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प्रभुदास लीलाधर ने बजाज फाइनेंस को BUY रेटिंग में अपग्रेड किया, Bajaj Finance Share Price Target at Rs 1,100

प्रभुदास लीलाधर ने बजाज फाइनेंस की रेटिंग को ACCUMULATE से BUY में अपग्रेड कर दिया है, और मौजूदा बाजार मूल्य Rs 930 के मुकाबले संशोधित लक्ष्य मूल्य Rs 1,100 निर्धारित किया है। ब्रोकरेज ने FY27 के लिए 23% AUM वृद्धि का मजबूत अनुमान जताया है, जो गोल्ड लोन, माइक्रोफाइनेंस और ट्रैक्टर फाइनेंसिंग में विस्तार तथा MSME सेगमेंट में सुधार से प्रेरित होगा। एसेट क्वालिटी मेट्रिक्स में सुधार हुआ है, और क्रेडिट कॉस्ट 1.45% से 1.60% के बीच सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि बॉन्ड यील्ड्स में तेजी से नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव है, कंपनी की FINAL ट्रांसफॉर्मेशन पहल से परिचालन दक्षता मार्जिन दबावों को संतुलित करेगी।

रेटिंग अपग्रेड और संशोधित लक्ष्य मूल्य

प्रभुदास लीलाधर ने बजाज फाइनेंस पर अपना रुख ACCUMULATE से BUY में बदल दिया है, जो इस गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी की विकास गति में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। लक्ष्य मूल्य को Rs 1,100 तक बढ़ाया गया है, जो मौजूदा Rs 930 के ट्रेडिंग स्तर से लगभग 18% की उछाल की संभावना दर्शाता है।

यह वैल्यूएशन 4.1x के प्राइस-टू-एडजस्टेड बुक वैल्यू मल्टीपल पर आधारित है, जो पहले के 3.9x से अधिक है, और कंपनी की कमाई की गति तथा बैलेंस शीट की मजबूती में विश्वास को प्रदर्शित करता है।

AUM वृद्धि: नए वर्टिकल्स से विस्तार

Q4FY26 में एसेट्स अंडर मैनेजमेंट में 22% की सालाना वृद्धि होकर Rs 5,099.8 बिलियन हो गया, जो मॉर्गेज (+25.2% YoY), अर्बन सेल्स फाइनेंस (+28.6% YoY), और अर्बन B2C लेंडिंग (+19.1% YoY) में मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित था। कंपनी की नए बिजनेस वर्टिकल्स की ओर रणनीतिक दिशा फलदायी साबित हो रही है:

  • गोल्ड लोन से FY27 तक कुल AUM का लगभग 5% योगदान अपेक्षित है, जो आक्रामक ब्रांच विस्तार से समर्थित है।
  • माइक्रोफाइनेंस और ट्रैक्टर फाइनेंसिंग सेगमेंट में मजबूत गति देखी जा रही है।
  • नए प्रोडक्ट लॉन्च अब AUM मिक्स में 3.5% का योगदान दे रहे हैं।

ब्रोकरेज ने FY27 में 23% और FY28 में 22% AUM वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो FY27 की दूसरी छमाही में MSME सेगमेंट में अपेक्षित सुधार से प्रेरित होगा।

ग्राहक फ्रेंचाइजी: तेज अधिग्रहण

बजाज फाइनेंस ने Q4FY26 में 3.9 मिलियन नए ग्राहक जोड़े, जिससे कुल ग्राहक आधार बढ़कर प्रभावशाली 119.3 मिलियन हो गया। तिमाही के दौरान बुक किए गए नए लोन 20.5% सालाना बढ़कर 12.9 मिलियन हो गए।

मैनेजमेंट ने FY27 में 15 से 17 मिलियन नए ग्राहक जोड़ने का लक्ष्य रखा है, जो भारत के विविध वित्तीय परिदृश्य में कंपनी की रिटेल उपस्थिति को गहरा करने की महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करता है।

नेट इंटरेस्ट मार्जिन: मामूली संकुचन अपेक्षित

Q4FY26 में नेट इंटरेस्ट इनकम में 20.1% की सालाना वृद्धि हुई, हालांकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन पिछली तिमाही के 9.7% से घटकर 9.6% हो गया। ब्रोकरेज FY27 में लगभग 10 बेसिस पॉइंट्स की और NIM संकुचन की उम्मीद करता है, जिसके कारण हैं:

  • बॉन्ड यील्ड्स में तेजी से फंड की लागत पर ऊपरी दबाव।
  • रिपोर्टेड कॉस्ट ऑफ फंड्स 7.41% रहा, जो Q3FY26 के 7.45% से मामूली सुधार है।

इन चुनौतियों के बावजूद, नॉन-इंटरेस्ट इनकम में 16% से 18% की वृद्धि का अनुमान है, जो मार्जिन दबावों को संतुलित करेगी।

क्रेडिट कॉस्ट: अनुकूल दृष्टिकोण

एसेट क्वालिटी मेट्रिक्स में उल्लेखनीय सुधार दिखा, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स Q3FY26 के 1.21% से घटकर 1.03% हो गए, और नेट NPA 0.47% से घटकर 0.41% हो गए। प्रोविजन कवरेज रेश्यो 60% पर मजबूत बना रहा।

प्रमुख एसेट क्वालिटी आंकड़े:

  • GNPA (Q3FY26): 1.21%
  • GNPA (Q4FY26): 1.03%
  • NNPA (Q3FY26): 0.47%
  • NNPA (Q4FY26): 0.41%
  • PCR (Q3FY26): 61.3%
  • PCR (Q4FY26): 59.7%

मैनेजमेंट ने FY27 के लिए क्रेडिट कॉस्ट 1.45% से 1.60% की सीमा में रहने का मार्गदर्शन दिया है, जो विंटेज क्रेडिट परफॉर्मेंस में सुधार और कैप्टिव टू-व्हीलर तथा थ्री-व्हीलर फाइनेंस पोर्टफोलियो के समापन से समर्थित है, जो अब AUM का 1% से भी कम है।

परिचालन दक्षता: FINAL ट्रांसफॉर्मेशन से लाभ

FY26 में कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो 33.8% पर ऊंचा रहा, जो नए श्रम संहिता के कार्यान्वयन और गोल्ड लोन ब्रांच विस्तार में तेजी से प्रेरित था। हालांकि, कंपनी की FINAL ट्रांसफॉर्मेशन पहल—परिचालन का एक व्यापक AI-संचालित पुनर्निर्माण—FY27 में 25 से 40 बेसिस पॉइंट्स की दक्षता लाभ देने के लिए तैयार है।

FINAL के तहत प्रमुख मील के पत्थर:

  • 27 स्वायत्त AI एजेंट्स की तैनाती, FY27 तक 600+ का लक्ष्य।
  • 99% बिजनेस रिक्वायरमेंट डॉक्यूमेंट्स अब AI द्वारा जनरेट हो रहे हैं।
  • ग्राहक इंगेजमेंट चैनलों पर वॉइस और टेक्स्ट AI बॉट्स लाइव हैं।

लाभप्रदता और रिटर्न रेश्यो

बजाज फाइनेंस ने Q4FY26 में Rs 55.5 बिलियन का टैक्स के बाद लाभ दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 22.2% अधिक है। ब्रोकरेज FY28 तक रिटर्न ऑन एसेट्स 4.3% और रिटर्न ऑन इक्विटी 21.2% का अनुमान लगाता है, जो अनुशासित पूंजी आवंटन और परिचालन उत्कृष्टता को दर्शाता है।

