की। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक के साथ एक बातचीत में मानव चयापचय की जटिलता और गतिशीलता पर प्रकाश डाला गया, साथ ही यह एहसास भी हुआ कि यह भिन्न होता है और अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग तरीके से क्षतिग्रस्त हो सकता है। इस बातचीत ने किसी व्यक्ति की चयापचय स्थिति पर कब्जा करने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग करने की अवधारणा को जन्म दिया, जो कि मोहम्मद और एमए मलुक मोहम्मद (असंबंधित) द्वारा सह-स्थापित जुड़वां स्वास्थ्य के लिए एक केंद्रीय विचार बन गया।

2018 में अमेरिका और भारत में ट्विन हेल्थ की स्थापना से पहले, मोहम्मद ने जैस्पर टेक्नोलॉजीज की सह-स्थापना की। जैस्पर, एक IoT- आधारित कंपनी है जिसने टेस्ला, जनरल मोटर्स और जनरल इलेक्ट्रिक जैसे प्रमुख अमेरिकी व्यवसायों की सेवा की थी, जिसे बाद में 2016 में IT दिग्गज सिस्को द्वारा $1.4 बिलियन में अधिग्रहित कर लिया गया था।

मोहम्मद को कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी, कनाडा द्वारा मानद डॉक्टरेट और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, स्विट्जरलैंड द्वारा IoT टेक्नोलॉजी पायनियर से सम्मानित किया गया है। उन्हें आइंस्टीन फाउंडेशन की जीनियस: 100 विजन ऑफ फ्यूचर में भी नामित किया गया है। उनके उद्यमों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सॉफ्टवेयर और कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजीज में 80+ पेटेंट दिए गए हैं। उनकी कंपनी जैस्पर (सिस्को को बेची गई) ने वैश्विक IoT क्लाउड प्लेटफॉर्म का नेतृत्व किया जो वर्तमान में दुनिया भर में 20,000 से अधिक उद्यमों द्वारा उपयोग किया जाता है। उन्होंने कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, तमिलनाडु से बी.टेक पूरा किया और फिर मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी, मॉन्ट्रियल चले गए।

अपने IoT अनुभव पर आकर्षित, मोहम्मद और उनके सह-संस्थापकों ने दुनिया का पहला संपूर्ण शरीर डिजिटल ट्विन (WBDT) बनाने की शुरुआत की। WBDT, औद्योगिक डिजिटल जुड़वां अवधारणा से प्रेरित है, एक भौतिक प्रणाली का एक आभासी प्रतिनिधित्व है जहां सेंसर वास्तविक दुनिया डेटा एकत्र करते हैं, डिजिटल और भौतिक क्षेत्रों के बीच एक पुल बनाते हैं।

ट्विन हेल्थ इनकॉर्पोरेटेड और होल बॉडी डिजिटल ट्विन

ट्विन हेल्थ इनकॉर्पोरेटेड एक सटीक स्वास्थ्य मंच प्रदान करता है जिसे होल बॉडी डिजिटल ट्विन™ के रूप में जाना जाता है। यह मंच प्रत्येक रोगी के अद्वितीय चयापचय कार्य के आधार पर उपचार को समझने और अनुकूलित करने के लिए चिकित्सा अनुसंधान में नवीनतम प्रगति का उपयोग करता है। प्राथमिक उद्देश्य पुराने चयापचय रोगों के मूल कारण को संबोधित करना है, जिसमें टाइप 2 मधुमेह और अन्य पुरानी बीमारियां शामिल हैं, न कि केवल लक्षणों का प्रबंधन करना​।

