सोने और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट (Gold Price Declines Today), 22Karat सोना 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम
सोना बाज़ार
सोने की कीमतों में शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। मजबूत डॉलर, अमेरिकी मुद्रास्फीति में अप्रत्याशित वृद्धि और फेडरल रिजर्व द्वारा इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से समर्थन मिला, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम विस्तार को लेकर हुई प्रगति ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। ऐसे माहौल में सोना एक ओर मुद्रास्फीति से सुरक्षा का साधन बना हुआ है, जबकि दूसरी ओर उच्च ब्याज दरों की आशंकाएं इसकी तेजी को सीमित कर रही हैं।
शुक्रवार, 29 मई को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। हाल के सत्रों में मजबूत प्रदर्शन के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना।
सुबह लगभग 9:10 बजे, एमसीएक्स गोल्ड जून फ्यूचर्स 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,56,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स 0.38 प्रतिशत फिसलकर 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद कुछ निवेशकों ने अपनी होल्डिंग्स में लाभ सुरक्षित करने का निर्णय लिया, जिससे कीमतों पर दबाव बना।
सोने की कीमतों पर दबाव डालने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक अमेरिकी डॉलर की मजबूती रहा। डॉलर इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की मांग बढ़ी और सोने की आकर्षण क्षमता कुछ हद तक कम हुई।
परंपरागत रूप से देखा जाए तो जब डॉलर मजबूत होता है, तब सोना अन्य मुद्राओं में निवेश करने वाले खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक मांग और कीमतों पर पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिकी मुद्रास्फीति के नए आंकड़ों ने भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशक अब यह आकलन कर रहे हैं कि बढ़ती महंगाई के जवाब में अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगामी महीनों में किस प्रकार की मौद्रिक नीति अपनाएगा।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स अप्रैल में साल-दर-साल आधार पर 3.8 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि मई 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर मानी जा रही है।
PCE इंडेक्स को अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक मानता है। इसलिए इस आंकड़े में तेज उछाल ने बाजार सहभागियों के बीच यह धारणा मजबूत कर दी है कि फेड इस वर्ष ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है।
उच्च ब्याज दरें सामान्यतः सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि सोना कोई ब्याज या लाभांश नहीं देता। जब सरकारी बॉन्ड और अन्य ब्याज आधारित निवेश अधिक आकर्षक रिटर्न प्रदान करते हैं, तब निवेशकों का झुकाव उन परिसंपत्तियों की ओर बढ़ जाता है।
मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद अब निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति बैठकों पर केंद्रित है।
ऊर्जा कीमतों में हालिया मजबूती और कच्चे तेल के ऊंचे स्तरों ने भी मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो उपभोक्ता मूल्य दबाव और अधिक बढ़ सकते हैं, जिससे फेड को ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या अतिरिक्त वृद्धि पर विचार करना पड़ सकता है।
यह स्थिति सोने के लिए मिश्रित संकेत प्रस्तुत करती है। एक ओर महंगाई से बचाव के रूप में इसकी मांग बनी रहती है, जबकि दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों का जोखिम इसकी तेजी को सीमित करता है।
जहां घरेलू बाजारों में सोने पर दबाव दिखाई दिया, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तस्वीर कुछ अलग रही।
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों को उस समय समर्थन मिला जब अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व तनाव को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति की खबरें सामने आईं। दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्षविराम को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में नई सहमति बनने की सूचना ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।
इन घटनाक्रमों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मजबूत हुआ और लगभग 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
यह बढ़त ऐसे समय आई जब इससे पहले सत्र के दौरान सोना दो महीनों के निचले स्तर तक फिसल गया था। उस समय हवाई हमलों की घटनाओं ने शांति वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी।
बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया का एक प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम विस्तार को लेकर हुई सहमति रही।
जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों ने 60 दिनों के लिए संघर्षविराम बढ़ाने और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की वार्ताओं की शुरुआत करने पर सहमति बनाई है।
यह समझौता ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में जारी तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों और निवेशकों की जोखिम धारणा को प्रभावित कर रहा था। संघर्षविराम के विस्तार ने क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीदों को मजबूत किया है, जिससे वित्तीय बाजारों में कुछ राहत देखने को मिली।
हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, लेकिन वार्ता की दिशा में बढ़ते कदम निवेशकों को यह संकेत दे रहे हैं कि निकट भविष्य में तनाव में और कमी आ सकती है।
वर्तमान परिदृश्य में सोने का बाजार दो विपरीत शक्तियों के बीच संतुलन साधता दिखाई दे रहा है।
एक ओर, उच्च मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक जोखिम और आर्थिक अनिश्चितताएं सोने की सुरक्षित निवेश परिसंपत्ति के रूप में मांग को समर्थन दे रही हैं।
दूसरी ओर, मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर वृद्धि सोने की कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं।
निवेशकों के लिए आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेड अधिकारियों के बयान और मध्य पूर्व से जुड़ी नई खबरें सोने की अगली दिशा निर्धारित कर सकती हैं। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद, सोना वैश्विक वित्तीय प्रणाली में जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो विविधीकरण के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अपनी भूमिका बनाए हुए है।