प्रमुख लाभप्रदता अनुमान:

  • PAT FY26: Rs 193,324 मिलियन
  • PAT FY27E: Rs 257,709 मिलियन
  • PAT FY28E: Rs 327,060 मिलियन
  • RoA FY26: 3.8%
  • RoA FY27E: 4.2%
  • RoA FY28E: 4.3%
  • RoE FY26: 17.9%
  • RoE FY27E: 20.1%
  • RoE FY28E: 21.2%

निवेशकों के लिए प्रमुख स्तर

निवेशक निम्नलिखित तकनीकी और मौलिक संदर्भ बिंदुओं पर विचार कर सकते हैं:

  • मौजूदा बाजार मूल्य: Rs 930
  • लक्ष्य मूल्य: Rs 1,100
  • 52-सप्ताह उच्च: Rs 1,102
  • 52-सप्ताह निम्न: Rs 787
  • P/E (FY28E): 17.7x
  • P/ABV (FY28E): 3.5x

निवेश थीसिस: अभी क्यों खरीदें?

अपग्रेड का समर्थन करने वाले कारकों का संगम:

  1. मॉर्गेज, गोल्ड और माइक्रोफाइनेंस में फैले विविध AUM विकास इंजन।
  2. लेगेसी स्ट्रेस्ड पोर्टफोलियो के समापन से क्रेडिट कॉस्ट ट्रैजेक्टरी में सुधार।
  3. FINAL पहलों से टेक्नोलॉजी-आधारित परिचालन दक्षता।
  4. 21.6% पर मजबूत कैपिटल एडेक्वेसी, जो विकास के लिए जगह प्रदान करती है।
  5. ग्राहक अधिग्रहण और क्रॉस-सेलिंग का सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड।

निगरानी योग्य जोखिम: लगातार NIM संकुचन, अपेक्षा से धीमी MSME रिकवरी, और उपभोक्ता क्रेडिट मांग को प्रभावित करने वाली मैक्रोइकोनॉमिक बाधाएं।

निष्कर्ष

प्रभुदास लीलाधर का अपग्रेड बजाज फाइनेंस की मार्जिन चुनौतियों से निपटने और नए विकास वर्टिकल्स का लाभ उठाने की क्षमता में विश्वास को दर्शाता है। Rs 1,100 के लक्ष्य मूल्य और सुधरती एसेट क्वालिटी के साथ, यह स्टॉक भारत के कंज्यूमर फाइनेंस सेक्टर में एक्सपोजर चाहने वाले निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर प्रस्तुत करता है।

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अर्थव्यवस्था फ़ैशन भारत

महंगे सोने के दौर में बदलती भारत की सोच: निवेश बनाम फैशन का नया युग

भारत में सोने के प्रति आकर्षण कमजोर नहीं पड़ा है—बल्कि यह एक गहरे परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। हाल के वर्षों में सोने की कीमतों में तेज़ उछाल, जो 2026 में कुछ बाजारों में लगभग Rs 1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, ने उपभोक्ता व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है। पारंपरिक ज्वेलरी की मांग में गिरावट आई है, जबकि निवेश की मांग मजबूत बनी हुई है। उपभोक्ता अब हल्के गहनों, निवेश विकल्पों और गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव एक बड़े संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है—जहां सोना एक निवेश संपत्ति बन रहा है और नकली ज्वेलरी एक लाइफस्टाइल उत्पाद।

सोने की कीमतों में उछाल और घटती ज्वेलरी मांग

भारत में सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने पारंपरिक खपत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। 2026 में कीमतें लगभग Rs 1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गईं, जिससे आम उपभोक्ता की पहुंच से सोना दूर होता जा रहा है। इसका सीधा असर मांग पर पड़ा है। 2025 में ज्वेलरी की मांग में लगभग 24% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह गिरावट 40–50% तक पहुंच गई। यहां तक कि अक्षय तृतीया जैसे पारंपरिक खरीदारी के अवसरों पर भी वॉल्यूम घटे, हालांकि कुल खर्च का मूल्य ऊंचा बना रहा। स्पष्ट है कि मांग खत्म नहीं हुई है—बल्कि खरीदने की क्षमता कम हो गई है।

उपभोक्ता का बदलता व्यवहार: नए विकल्पों की ओर रुख

महंगाई के दबाव के बीच उपभोक्ता अपने खरीद व्यवहार को बदल रहे हैं। कम शुद्धता और हल्के गहनों की ओर झुकाव तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक 22 कैरेट सोने की जगह अब 14K और 9K ज्वेलरी लोकप्रिय हो रही है। इसी के साथ लाइटवेट ज्वेलरी ब्रांड लगभग 30% सालाना की दर से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, उपभोक्ता अब गहनों के बजाय कॉइन्स, बार्स और ETFs जैसे निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव एक अलग दिशा में हो रहा है।

गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी का उभार: एक बड़ा बदलाव

भारत का आर्टिफिशियल और गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है। 2025 में इसका आकार लगभग $5 बिलियन था, जो आगे चलकर $11.7 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है, और यह लगभग 10% CAGR से बढ़ रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं: 1. कीमत का अंतर: असली सोना अब बहुत महंगा हो गया है, जबकि गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी कम कीमत में वही लुक देती है। 2. अवसर आधारित खरीदारी: शादी, त्योहार और सामाजिक आयोजनों में “गोल्ड लुक” जरूरी है, लेकिन उपभोक्ता अब स्थायी निवेश के बजाय अस्थायी उपयोग को प्राथमिकता देते हैं। 3. फास्ट फैशन का प्रभाव: भारत की 65% आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है, जो ट्रेंड, विविधता और बार-बार स्टाइल बदलने को प्राथमिकता देती है। 4. टियर 2 और 3 शहरों में बढ़ती मांग: बढ़ती आकांक्षाएं और सीमित बजट के कारण ये बाजार तेजी से इस सेगमेंट को अपना रहे हैं।

संस्कृति में बदलाव: निवेश और लाइफस्टाइल का अलगाव

अब सोने की भूमिका दो हिस्सों में बंट रही है:

पुराना भारतनया भारत
सोना = गहना + संपत्तिसोना = निवेश
भारी गहनेहल्के या नकली गहने
जीवनभर की खरीदअवसर आधारित खरीद
लॉकर में संग्रहसोशल/दिखावे के लिए उपयोग

अब असली सोना निवेश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नकली ज्वेलरी फैशन और लाइफस्टाइल का हिस्सा बन रही है

इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया: बदलते बाजार के साथ तालमेल

ज्वेलरी इंडस्ट्री भी इस बदलाव को समझते हुए अपने मॉडल को बदल रही है। पारंपरिक ज्वेलर्स अब कम कीमत और हल्के गहनों की नई रेंज लॉन्च कर रहे हैं। वहीं, खरीदारी का आकार भी छोटा हो रहा है—0.25 ग्राम तक की यूनिट्स लोकप्रिय हो रही हैं। इसके साथ ही सिल्वर और अन्य विकल्पों की मांग बढ़ रही है। आर्टिफिशियल ज्वेलरी ब्रांड जैसे GIVA Jewellery तेजी से बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं।

मनोवैज्ञानिक बदलाव: “दिखावा” बनाम “मालिकाना हक”

यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं है—यह मनोवैज्ञानिक भी है। समाज में अमीर दिखने का दबाव बना हुआ है, लेकिन उसे हासिल करने का तरीका बदल गया है। अब लोगों के लिए सोने का दिखना ज्यादा महत्वपूर्ण है, न कि उसे वास्तव में खरीदना। यह ट्रेंड अन्य क्षेत्रों में भी दिखता है: लग्ज़री फैशन की कॉपी लैब-ग्रोउन डायमंड्स रेंटल फैशन इन सभी में एक समान बात है—आकांक्षा बिना स्वामित्व

निवेशकों के लिए संकेत

इस बदलाव के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं: सोने में निवेश की मांग मजबूत बनी रहेगी, लेकिन पारंपरिक ज्वेलरी की मांग पर दबाव बना रहेगा। सबसे बड़ा अवसर आर्टिफिशियल ज्वेलरी में है, जहां: यह सेगमेंट अब विकल्प नहीं, मुख्य श्रेणी बन रहा है युवा उपभोक्ता मांग को आगे बढ़ाएंगे डिजिटल और ब्रांडिंग रणनीति निर्णायक होगी

निष्कर्ष: बदलता हुआ बाजार, खत्म नहीं होता आकर्षण

भारत में सोने का महत्व खत्म नहीं हुआ है—यह बदल रहा है। निवेश की मांग बढ़ रही है, पारंपरिक ज्वेलरी घट रही है, और गोल्ड-प्लेटेड ज्वेलरी तेजी से बढ़ रही है। यह केवल अस्थायी बदलाव नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक संरचनात्मक परिवर्तन है, जो कीमत, जनसांख्यिकी और उपभोक्ता सोच से प्रेरित है। आने वाले समय में भारत का गोल्ड मार्केट इस बात से तय होगा कि लोग कितना सोना खरीदते हैं—नहीं, बल्कि इस बात से कि वे उसे कैसे उपयोग करते हैं।

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अमेरिका अर्थव्यवस्था क्रिप्टोकरेंसी

रिपल (XRP Cryptocurrency)और थ्यूनेस की रणनीतिक साझेदारी का नया चरण

रिपल और थ्यूनेस के बीच विस्तारित साझेदारी ग्लोबल पेमेंट्स में एक नया अध्याय शुरू कर रही है। यह सहयोग ब्लॉकचेन तकनीक को पारंपरिक भुगतान नेटवर्क के साथ मिलाकर 90 से अधिक बाजारों में तेज़ और सस्ते क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसफर प्रदान करने का लक्ष्य रखता है। यह रणनीति विशेष रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है जहां मोबाइल वॉलेट वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का मुख्य साधन हैं। दोनों कंपनियां मिलकर अंतर्राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली को सरल, पारदर्शी और अधिक किफायती बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।

रिपल और थ्यूनेस की रणनीतिक साझेदारी का नया चरण

अमेरिकी ब्लॉकचेन कंपनी रिपल ने सिंगापुर स्थित पेमेंट्स कंपनी थ्यूनेस के साथ अपनी साझेदारी को एक नई दिशा दी है। यह सहयोग, जो 2020 में शुरू हुआ था, अब एक व्यापक रूप धारण कर रहा है। दोनों कंपनियों का उद्देश्य ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर और भुगतान नेटवर्क को मिलाकर अंतर्राष्ट्रीय मनी ट्रांसफर की गुणवत्ता में सुधार लाना है। यह पहल 90 से अधिक वैश्विक बाजारों को लक्षित करती है, जहां विकसित और विकासशील दोनों प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं में तेज़ और कम लागत वाले क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन की बढ़ती मांग को पूरा करने का प्रयास है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी वैश्विक भुगतान उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स में विस्तार की रणनीति

थ्यूनेस अपने “स्मार्ट सुपरहाईवे” के माध्यम से बैंकों, वॉलेट्स और कार्ड प्रदाताओं को जोड़ने का काम करता है। कंपनी रिपल के साथ अपने सहयोग को बढ़ाकर तरलता प्रबंधन और सेटलमेंट दक्षता में सुधार लाने पर ध्यान दे रही है। अंतर्राष्ट्रीय मनी ट्रांसफर अभी भी खंडित और महंगा है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां बैंकिंग सेवाएं सीमित हैं। दोनों कंपनियां रिपल की ब्लॉकचेन तकनीक को थ्यूनेस के डायरेक्ट ग्लोबल नेटवर्क के साथ मिलाकर भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास कर रही हैं। रिपल की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पेमेंट प्लेटफॉर्म ने 70 बिलियन डॉलर से अधिक का वॉल्यूम प्रोसेस किया है। कंपनी पारदर्शिता, गति और नियामक निरीक्षण के लिए ब्लॉकचेन टूल्स को बढ़ावा देती है।

स्मार्टएक्स ट्रेजरी सिस्टम का एकीकरण

इस समझौते का एक मुख्य घटक रिपल का थ्यूनेस के स्मार्टएक्स ट्रेजरी सिस्टम के साथ एकीकरण है। यह प्लेटफॉर्म अपने नेटवर्क में तरलता प्रवाह का प्रबंधन करता है। इस जोड़ से स्थानीय मुद्राओं में पेआउट की सुविधा मिलती है, जो उन बाजारों के लिए आवश्यक है जहां मोबाइल वॉलेट वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का मुख्य साधन हैं। एम-पेसा, जीकैश और वीचैट पे जैसे प्लेटफॉर्म उन अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहते हैं जहां बैंकिंग कवरेज सीमित है। यह एकीकरण विशेष रूप से उभरते बाजारों में महत्वपूर्ण है, जहां 3 बिलियन मोबाइल वॉलेट्स का उपयोग हो रहा है।

नियामक अनुपालन पर रिपल का फोकस

रिपल ने अपने आप को अन्य ब्लॉकचेन कंपनियों से अलग करने के लिए अनुपालन पर जोर दिया है। कंपनी प्रूफ-ऑफ-रिजर्व रिपोर्ट प्रकाशित करती है और स्वतंत्र ऑडिट कराती है। ये उपाय डिजिटल एसेट बाजारों में बढ़े-चढ़े वॉल्यूम की चिंताओं को दूर करने के लिए किए जाते हैं। यह दृष्टिकोण कंपनी को वैश्विक नियामक वातावरण में बेहतर स्थिति प्रदान करता है, जहां सरकारें और केंद्रीय बैंक क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन तकनीक के नियमन को लेकर अधिक सख्त हो रहे हैं।

थ्यूनेस का वैश्विक नेटवर्क

थ्यूनेस अपनी वेबसाइट पर खुद को एक स्वामित्व वाला वैश्विक भुगतान नेटवर्क ऑपरेटर के रूप में प्रस्तुत करता है जो 130 से अधिक देशों, 80 से अधिक मुद्राओं, 3 बिलियन मोबाइल वॉलेट्स और 4 बिलियन बैंक खातों को जोड़ता है। कंपनी का कहना है कि यह व्यवसायों और उपभोक्ताओं को किसी भी भुगतान विधि के माध्यम से तुरंत क्रॉस-बॉर्डर भुगतान भेजने और स्वीकार करने में सक्षम बनाता है। यह व्यापक नेटवर्क कवरेज थ्यूनेस को वैश्विक भुगतान बाजार में एक प्रभावशाली स्थिति प्रदान करता है, जहां कंपनी विभिन्न वित्तीय सेवा प्रदाताओं के बीच सेतु का काम करती है।