ट्विन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है

प्रत्येक सदस्य के अद्वितीय चयापचय के अनुरूप अनुकूलित मार्गदर्शन।
प्रमुख स्व-बीमित नियोक्ताओं, स्वास्थ्य योजनाओं, स्वास्थ्य प्रणालियों और प्रदाताओं के साथ साझेदारी जो संपूर्ण व्यक्ति दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कई पुरानी चयापचय संबंधी बीमारियों को उलटने और रोकने पर ध्यान केंद्रित करना।
एक प्रदर्शन-आधारित शुल्क मॉडल।
मंच कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रौद्योगिकियों द्वारा संचालित है जो सदस्यों के लिए अत्यधिक तकनीकी लेकिन अत्यधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करता है। रोग के मूल कारण को ठीक करने के लिए उन्हें चिकित्सकों और प्रशिक्षकों द्वारा निर्देशित किया जाता है। ट्विन हेल्थ इंक कर्मचारियों, सदस्यों और रोगियों को स्वस्थ, खुशहाल जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे महत्वपूर्ण, निरंतर लागत बचत हो रही है।

मेजर वेंचर कैपिटल फंड्स द्वारा निवेश

अब तक, ट्विन हेल्थ ने 7 अक्टूबर, 2021 को सीरीज़ सी राउंड से नवीनतम फंडिंग के साथ, तीन राउंड में फंडिंग में $198.5M हासिल किया है। स्टार्टअप को आठ निवेशकों द्वारा समर्थित किया गया है, जिसमें हाल के योगदानकर्ताओं के रूप में ICONIQ ग्रोथ और कॉर्नर वेंचर्स शामिल हैं, जबकि Sequoia कैपिटल इंडिया, हेलेना, एलटीएस इन्वेस्टमेंट्स और परसेप्टिव एडवाइजर्स प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं।

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भारत राजनीति

नया संसद भवन, भव्य है लोकतंत्र का नया मंदिर; लेकिन विपक्ष क्यों रो रहा है?

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान नए संसद भवन के निर्माण के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की। निर्माण दिसंबर 2020 में शुरू हुआ, और आगामी संसदीय सत्र की मेजबानी के लिए परियोजना 20 मई, 2023 को पूरी हो गई है। सेंट्रल विस्टा (आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत) के रूप में संदर्भित, इस परियोजना को वास्तुकार बिमल पटेल द्वारा डिजाइन किया गया है और इसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों की स्थापत्य शैली शामिल है।

28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए भवन का उद्घाटन करेंगे। मोदी को साहसिक निर्णय लेने के लिए जाना जाता है और उन्होंने अपना ध्यान भारत के विकास पर केंद्रित किया है। आईएमएफ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत को वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक उज्ज्वल स्थान माना जाता है। भारत सरकार ने भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। हालाँकि, विपक्षी दलों ने मोदी सरकार द्वारा उठाए गए हर कदम की लगातार आलोचना की है, कई विपक्षी नेताओं ने नए संसद भवन के उद्घाटन में उनकी उपस्थिति का भी विरोध किया है।

सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत $2.8 बिलियन है, आदर्श रूप से भारत सरकार के प्रयासों को देखते हुए, सभी भारतीय राजनीतिक दलों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए। भारत की बढ़ती जनसंख्या और भविष्य के परिसीमन के कारण सदस्यों की संख्या में संभावित वृद्धि को समायोजित करने के लिए लोकसभा और राज्यसभा के प्रस्तावित कक्षों में बैठने की बड़ी क्षमता होगी। लोकसभा कक्ष में 888 सीटें होंगी, जबकि राज्यसभा कक्ष में 384 सीटें होंगी।

मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई अन्य परियोजनाओं की तरह, नए संसद भवन के लिए चुने गए नाम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित हैं। भवन में ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम से तीन प्रवेश द्वार होंगे।

यह परियोजना टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा उल्लेखनीय रूप से कम समय सीमा में पूरी की गई है। सरकार ने पहली बार सितंबर 2019 में इस विचार की घोषणा की, और मई 2023 तक, इस परियोजना को साकार किया गया, जो तेजी से निर्णय लेने के सरकार के दृढ़ संकल्प को उजागर करता है। 2016 में मुद्रा विमुद्रीकरण जैसे विवादास्पद फैसलों के बावजूद, राजनीतिक विशेषज्ञ नरेंद्र मोदी को भारत की बेहतरी के लिए कठोर निर्णय लेने के संकल्प के साथ एक नेता के रूप में पहचानते हैं।

जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके सहयोगी नए संसद भवन के समर्थक हैं, इमारत के उद्घाटन को विपक्ष से काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है। 26 मई को, 19 विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा “संवैधानिक अनुपयुक्तता” का आरोप लगाते हुए इस कार्यक्रम के बहिष्कार की घोषणा की। सुप्रीम कोर्ट ने उद्घाटन समारोह से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। संयोग से, उद्घाटन की तारीख वीडी सावरकर की जयंती के साथ संरेखित है।

भाजपा ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि नई इमारत सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है और विपक्ष पर उद्घाटन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सभी राजनीतिक दलों को समारोह में आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनकी भागीदारी उनकी व्यक्तिगत भावनाओं पर निर्भर करेगी।

नया संसद भवन न केवल एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, बल्कि बैठने की बढ़ी हुई क्षमता और एयर कंडीशनिंग, प्रकाश व्यवस्था और विश्राम कक्ष जैसी बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक आवश्यक उन्नयन भी है। सरकार ने नोट किया है कि 1927 की मूल इमारत में घिसावट और अति प्रयोग के लक्षण दिखाई दिए हैं।

राजनीतिक विश्लेषक सेंट्रल विस्टा परियोजना को मोदी के दूसरे कार्यकाल की “कैपस्टोन परियोजना” के रूप में मानते हैं, क्योंकि यह हिंदू राष्ट्रवाद के अपने ब्रांड को मजबूत करते हुए औपनिवेशिक अतीत से भारत की भौतिक पहचान को पुनः प्राप्त करने के उनके प्रयास को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, परियोजना पर मोदी का जोर और देश भर में हिंदू मंदिरों का निर्माण उनके हिंदुत्व एजेंडे के साथ संरेखित है। अगले साल होने वाले चुनाव से पहले यह चर्चा का विषय रहा है।

बुधवार को, 19 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विपक्षी दलों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि मोदी का “खुद नए संसद भवन का उद्घाटन” करने का निर्णय “न केवल एक गंभीर अपमान है बल्कि हमारे लोकतंत्र पर सीधा हमला है जो एक समान प्रतिक्रिया की मांग करता है।” पार्टियों ने सामूहिक रूप से इस आयोजन का बहिष्कार करने की योजना बनाई है, जिसमें कहा गया है कि “लोकतंत्र की आत्मा को संसद से चूसा गया है।” लेकिन, जैसा कि विपक्ष के अधिकांश कदमों के साथ होता है, इसे ज्यादा समर्थन नहीं मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया आधिकारिक वीडियो
भारत का नया संसद भवन – सेंट्रल विस्टा
भारत का नया संसद भवन – सेंट्रल विस्टा
भारत का नया संसद भवन – सेंट्रल विस्टा

मोदी जी की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं

भारत में मोदी सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शुरू की हैं। यहाँ कुछ उल्लेखनीय पहलें और उपलब्धियाँ हैं:

स्वच्छ भारत अभियान: 2014 में शुरू किए गए इस राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान का उद्देश्य भारत को खुले में शौच मुक्त बनाना और स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना था। इसने लाखों शौचालयों के निर्माण, स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं को बढ़ावा देने और स्वच्छ पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने का नेतृत्व किया।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी): 2017 में लागू, जीएसटी ने भारत की खंडित अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एकीकृत किया, कर संरचना को सरल बनाया और पूरे देश में एक आम बाजार को बढ़ावा दिया। इसने कई राज्य-स्तरीय करों को समाप्त कर दिया, व्यवसायों के लिए अनुपालन बोझ को कम किया और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा दिया।

प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई): 2014 में शुरू किए गए इस वित्तीय समावेशन कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में हर घर को बैंक खाते, सस्ती क्रेडिट, बीमा और पेंशन योजनाओं तक पहुंच प्रदान करना है। इसने पहले से बिना बैंक वाले लाखों व्यक्तियों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में सफलतापूर्वक लाया।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई): 2016 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) प्रदान करना है, जिससे लकड़ी और मिट्टी के तेल जैसे पारंपरिक खाना पकाने के ईंधन से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी खतरों को कम किया जा सके। इसने लाखों परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए हैं और वायु गुणवत्ता और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार करने में योगदान दिया है।

मेक इन इंडिया: 2014 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में बढ़ावा देना है। इसने विदेशी निवेश को आकर्षित करने, व्यापार करने में आसानी में सुधार लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा और वस्त्र सहित कई क्षेत्रों में निवेश और वृद्धि देखी गई है।

डिजिटल इंडिया: इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है। इसने डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने और सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से वितरित करने पर ध्यान केंद्रित किया। आधार (एक बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी पहलों ने सेवा वितरण को सुव्यवस्थित किया है और भ्रष्टाचार को कम किया है।

प्रधान मंत्री आवास योजना (PMAY): 2015 में लॉन्च की गई इस किफायती आवास योजना का उद्देश्य 2022 तक सभी के लिए आवास उपलब्ध कराना है। यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, कम आय वाले समूहों और मध्यम आय वर्ग के लिए किफायती आवास विकल्प प्रदान करने पर केंद्रित है। इसने देश भर में लाखों किफायती आवास इकाइयों का निर्माण किया है।

आयुष्मान भारत – प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई): 2018 में शुरू की गई, इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना का उद्देश्य माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए स्वास्थ्य कवरेज की पेशकश करके समाज के कमजोर वर्गों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। यह 500 मिलियन से अधिक लोगों को बीमा कवरेज प्रदान करता है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम बन गया है।

मुद्रा विमुद्रीकरण – एक और मास्टरस्ट्रोक

2016 में, मोदी सरकार ने मुद्रा विमुद्रीकरण की घोषणा की और यह भारतीय अर्थव्यवस्था को नकद से डिजिटल स्थानान्तरण में बदलने का एक बड़ा कदम था। भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है और हाल के वर्षों में इसने पर्याप्त प्रगति की है।

एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई): यूपीआई की शुरूआत ने भारत में डिजिटल भुगतान परिदृश्य में क्रांति ला दी। यूपीआई मोबाइल फोन के माध्यम से बैंक खातों के बीच सहज और तत्काल फंड ट्रांसफर की अनुमति देता है। इसके उपयोग में आसानी, इंटरऑपरेबिलिटी और रीयल-टाइम लेनदेन क्षमताओं के कारण इसे व्यापक लोकप्रियता मिली है।

आधार-सक्षम भुगतान: आधार, भारत की बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली, को डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत किया गया है। यह व्यक्तियों को अपने आधार नंबर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग करके भुगतान करने में सक्षम बनाता है, जिससे भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और सुरक्षा बढ़ जाती है।

डिजिटल वॉलेट और मोबाइल भुगतान ऐप: विभिन्न डिजिटल वॉलेट सेवाओं और मोबाइल भुगतान ऐप ने भारत में लोकप्रियता हासिल की है। पेटीएम, फोनपे, गूगल पे और अन्य जैसे ऐप भुगतान करने, फंड ट्रांसफर करने और यहां तक कि निवेश और बिल भुगतान के प्रबंधन के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प प्रदान करते हैं।

डिजिटल भुगतान में सरकार की पहल: भारत सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। 2016 में विमुद्रीकरण अभियान ने लोगों को डिजिटल भुगतान विधियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके परिणामस्वरूप जागरूकता और उपयोग में वृद्धि हुई। भीम (भारत इंटरफेस फॉर मनी) जैसी सरकारी योजनाओं और डिजिटल लेनदेन के लिए कैशबैक प्रोत्साहनों ने डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाने को और बढ़ावा दिया है।

वित्तीय समावेशन: वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने वित्तीय सेवाओं तक पहुंच और प्रबंधन के लिए व्यक्तियों, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वालों के लिए इसे आसान बना दिया है। डिजिटल भुगतान ने नकदी पर निर्भरता कम कर दी है, जिससे लोग औपचारिक अर्थव्यवस्था में अधिक पूर्ण रूप से भाग ले सकते हैं।

मोदी है तो मुमकिन है

सही दिशा में हर कदम के साथ, मोदी सरकार ने भारत को आगे बढ़ाया है। सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ आम आदमी को मिल रहा है और न कोई बिचौलिया है और न कोई भ्रष्टाचार। नए संसद भवन के साथ, भारतीयों के पास नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व पर गर्व महसूस करने का एक और कारण है।