उद्योग के व्यापक रुझान

विस्तारित सहयोग एक व्यापक उद्योग प्रवृत्ति को उजागर करता है। कंपनियां अब ब्लॉकचेन नवाचार को पारंपरिक वित्त के नियामक ढांचे के साथ मिला रही हैं। यह साझेदारी व्यवसायों के लिए ट्रांसफर लागत कम कर सकती है और लेनदेन की गति में सुधार ला सकती है। उपभोक्ताओं के लिए, यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं तक सीमा पार पहुंच का विस्तार कर सकती है जहां पारंपरिक बैंकिंग सीमित रहती है। यह दृष्टिकोण वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाता है।

भविष्य की संभावनाएं और बाजार प्रभाव

रिपल और थ्यूनेस के बीच यह विस्तारित साझेदारी वैश्विक भुगतान उद्योग में एक नया मानदंड स्थापित कर सकती है। ब्लॉकचेन तकनीक और पारंपरिक भुगतान नेटवर्क का यह संयोजन दिखाता है कि कैसे फिनटेक कंपनियां नियामक चुनौतियों को पार करते हुए नवाचार कर सकती हैं। यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक रेमिटेंस बाजार तेजी से बढ़ रहा है। विश्व बैंक के अनुसार, वैश्विक रेमिटेंस फ्लो में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो इस प्रकार के समाधानों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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UAE अर्थव्यवस्था

RAK Properties और Hubpay की क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट की शुरुआत: UAE

संयुक्त अरब अमीरात की प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर RAK Properties ने अपनी संपत्तियों के लिए क्रिप्टोकरेंसी भुगतान स्वीकार करना शुरू कर दिया है। यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी Bitcoin, Ethereum और Tether के भुगतान स्वीकार कर रही है। वित्तीय विशेषज्ञ इसे UAE के रियल एस्टेट सेक्टर में डिजिटल परिवर्तन का महत्वपूर्ण चरण मान रहे हैं।

UAE की सबसे बड़ी डेवलपर कंपनी का डिजिटल करेंसी में कदम

संयुक्त अरब अमीरात के शेयर बाजार में सूचीबद्ध सबसे प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनियों में से एक, RAK Properties ने अपने आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए क्रिप्टोकरेंसी भुगतान की सुविधा शुरू की है। यह एक ऐसा कदम है जो न केवल UAE के रियल एस्टेट बाजार में तकनीकी नवाचार का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसर भी खोलता है। कंपनी के प्रबंधन द्वारा लिया गया यह निर्णय विशेष रूप से उन अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों को लक्षित करता है जो डिजिटल संपत्तियों में निवेश करने में सहज हैं। Bitcoin, Ethereum और Tether जैसी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी को स्वीकार करके, RAK Properties ने अपने ग्राहक आधार का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

Hubpay के साथ रणनीतिक साझेदारी

इस पहल को सफल बनाने के लिए RAK Properties ने Hubpay के साथ साझेदारी की है, जो एक विनियमित फिनटेक कंपनी है। यह व्यवस्था विशेष रूप से इस प्रकार से डिज़ाइन की गई है कि डिजिटल संपत्तियों को तत्काल UAE दिरहम में परिवर्तित कर दिया जाता है और फिर डेवलपर के खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता है। Abu Dhabi Global Market के तहत लाइसेंस प्राप्त Hubpay का बुनियादी ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि क्रिप्टो भुगतान सुरक्षित रूप से प्रोसेस हों। इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि RAK Properties को अस्थिर डिजिटल टोकन्स को अपनी बुक्स में रखने का जोखिम नहीं उठाना पड़ता। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह सेटअप विदेशी खरीदारों के लिए विकल्पों का विस्तार करने का एक स्मार्ट तरीका है, बिना कंपनी को अतिरिक्त जोखिम में डाले। यह रणनीति विशेष रूप से उन निवेशकों के लिए आकर्षक है जो पारंपरिक बैंकिंग प्रक्रियाओं की जटिलताओं से बचना चाहते हैं।

Mina Al Arab परियोजना: विकास की नई दिशा

RAK Properties वर्तमान में अपने प्रमुख प्रोजेक्ट Mina Al Arab waterfront community का विकास कर रही है। कंपनी की योजनाओं के अनुसार, 800 से अधिक यूनिट्स इस वर्ष के अंत तक डिलीवर होने की उम्मीद है। यह परियोजना RAK Properties की महत्वाकांक्षी विकास रणनीति का केंद्रबिंदु है। कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी राहुल जोगानी के अनुसार, यह दृष्टिकोण “डिजिटल और निवेश समझदार” ग्राहकों को आकर्षित करने के कंपनी के प्रयास के साथ तालमेल बिठाता है। यह रणनीति विशेष रूप से उन अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए डिज़ाइन की गई है जो तकनीकी रूप से उन्नत भुगतान विधियों को प्राथमिकता देते हैं।

वित्तीय प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि

RAK Properties की वित्तीय रिपोर्ट कंपनी की मजबूत वृद्धि योजनाओं को प्रमाणित करती है। 2025 की पहली छमाही में कंपनी ने AED 160 मिलियन का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 80% की वृद्धि दर्शाता है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग AED 4.7 बिलियन है, जो लगभग $1.3 बिलियन के बराबर है। कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि यह वृद्धि Ras Al Khaimah में मजबूत मांग और निवेशक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों दोनों का परिणाम है। यह प्रभावशाली वित्तीय प्रदर्शन न केवल कंपनी की वर्तमान स्थिति को मजबूत करता है, बल्कि भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक पूंजी भी प्रदान करता है। निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि कंपनी सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

UAE रियल एस्टेट में क्रिप्टो का बढ़ता प्रभाव

RAK Properties का यह कदम UAE के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़े रुझान का हिस्सा है। DAMAC और Emaar जैसी प्रमुख डेवलपर कंपनियों ने पहले से ही Bitcoin भुगतान के विकल्प शुरू किए हैं। इसके अतिरिक्त, Dubai’s land authority ने क्रिप्टो-लिंक्ड प्रॉपर्टी डील्स को प्रोसेस करने के लिए भुगतान फर्मों के साथ कार्य किया है। RAK Properties का निर्णय Ras Al Khaimah को उन अमीरातों की सूची में जोड़ता है जो इस प्रथा के लिए खुल रहे हैं। यह व्यापक रुझान UAE की सरकार द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था को अपनाने की रणनीति के अनुकूल है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवृत्ति न केवल भुगतान की सुविधा में सुधार करती है, बल्कि UAE को वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी अपनाने में एक अग्रणी स्थान भी दिलाती है। यह रणनीति विशेष रूप से उन देशों के निवेशकों को आकर्षित करती है जहां पारंपरिक बैंकिंग प्रणालियां अधिक जटिल या समय लेने वाली हैं।

Vision 2030: रणनीतिक दृष्टिकोण

RAK Properties का Bitcoin लेनदेन में प्रवेश को Ras Al Khaimah’s Vision 2030 लक्ष्यों के एक हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। संपत्ति खरीदारी तक पहुंच रखने वाले निवेशकों के पूल को व्यापक बनाकर, अधिकारी अमीरात के आवास बाजार में अधिक विदेशी खरीदारों को आकर्षित करने की उम्मीद कर रहे हैं। यह दृष्टिकोण UAE की व्यापक आर्थिक विविधीकरण रणनीति के साथ पूर्ण तालमेल में है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी नवाचार और वैश्विक पहुंच के संयोजन से अमीरात की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। Vision 2030 के तहत, Ras Al Khaimah का लक्ष्य अपने आप को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। क्रिप्टोकरेंसी भुगतान की स्वीकृति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक सुविधाजनक और आकर्षक वातावरण बनाता है।