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अभिनेता नितेश पांडे का 51 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन

फिल्म और टेलीविजन के प्रसिद्ध अभिनेता नितेश पांडे का बुधवार रात निधन हो गया। दुख की बात है कि 23 मई की रात उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 51 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। नितेश पांडे को रूपाली गांगुली अभिनीत बेहद लोकप्रिय शो ‘अनुपमा’ में उनकी हालिया उपस्थिति के लिए व्यापक रूप से पहचाना गया।

खबरों के मुताबिक, नितेश पांडे को रात में दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनका असामयिक निधन हो गया। ‘अनुपमा’ में अपनी उल्लेखनीय भूमिका के अलावा, नितेश पांडे अपने पूरे करियर में कई टेलीविजन शो और फिल्मों का हिस्सा रहे। उनके कुछ उल्लेखनीय प्रदर्शनों में फिल्म ‘ओम शांति ओम’ में शाहरुख खान के सहायक के रूप में उनकी भूमिका और दिबाकर बनर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘खोसला का घोसला’ में बोमन ईरानी, अनुपम खेर, रणवीर शौरी, परवीन डबास, तारा के साथ उनकी भूमिका शामिल है। शर्मा, और विनय पाठक।

नितेश पांडे लगभग 25 वर्षों से मनोरंजन उद्योग से जुड़े हुए थे, टेलीविजन, थिएटर और सिनेमा में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे थे। यह ‘खोसला का घोसला’ में मणि के रूप में उनकी भूमिका थी जिसने उनके असाधारण अभिनय कौशल और स्क्रीन उपस्थिति को प्रदर्शित करते हुए महत्वपूर्ण ध्यान और प्रशंसा प्राप्त की।

इसके अतिरिक्त, नितेश पांडे ‘बधाई दो,’ ‘रंगून,’ ‘मदारी,’ ‘हंटर,’ ‘शादी के साइड इफेक्ट्स,’ ‘मिकी वायरस,’ ‘दबंग 2,’ ‘सिन्स,’ ‘मेरे यार’ जैसी फिल्मों में दिखाई दिए। की ढाडी है,’ और ‘बाजी’।

नीतेश पांडे ने 1990 में सुधा चंद्रन के साथ ‘आस्था’ और ‘मिसाल पाव’ जैसी प्रस्तुतियों में अभिनय करते हुए अपनी नाटकीय यात्रा शुरू की। उन्होंने ‘मंजिलें अपनी अपनी’, ‘अस्तित्व…एक प्रेम कहानी,’ ‘साया,’ ‘जस्टजू,’ और ‘दुर्गेश नंदिनी’ जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में भी उल्लेखनीय भूमिकाएँ निभाईं। इसके अलावा, नितेश पांडे ने ड्रीम कैसल प्रोडक्शंस नाम से एक स्वतंत्र प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की।

निजी नोट पर, नितेश पांडे ने 1998 में अश्विनी कलसेकर से शादी की, लेकिन 2002 में दोनों अलग हो गए। बाद में उन्होंने टेलीविजन अभिनेत्री अर्पिता पांडे के साथ शादी कर ली।

एएनआई के मुताबिक, पांडे अपने होटल में मृत पाए गए और पुलिस मौत के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि हार्ट अटैक के कारण उसकी मौत हुई है। “टीवी अभिनेता नितेश पांडे महाराष्ट्र के नासिक के इगतपुरी में एक होटल में मृत पाए गए। प्रथम दृष्टया मौत का कारण हार्ट अटैक लग रहा है। पुलिस की एक टीम होटल में मौजूद है और मामले की जांच की जा रही है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, होटल के कर्मचारियों और उनके करीबी लोगों से पूछताछ की जा रही है।

हम इस कठिन समय में नितेश पांडे के परिवार और प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं और उन्हें इस दुर्भाग्यपूर्ण नुकसान से निपटने की शक्ति की कामना करते हैं।

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संपादक की पसंद स्वास्थ्य

भारत सरकार का चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा

चिकित्सा पर्यटन हाल के वर्षों में उठा रहा है। जबकि बहुत से लोगों की बीमा योजनाओं या महंगे उपचार विकल्पों द्वारा कवरेज न होने के कारण अत्यधिक उन्नत पश्चिमी देशों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच नहीं है। भारत, थाईलैंड, तुर्की और मलेशिया चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख स्थलों के रूप में उभर रहे हैं। कई देश, विशेष रूप से एशिया, पूर्वी यूरोप और लैटिन अमेरिका में, विकसित देशों की तुलना में काफी कम कीमतों पर चिकित्सा प्रक्रियाओं की पेशकश करते हैं। यह रोगियों को लागत के एक अंश पर देखभाल की समान गुणवत्ता या उससे भी बेहतर प्राप्त करने की अनुमति देता है।

आमतौर पर, लोग जटिल बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे देशों की यात्रा करते हैं जब स्वास्थ्य सेवा महंगी होती है, विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होते हैं, या घर पर लंबी प्रतीक्षा अवधि होती है। भारत, थाईलैंड और मलेशिया चिकित्सा पर्यटन के लिए एशिया में तीन सबसे बड़े स्थलों के रूप में उभरे हैं। 2022 में, भारत सरकार ने स्वास्थ्य पर्यटन को गति देने के लिए “हील इन इंडिया” पोर्टल भी लॉन्च किया। स्वास्थ्य मंत्रालय के नेतृत्व में यह पहल भारत को स्वास्थ्य सेवा में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने और देश के भीतर चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास करती है।

हील इन इंडिया का उद्देश्य भारत में किफायती स्वास्थ्य देखभाल विकल्पों की तलाश करने वाले अंतरराष्ट्रीय रोगियों के लिए उपचार पैकेजों का मानकीकरण करना है। वर्तमान में, देश भर में विभिन्न कीमतों पर चिकित्सा उपचार की पेशकश की जाती है।

इस पहल में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग शामिल है और इसमें आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरह की चिकित्सा पद्धतियां शामिल हैं। इसका लक्ष्य चिकित्सा उपचार के लिए भारत आने वाले विदेशी नागरिकों को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।

मलेशिया, तुर्की और थाईलैंड जैसे अन्य देश भी स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा सेवाओं और पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं। मलेशिया का चिकित्सा पर्यटन उद्योग विकास के एक महत्वाकांक्षी दूसरे चरण की शुरुआत कर रहा है। सरकारी समर्थन के साथ, क्षेत्र विशेष रूप से कार्डियोलॉजी और ऑन्कोलॉजी में उच्च मूल्य सेवाओं की ओर बढ़ रहा है। इस रणनीतिक बदलाव का उद्देश्य इंडोनेशियाई रोगियों पर निर्भरता कम करना और इसके बजाय विभिन्न देशों के व्यक्तियों को आकर्षित करना है।

विशिष्ट उपचारों तक पहुंच: कुछ चिकित्सा प्रक्रियाएं या उपचार किसी रोगी के गृह देश में उपलब्ध या सुलभ नहीं हो सकते हैं। चिकित्सा पर्यटन विशेष उपचार, अत्याधुनिक तकनीक, या प्रक्रियाओं का उपयोग करने का अवसर प्रदान करता है जो स्थानीय रूप से उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।

कम प्रतीक्षा समय: सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली वाले देशों में, कुछ प्रक्रियाओं या परामर्शों के लिए लंबा प्रतीक्षा समय एक महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है। चिकित्सा पर्यटन रोगियों को इन प्रतीक्षा सूचियों को बायपास करने और समय पर उपचार प्राप्त करने की अनुमति देता है।

उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल: चिकित्सा पर्यटकों की सेवा करने वाले कई देशों में अच्छी तरह से स्थापित स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रसिद्ध चिकित्सा पेशेवर हैं। मरीज अत्यधिक कुशल और अनुभवी डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों से उपचार प्राप्त करने के लिए इन स्थलों की तलाश करते हैं।