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महाराष्ट्र का $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य को भारत की पहली $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वाकांक्षा व्यक्त की है। उन्होंने पुणे में ‘एन्किजनिंग $1 ट्रिलियन महाराष्ट्र’ कार्यक्रम के दौरान कहा कि राज्य ने पहले ही आधे से अधिक लक्ष्य हासिल कर लिया है और 2028 से 2030 के बीच इसे पूरा कर सकता है। उन्होंने राज्य के युवाओं और उनकी क्षमता को इस लक्ष्य का मुख्य आधार बताया। महाराष्ट्र, सभी क्षेत्रों में अग्रणी बनकर, देश की प्रगति का प्रमुख इंजन बनने की दिशा में कार्यरत है।

महाराष्ट्र का $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री की दृष्टि
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र का उद्देश्य 2030 तक $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनना है। उन्होंने कहा, “पिछले साल हमने पहले ही आधा लक्ष्य पार कर लिया है। थोड़ी मेहनत के साथ, हम इसे 2028, 2029 या 2030 तक प्राप्त कर सकते हैं।”

अन्य राज्यों से आगे
फडणवीस ने दावा किया कि अन्य राज्य अभी महाराष्ट्र से काफी पीछे हैं और उन्हें इस स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा। महाराष्ट्र का नेतृत्व और उसकी युवा शक्ति इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

अर्थव्यवस्था का आधार: युवा और विविधता

युवाओं की भूमिका
मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं को इस लक्ष्य का मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा, “राज्य की युवा मानव शक्ति इस उपलब्धि में सबसे बड़ा योगदान देगी।”

सभी क्षेत्रों में विकास
महाराष्ट्र, कृषि, उद्योग, सेवा, और तकनीकी क्षेत्रों में समान रूप से उन्नति करते हुए 2029 तक देश का नंबर एक राज्य बनने की दिशा में कार्यरत है।

देश के लिए विकास का इंजन

राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि 2029 तक महाराष्ट्र हर क्षेत्र में अग्रणी बनकर देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक “ग्रोथ इंजन” की तरह काम करेगा। राज्य की विविधता और संसाधन इसे संभव बनाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा
महाराष्ट्र का यह लक्ष्य न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा, जिससे विदेशी निवेश और वैश्विक पहचान को बल मिलेगा।

निष्कर्ष: महाराष्ट्र की महत्वाकांक्षा

महाराष्ट्र की $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की यह दृष्टि राज्य के युवाओं, संसाधनों, और नेतृत्व क्षमता को उजागर करती है। महाराष्ट्र 2029 तक हर क्षेत्र में अग्रणी बनकर देश की प्रगति के पथ पर एक नई मिसाल कायम करेगा।

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कीस्टोन रियल्टर्स: मजबूत बिक्री और बढ़ते विकास के संकेत

कीस्टोन रियल्टर्स लिमिटेड ने दिसंबर तिमाही में बिक्री बुकिंग में 40% की वृद्धि दर्ज की है, जो ₹863 करोड़ तक पहुंच गई। कंपनी, जो अपने प्रोजेक्ट्स को रस्टमजी ब्रांड के तहत बेचती है, ने मजबूत हाउसिंग डिमांड के चलते यह वृद्धि देखी। अप्रैल-दिसंबर 2024-25 के दौरान, कंपनी की प्री-सेल्स ₹2,174 करोड़ तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में ₹1,423 करोड़ थी। कंपनी ने कहा है कि वह नए पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को हासिल करने और उन्हें प्रभावी ढंग से पूरा करने की अच्छी स्थिति में है।

दिसंबर तिमाही में प्री-सेल्स में 40% की वृद्धि

बिक्री बुकिंग का प्रदर्शन
कीस्टोन रियल्टर्स ने दिसंबर 2024 तिमाही में ₹863 करोड़ की बिक्री बुकिंग दर्ज की, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में ₹616 करोड़ थी। यह 40% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है।

नौ महीनों में प्री-सेल्स
अप्रैल-दिसंबर 2024-25 के दौरान, कंपनी की कुल प्री-सेल्स ₹2,174 करोड़ तक पहुंच गई, जो पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में ₹1,423 करोड़ थी।

प्रबंधन की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति

महत्वपूर्ण प्रगति
कीस्टोन रियल्टर्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, बोमन ईरानी ने कहा, “2024-25 की तीसरी तिमाही में हमने प्रमुख व्यावसायिक संकेतकों में प्रभावशाली वृद्धि देखी है।”

सालाना लक्ष्यों की ओर अग्रसर
ईरानी ने कहा कि कंपनी ने केवल 3 तिमाहियों में 2023-24 के प्री-सेल्स के लगभग समान स्तर को प्राप्त कर लिया है, जिससे यह संभावना बढ़ जाती है कि कंपनी वित्तीय वर्ष के लिए अपने प्री-सेल्स गाइडेंस को पूरा करेगी।

मुंबई में पुनर्विकास के अवसरों का लाभ उठाना

पुनर्विकास बाजार में अग्रणी भूमिका
ईरानी ने कहा, “मुंबई में पुनर्विकास के अवसर महत्वपूर्ण हैं, और इस क्षेत्र में अग्रणी खिलाड़ी के रूप में, हम वर्तमान गति का लाभ उठाने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार हैं।”

मजबूत वित्तीय स्थिति
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के पास एक मजबूत बैलेंस शीट है, जो इसे इन अवसरों को भुनाने और कुशलतापूर्वक नए प्रोजेक्ट्स को निष्पादित करने के लिए अच्छी स्थिति में रखती है।

निष्कर्ष: दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं

कीस्टोन रियल्टर्स ने तीसरी तिमाही में प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है और प्री-सेल्स लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है। कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और मुंबई के पुनर्विकास क्षेत्र में अग्रणी स्थिति इसे भविष्य में दीर्घकालिक सफलता की संभावना प्रदान करती है। निवेशकों और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए यह विकास उत्साहजनक संकेत देता है।

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एचएसएल प्राइम रिसर्च की प्रीमियम निवेशक सेवाएं

HDFC सिक्योरिटीज लिमिटेड (HSL) ने अपने खुदरा शोध डिवीजन को “HSL Prime Research” के रूप में पुनः ब्रांड किया है। यह कदम ग्राहकों को प्रीमियम निवेश अंतर्दृष्टि प्रदान करने और शोध क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह बदलाव 1 जनवरी, 2025 से प्रभावी होगा और इसके साथ ही देवरश वकील को HSL Prime Research के नए प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया है। यह निर्णय संगठन में प्रतिभा और करियर विकास को महत्व देने के दृष्टिकोण को दर्शाता है। कंपनी का कहना है कि HSL Prime Research ग्राहकों को व्यापक मौलिक और तकनीकी विश्लेषण के साथ उत्कृष्ट निवेश अवसर प्रदान करेगा।