यात्रा के साथ स्वास्थ्य सेवा का संयोजन: चिकित्सा पर्यटन अवकाश यात्रा के साथ चिकित्सा उपचार के संयोजन का लाभ प्रदान करता है। मरीज आकर्षक पर्यटन स्थलों में प्रक्रियाओं से गुजर सकते हैं और ठीक हो सकते हैं, उपचार प्रक्रिया के दौरान अधिक सुखद और आराम का अनुभव प्रदान करते हैं।

चिकित्सा पर्यटन में कुछ उल्लेखनीय उभरते देश

थाईलैंड: थाईलैंड कई वर्षों से चिकित्सा पर्यटन के लिए एक प्रमुख स्थान रहा है। यह बैंकाक, फुकेत और चियांग माई में प्रसिद्ध अस्पतालों और क्लीनिकों के साथ सस्ती कीमतों पर चिकित्सा प्रक्रियाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है। देश कॉस्मेटिक सर्जरी, दंत चिकित्सा प्रक्रियाओं और वेलनेस रिट्रीट में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।

मलेशिया: मलेशिया ने अपनी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं के लिए एक प्रतिष्ठा विकसित की है। यह विशेष रूप से कार्डियक प्रक्रियाओं, प्रजनन उपचार और कॉस्मेटिक सर्जरी में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। कुआलालंपुर और पेनांग प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण देखभाल चाहने वाले चिकित्सा पर्यटकों के लिए लोकप्रिय गंतव्य हैं।

भारत: दुनिया भर के रोगियों को आकर्षित करते हुए भारत चिकित्सा पर्यटन उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है। यह कार्डियक सर्जरी, आर्थोपेडिक प्रक्रियाओं और अंग प्रत्यारोपण सहित चिकित्सा उपचार और प्रक्रियाओं की एक विविध श्रेणी प्रदान करता है। भारत अपने अत्यधिक कुशल डॉक्टरों, अत्याधुनिक अस्पतालों और लागत प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जाना जाता है।

मेक्सिको: मेक्सिको ने चिकित्सा पर्यटन के लिए एक उभरते हुए गंतव्य के रूप में लोकप्रियता हासिल की है, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के रोगियों के लिए। यह दंत चिकित्सा उपचार, कॉस्मेटिक सर्जरी और बेरियाट्रिक सर्जरी सहित कई सस्ती चिकित्सा प्रक्रियाएं प्रदान करता है। तिजुआना, कैनकन और मैक्सिको सिटी जैसे शहर चिकित्सा पर्यटकों के लिए लोकप्रिय विकल्प हैं।

तुर्की: तुर्की ने अपने स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश किया है और चिकित्सा पर्यटन के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य बन गया है। यह हेयर ट्रांसप्लांटेशन, कॉस्मेटिक सर्जरी, प्रजनन उपचार और आंखों की सर्जरी सहित चिकित्सा प्रक्रियाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है। इस्तांबुल और एंटाल्या चिकित्सा पर्यटकों के लिए लोकप्रिय शहर हैं।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई): संयुक्त अरब अमीरात, विशेष रूप से दुबई, मध्य पूर्व में चिकित्सा पर्यटन के लिए एक केंद्र के रूप में उभरा है। यह अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, उन्नत उपचार और एक शानदार स्वास्थ्य सेवा अनुभव प्रदान करता है। दुबई कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण सर्जरी, कल्याण उपचार और उन्नत चिकित्सा जांच में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।

दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरिया ने अपनी उन्नत स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकी और कुशल चिकित्सा पेशेवरों के लिए मान्यता प्राप्त की है। यह कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जरी, त्वचा संबंधी उपचार और स्टेम सेल थेरेपी जैसी विशेष प्रक्रियाओं के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है। सियोल दक्षिण कोरिया में चिकित्सा पर्यटन के लिए प्राथमिक शहर है।