HDFC सिक्योरिटीज ने “HSL Prime Research” लॉन्च किया

पुनः ब्रांडिंग का उद्देश्य HDFC सिक्योरिटीज ने “HSL Prime Research” नामक एक नए ब्रांड के तहत अपने खुदरा शोध डिवीजन को पुनः व्यवस्थित किया है। यह पहल ग्राहकों को अत्यधिक प्रासंगिक और मूल्यवान निवेश अंतर्दृष्टि प्रदान करने के लिए की गई है।
नई रणनीति का फोकस
“HSL Prime Research” का उद्देश्य निवेश के लिए मजबूत अवसर प्रदान करना है, जिसमें मौलिक और तकनीकी विश्लेषण शामिल हैं।

नेतृत्व में बदलाव: देवरश वकील की नियुक्ति

नए प्रमुख का चयन HDFC सिक्योरिटीज ने देवरश वकील को “HSL Prime Research” का प्रमुख नियुक्त किया है। यह कदम संगठन के भीतर नेतृत्व विकास को प्राथमिकता देने का प्रमाण है।
CEO का बयान
HDFC सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और CEO, धीरज रेली ने कहा, “देवरश की नियुक्ति हमारी संगठनात्मक प्रतिभा को मान्यता देने और करियर विकास में निवेश करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनके नेतृत्व में, हम अपनी शोध सेवाओं को पुनर्परिभाषित करने और ग्राहकों के लिए मूल्य प्रस्ताव को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।”

HSL Prime Research: विशेषज्ञों का अनुसंधान

नवीनतम शोध तकनीक HSL Prime Research विशेषज्ञ विश्लेषकों की एक टीम द्वारा संचालित है, जो निवेश के लिए सर्वोत्तम अवसरों की पहचान करने के लिए गहन मौलिक और तकनीकी विश्लेषण करती है।
ग्राहकों के लिए विशेष लाभ
नया ब्रांड ग्राहकों को निवेश के निर्णय लेने में सहायता करने के लिए प्रीमियम डेटा और अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।

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क्रिप्टोकरेंसी के लिए ईयू का जवाब: ई-यूरो

बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। क्रिप्टोकरेंसी और तेज़ धन हस्तांतरण ने एक वित्तीय क्रांति ला दी है, जिससे दुनिया भर की सरकारों को भुगतान प्रणालियों को विनियमित करने के तरीकों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया गया है। कई देशों ने डिजिटल मुद्राओं को पेश करने के अपने इरादे व्यक्त किए हैं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी), यूरोपीय संसद और अन्य हितधारकों के सहयोग से, एक डिजिटल यूरो की व्यवहार्यता की एक साल की लंबी जांच कर रहा है, जो 2023 में समाप्त होने के लिए तैयार है। इन हितधारकों से मूल्यवान इनपुट ने निरंतर प्रगति की सुविधा प्रदान की है। ईसीबी के अनुसंधान।

यूरो क्षेत्र के भीतर व्यक्तियों के विकसित भुगतान व्यवहार से डिजिटल यूरो की मांग उत्पन्न होती है। पिछले तीन वर्षों में भुगतान के लिए नकद उपयोग 72% से घटकर 59% हो गया है, डिजिटल भुगतान लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से नीदरलैंड और फ़िनलैंड जैसे देशों में स्पष्ट है, जहाँ केवल पाँचवें लेनदेन में नकदी का उपयोग किया जाता है।

डिजिटल यूरो सार्वजनिक धन के एक इलेक्ट्रॉनिक रूप के रूप में काम करेगा, नकद और अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विधियों को प्रतिस्थापित करने के बजाय उनका पूरक होगा। इसका उद्देश्य सार्वजनिक धन से भुगतान करने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प की पेशकश करना है, यहां तक कि उन क्षेत्रों में भी जहां ऐसे विकल्प वर्तमान में अनुपलब्ध हैं, जैसे कि ई-कॉमर्स।

प्रारंभ में, डिजिटल यूरो उपभोक्ताओं, व्यवसायों, व्यापारियों और सरकारों सहित यूरो क्षेत्र के निवासियों तक पहुंच प्रदान करने को प्राथमिकता देगा। ईसीबी का उद्देश्य आज के नकद उपयोग के समान पूरे यूरो क्षेत्र में डिजिटल यूरो की आसान पहुंच और उपयोगिता सुनिश्चित करना है।

डिजिटल यूरो के शुरुआती रिलीज से संपर्क रहित भुगतान, क्यूआर कोड और सुविधाजनक ऑनलाइन भुगतान विधियों की सुविधा होने की संभावना है। तकनीकी प्रगति के रूप में, अन्य भुगतान विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं, जैसे कि मोबाइल फोन, भौतिक कार्ड, या संभावित रूप से स्मार्टवॉच जैसे अन्य उपकरणों का उपयोग करना।

केंद्रीय बैंक अंततः डिजिटल मुद्राओं को स्वीकार कर रहे हैं क्योंकि वे प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ पकड़ने और उपभोक्ताओं की युवा पीढ़ी को पूरा करने का प्रयास करते हैं। स्वीडन, चीन और भारत जैसे देशों ने पहले ही अपने केंद्रीय बैंकों के माध्यम से पायलट डिजिटल मुद्राएँ पेश की हैं, जिन्हें केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (CBDCs) के रूप में जाना जाता है। इन प्रयासों की प्रेरणा, कार्यक्षेत्र और प्रगति में काफी भिन्नता है। स्वीडन का लक्ष्य बैंकनोट्स से डिजिटल मुद्रा में संक्रमण का पता लगाना है, जिसमें ई-क्रोना अभी भी प्रारंभिक अवस्था में है। खुदरा अर्थव्यवस्था पर राज्य का नियंत्रण बढ़ाने के उद्देश्य से चीन ने 2020 से “डिजिटल रॅन्मिन्बी” का रोलआउट शुरू कर दिया है। भारत ने विविध लेनदेन की सुविधा के लिए 2022 में एक ई-रुपया पायलट लॉन्च किया। इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी डिजिटल मुद्रा स्थापित करने के संभावित प्रभावों की जांच कर रहा है।

इसी तरह, यूरोपीय संघ अपनी डिजिटल मुद्रा, ई-यूरो को लॉन्च करने पर विचार कर रहा है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के अनुसार, ई-यूरो मौजूदा भुगतान विधियों के लिए एक डिजिटल विकल्प प्रदान करेगा, जो यूरोपीय संघ की मौद्रिक प्रणाली की सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाएगा। ई-यूरो को डिजिटल वॉलेट में संग्रहित किया जाएगा, और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके लेनदेन की सुविधा प्रदान की जाएगी।

ई-यूरो (एक CBDC) और क्रिप्टोकरेंसी के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर संचलन में समग्र मात्रा में निहित है। बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी के विपरीत, ई-यूरो की मात्रा सीमित नहीं होगी क्योंकि इसे यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा विनियमित किया जाएगा और सीधे यूरो से ही जुड़ा होगा। कोई विनिमय दर नहीं होगी; ई-यूरो सामान्य रूप से यूरो का एक अन्य स्वरूप होगा।

हालांकि ई-यूरो “स्थिर सिक्कों” के साथ कुछ समानताएं साझा करता है, जो प्रमुख मुद्राओं से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी हैं, यह एक सार्वजनिक संस्था द्वारा जारी और नियंत्रित किया जाएगा। इससे मूल्यांकन और नियामक निरीक्षण में स्थिरता सुनिश्चित होगी।

डिजिटल मुद्रा के पक्ष में मामला

मिलियन-यूरो का सवाल यह है कि ईसीबी डिजिटल मुद्रा पर विचार क्यों कर रहा है। जबकि हमारे पास भौतिक मुद्राओं के साथ एक लंबा इतिहास है, डिजिटल मुद्राएं कई फायदे प्रदान करती हैं:

कम संसाधन तीव्रता: एक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा मुद्रण, सत्यापन, संचलन, निगरानी और प्रतिस्थापन की आवश्यकता को समाप्त कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप पारिस्थितिक पदचिह्न काफी कम हो जाते हैं। तथ्य यह है कि यह खनन के बजाय जारी किया जाता है, इसकी ऊर्जा दक्षता को भी बढ़ाता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, कम लेनदेन लागत को बनाए रखते हुए, निकासी और निपटान के लिए CBDC की भुगतान प्रणाली भौतिक मुद्राओं और क्रिप्टोकरेंसी की तुलना में सैकड़ों-हज़ार गुना कम ऊर्जा का उपयोग कर सकती है।

बढ़ी हुई बैंकिंग पहुंच: केंद्रीय बैंकों द्वारा सीधे प्रबंधित एक डिजिटल मुद्रा के रूप में, डिजिटल यूरो निजी वित्तीय संस्थानों जैसे बिचौलियों की आवश्यकता को समाप्त कर देगा। इसमें बैंक खातों के बिना व्यक्तियों के लिए आर्थिक बहिष्कार को कम करने की क्षमता है, जैसे कि बिना बैंक वाली आबादी। ईसीबी सभी के लिए ई-यूरो को सुलभ बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की स्थापना और रखरखाव करेगा। उदाहरण के लिए, जबकि निजी संस्थानों को खाता खोलने के लिए न्यूनतम विश्वसनीयता स्कोर की आवश्यकता हो सकती है, सरकारें सामाजिक नीति पहलों के भाग के रूप में डिजिटल वॉलेट प्रदान करके धन तक पहुंच की सुविधा प्रदान कर सकती हैं।

आर्थिक संप्रभुता: एक डिजिटल मुद्रा यूरोप की आर्थिक संप्रभुता की रक्षा करते हुए प्रतिस्पर्धी सीबीडीसी और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ यूरो की रक्षा कर सकती है। यह सरकारों को लेन-देन की निगरानी करने, कर से बचने और मनी लॉन्ड्रिंग को कम करने में भी सक्षम बनाता है।

हालांकि, केंद्रीय और वाणिज्यिक बैंकों पर डिजिटल मुद्राओं के प्रभाव के संबंध में विचार हैं। किस हद तक देश केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राओं को अपनाते हैं, यह उनके डिजाइन, कार्यान्वयन और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर निर्भर करता है।

निजी डिजिटल मुद्राओं का मुकाबला: ऐसे परिदृश्य में जहां बिटकॉइन या फेसबुक की लिब्रा जैसी निजी डिजिटल मुद्राएं वैश्विक वित्तीय लेनदेन के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर हावी हैं, विनिमय के साधनों का मूल्य केवल आपूर्ति और मांग या निजी उद्यम द्वारा ही निर्धारित किया जाएगा, जैसे कि फेसबुक। सीबीडीसी की शुरूआत से केंद्रीय बैंकों को धन का मूल्य निर्धारित करने और अपने संबंधित देशों के लिए मौद्रिक संप्रभुता सुनिश्चित करने की अनुमति मिलेगी। लोगों के पास अभी भी राष्ट्रीय मुद्राओं या निजी फर्मों द्वारा समर्थित मुद्राओं के बीच विकल्प होगा, लेकिन ई-यूरो के साथ, यूरोप अधिक स्तरीय खेल मैदान पर होगा।

सुरक्षा और गोपनीयता को संतुलित करना: गुमनामी मूर्त धन का एक मूलभूत सिद्धांत है, जहां लेन-देन किसी की पहचान प्रकट किए बिना हो सकता है। पूरी तरह से सुरक्षित डिजिटल मुद्रा के लिए अधिकारियों को सभी लेन-देन की जानकारी देने की आवश्यकता होगी, जबकि पूरी तरह से निजी किसी भी जानकारी का खुलासा नहीं करेगी। पूर्व परिदृश्य केंद्रीय अधिकारियों को अत्यधिक शक्ति प्रदान करेगा, जबकि बाद वाला कर से बचने और अवैध गतिविधियों को प्रोत्साहित कर सकता है। ब्लॉकचैन की पता लगाने की क्षमता पूरे वित्तीय इतिहास को ट्रैक करने में सहायता कर सकती है, लेकिन यह सवाल उठता है कि अभिनेता की पहचान सार्वजनिक जानकारी होनी चाहिए या नहीं। सुरक्षा और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाने के लिए ई-यूरो के अर्ध-गुमनाम प्रारूप में काम करने की संभावना है।

स्थिरता को बढ़ावा देना और अटकलों को कम करना: डिजिटल मुद्राओं की प्रारंभिक अवधारणा आपूर्ति और मांग द्वारा शासित विनिमय के विकेंद्रीकृत साधन बनाना था। हालांकि, वे जल्दी ही सट्टा संपत्ति बन गए, अत्यधिक कीमत में उतार-चढ़ाव की संभावना। इसके बजाय, एक प्रमुख मुद्रा को अपने भविष्य की स्थिति के बारे में अटकलों के बजाय वास्तविक अर्थव्यवस्था की स्थितियों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

इसलिए, ई-यूरो एक आवश्यकता है या इच्छा इसके डिजाइन और विनियमन पर निर्भर करती है। यूरोपीय संघ के विनियमन की जटिलताओं को देखते हुए डिजिटल करेंसी का लांच यूरोपियन यूनियन के फाइनल ब्लूप्रिंट पर निर्भर करेगा।

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पेंशन सुधार और फ्रांस में विरोध प्रदर्शन: संक्षिप्त विवरण

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की सरकार द्वारा पेंशन प्रणाली में बदलाव की घोषणा के बाद फ्रांस में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जर्मनी, स्पेन और कई अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में फ़्रांस सेवानिवृत्ति के बाद श्रमिकों को बेहतर लाभ प्रदान करता है। हालाँकि, सरकार इसे सरल बनाने और अपने खर्चों को कम करने के लिए सिस्टम में बदलाव करने की कोशिश कर रही है।

फ्रांस की पेंशन प्रणाली में प्रस्तावित संशोधन, जिसने वर्ष की शुरुआत से व्यापक विरोध और हड़तालें की हैं, गुरुवार को एक संसदीय वोट के लिए निर्धारित किया गया था, जो इमैनुएल मैक्रॉन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण का प्रतिनिधित्व करता है। हालाँकि, अंतिम समय में, उन्होंने वोट वापस ले लिया और योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए विशेष संवैधानिक शक्तियों का उपयोग किया। एकता का एक दुर्लभ प्रदर्शन देखा गया है, क्योंकि सभी ट्रेड यूनियन, मध्यम केंद्र सहित, वर्ष की शुरुआत से ही विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे हैं, दशकों में सबसे बड़े प्रदर्शनों में से कुछ का आयोजन कर रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों का चरम पिछले मंगलवार को हुआ जब अनुमानित 1.28 मिलियन लोगों ने भाग लिया।