ये चिकित्सा पर्यटन के लिए उभरते स्थलों के कुछ उदाहरण हैं। कोस्टा रिका, कोलंबिया, ब्राजील, पोलैंड और हंगरी जैसे अन्य देश भी अपने किफायती स्वास्थ्य विकल्पों और गुणवत्ता सेवाओं के साथ चिकित्सा पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। चिकित्सा पर्यटन पर विचार करने वाले व्यक्तियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे कोई भी निर्णय लेने से पहले गंतव्य और चिकित्सा प्रदाताओं की सुविधाओं, विशेषज्ञता और प्रतिष्ठा का पूरी तरह से शोध और मूल्यांकन करें।

मेडिकल टूरिज्म डेस्टिनेशन चुनने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

जबकि चिकित्सा पर्यटन समय और धन की बचत करता है, लोगों को चिकित्सा सुविधा का चयन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। आसान इंटरनेट पहुंच के साथ, उपचार के विकल्पों की योजना बनाने से पहले डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करना संभव हो गया है। जबकि चिकित्सा पर्यटन गुणवत्ता और लागत प्रभावी स्वास्थ्य देखभाल विकल्पों की पेशकश कर सकता है, व्यक्तियों के लिए सुरक्षा से संबंधित निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है:

हेल्थकेयर सुविधा का विकल्प: उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल प्रदान करने के ट्रैक रिकॉर्ड के साथ अनुसंधान करें और एक प्रतिष्ठित स्वास्थ्य सुविधा का चयन करें। सुविधा के मानकों और प्रतिष्ठा का आकलन करने के लिए प्रमाणन, मान्यता और रोगी समीक्षा देखें। संयुक्त आयोग इंटरनेशनल (JCI) या मानकीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन (ISO) जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संगठनों से मान्यता उच्च स्तर की सुरक्षा और गुणवत्ता का संकेत दे सकती है।

चिकित्सा पेशेवरों की योग्यता: प्रक्रिया में शामिल होने वाले चिकित्सा पेशेवरों की योग्यता, अनुभव और साख की पुष्टि करें। सुनिश्चित करें कि उन्हें ठीक से लाइसेंस दिया गया है और आपके लिए आवश्यक विशिष्ट उपचार या प्रक्रिया में विशेषज्ञता है।

संचार और भाषा बाधा: चिकित्सा उपचार में प्रभावी संचार महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ प्रभावी ढंग से संवाद कर सकते हैं और प्रदान की गई जानकारी को समझ सकते हैं। भाषा अवरोध संभावित रूप से सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए यदि आवश्यक हो तो दुभाषियों या अनुवादकों का उपयोग करने पर विचार करें।

यात्रा-पूर्व तैयारी: चिकित्सा पर्यटन शुरू करने से पहले, यात्रा के लिए अपनी उपयुक्तता और विशिष्ट प्रक्रिया का आकलन करने के लिए अपने स्थानीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करें। प्रक्रिया आपके लिए सुरक्षित है यह सुनिश्चित करने के लिए अपना चिकित्सा इतिहास, पिछले उपचार, और किसी भी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को साझा करें। उचित देखभाल प्राप्त करने के लिए अपनी चिकित्सा पृष्ठभूमि के बारे में पारदर्शी होना महत्वपूर्ण है।

पोस्ट-प्रोसीजर केयर: पोस्ट-प्रोसीजर केयर और फॉलो-अप अपॉइंटमेंट्स की उपलब्धता और पहुंच पर विचार करें। अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ अपेक्षित पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया, संभावित जटिलताओं और किसी भी आवश्यक अनुवर्ती उपचार पर चर्चा करें।

यात्रा और आवास: परिवहन, आवास और बीमा कवरेज सहित यात्रा रसद को ध्यान में रखें। सुनिश्चित करें कि प्रक्रिया के दौरान या बाद में उत्पन्न होने वाली किसी भी आपात स्थिति या जटिलताओं के लिए आपके पास एक स्पष्ट योजना है।

चिकित्सा मानक और विनियम: प्रदान किए गए पर्यवेक्षण और रोगी सुरक्षा के स्तर को समझने के लिए गंतव्य देश के चिकित्सा मानकों और विनियमों पर शोध करें। उन देशों की तलाश करें जिनके पास अच्छी तरह से स्थापित स्वास्थ्य देखभाल नियम हैं और रोगी सुरक्षा के लिए सख्त मानकों को लागू करते हैं।

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