परिवहन, ऊर्जा, डॉक्स, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं जैसे संग्रहालय कर्मचारियों सहित विभिन्न क्षेत्र हड़ताल पर चले गए हैं। चल रहे कचरा-संग्रह हड़ताल के परिणामस्वरूप पेरिस के आधे हिस्से में 7,000 टन से अधिक कचरा जमा हो गया है। ट्रेड यूनियनों का तर्क है कि प्रस्तावित ओवरहाल मैन्युअल व्यवसायों में कम आय वाले व्यक्तियों को असमान रूप से प्रभावित करेगा, जो आमतौर पर कम उम्र में काम करना शुरू करते हैं, उन्हें विश्वविद्यालय के स्नातकों की तुलना में लंबे समय तक काम करने के लिए मजबूर करते हैं जो प्रस्तावित परिवर्तनों से कम प्रभावित होते हैं। जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि दो-तिहाई फ्रांसीसी आबादी पेंशन सुधारों का विरोध करती है और विरोध आंदोलन का समर्थन करती है। पेंशन प्रणाली को देश के पोषित सामाजिक सुरक्षा मॉडल का एक मूलभूत तत्व माना जाता है।

यूके में बाजार-उन्मुख प्रणाली के विपरीत, फ्रांस एक पेंशन प्रणाली का दावा करता है जो राजनेताओं को “पीढ़ियों के बीच एकजुटता” के रूप में संदर्भित करता है। इस प्रणाली में कामकाजी आबादी से सेवानिवृत्ति लाभों के वित्तपोषण के लिए अनिवार्य पेरोल कटौती शामिल है। सभी फ्रांसीसी कर्मचारी राज्य पेंशन के हकदार हैं। प्रमुख यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में राज्य पेंशन प्राप्त करने के लिए फ़्रांस की न्यूनतम न्यूनतम आयु है और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण संसाधन आवंटित करता है। हालांकि, सक्रिय कामकाजी आबादी उच्च पेरोल शुल्क का सामना करती है और एक अच्छी तरह से काम करने वाले समाज की नींव के रूप में उचित पेंशन का सम्मान करती है।

पिछले 40 वर्षों में, प्रत्येक फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने सेवानिवृत्ति कानूनों में किसी न किसी तरह से बदलाव किए हैं, जो आम तौर पर सार्वजनिक असंतोष और सड़कों पर प्रदर्शनों का कारण बनते हैं।

वर्तमान में फ़्रांस में सभी के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष है। हालाँकि, कानूनी सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 64 करने के लिए एक सुधार चल रहा है। जबकि यह जर्मनी और इटली (दोनों 67) और स्पेन और बेल्जियम (दोनों 65) जैसे पड़ोसी देशों के लिए तुलनात्मक रूप से अनुकूल लग सकता है, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 64 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होना फ़्रांस स्वचालित रूप से पूर्ण पेंशन की गारंटी नहीं देता है।

सुधार के तहत, व्यक्तियों को पूर्ण राज्य पेंशन सुरक्षित करने के लिए 42 वर्षों की पिछली आवश्यकता के बजाय 43 वर्षों तक काम करने की आवश्यकता होगी। इसका अर्थ है कि अधिकांश लोग केवल 67 वर्ष की आयु में इसके लिए पात्र होंगे। फ्रांस में 55-64 वर्ष के लोगों के लिए रोजगार दर वर्तमान में 56% है, जो ओईसीडी के अनुसार यूरोपीय औसत 60.5% से थोड़ा कम है।

पुराने कर्मचारियों के बीच बेरोजगारी का मुकाबला करने के लिए, फ्रांसीसी सरकार ने “वरिष्ठ सूचकांक” पेश किया है। इस पहल का उद्देश्य कंपनियों को 55 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों की संख्या का खुलासा करने के लिए प्रोत्साहित करना है। नवंबर से, 1,000 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों के लिए इस डेटा को प्रकाशित करना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। गैर-अनुपालन के परिणामस्वरूप प्रतिबंध लगेंगे।

इसके अतिरिक्त, “सीडीआई सीनियर्स” नामक एक नए प्रकार के स्थायी अनुबंध की योजना बनाई जा रही है। यह अनुबंध 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को नियुक्त करने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ वित्तीय योगदानों से छूट प्रदान करेगा। सुधार में न्यूनतम पेंशन के लिए फ्रेंच न्यूनतम वेतन के 85% के बराबर प्रावधान भी शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है कि जिन व्यक्तियों ने 43 वर्षों तक काम किया है, उन्हें 1,200 यूरो (वर्तमान न्यूनतम वेतन के आधार पर) की न्यूनतम मासिक पेंशन प्राप्त होगी।

फ्रांसीसी सरकार इसे छोटे पेंशन में सुधार के उद्देश्य से एक सामाजिक उपाय के रूप में प्रस्तुत करती है। हालाँकि, यह अनुमान लगाया गया है कि इस विशेष उपाय से केवल लगभग 20,000 फ्रांसीसी लोग सीधे प्रभावित होंगे। वर्तमान में, फ्रांस में औसत पेंशन लगभग 1,400 यूरो है।

फ्रांस में पेंशन प्रणाली

फ़्रांस में पेंशन फ़्रांस की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली द्वारा प्रशासित की जाती है। फ्रांसीसी पेंशन प्रणाली अपने व्यापक कवरेज के लिए जानी जाती है और पात्र व्यक्तियों को उनके योगदान और उनके द्वारा काम किए गए क्वार्टरों की संख्या के आधार पर सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करती है।

फ्रांसीसी पेंशन प्रणाली पे-एज-यू-गो के आधार पर संचालित होती है, जहां वर्तमान श्रमिकों का योगदान वर्तमान सेवानिवृत्त लोगों की पेंशन को निधि देता है। यह एक परिभाषित लाभ दृष्टिकोण का अनुसरण करता है, जिसका अर्थ है कि प्राप्त पेंशन की राशि व्यक्ति की कमाई के इतिहास और उनके द्वारा योगदान किए गए तिमाहियों की संख्या पर आधारित है।

फ़्रांस में सेवानिवृत्ति की आयु व्यक्ति के जन्म के वर्ष और उनके द्वारा योगदान किए गए तिमाहियों की संख्या पर निर्भर करती है। 1955 के बाद जन्म लेने वालों के लिए सामान्य सेवानिवृत्ति की आयु वर्तमान में 62 वर्ष निर्धारित है। हालाँकि, जल्दी सेवानिवृत्ति के विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उनके परिणामस्वरूप पेंशन राशि में कमी हो सकती है।

हाल के वर्षों में, फ़्रांस में पेंशन प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कुछ सुधार किए गए हैं। इन सुधारों में सेवानिवृत्ति की आयु में परिवर्तन, पेंशन लाभों की गणना में समायोजन, और व्यक्तियों को लंबे समय तक काम करने के लिए प्रोत्साहित करने के उपाय शामिल हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऊपर दी गई जानकारी सितंबर 2021 में मेरे ज्ञान कटऑफ पर आधारित है, और तब से फ्रेंच पेंशन प्रणाली में बदलाव या अपडेट हो सकते हैं।

पर्यटन पर 2023 के विरोध का प्रभाव

इस पूरे महीने के दौरान, फ़्रांस में विरोध प्रदर्शन जारी रहा, हालांकि पहले वसंत की तुलना में कम तीव्रता के साथ। सभाएं, जो पहले हजारों प्रतिभागियों को आकर्षित करती थीं, अब कुछ सौ नागरिकों वाले छोटे समूहों में सिमट गई हैं। ये प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की हाल ही में लागू की गई पेंशन योजना का विरोध व्यक्त कर रहे हैं, जो सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 64 कर दी गई है। कानून 14 अप्रैल को लागू किया गया था।

मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में पेरिस की सड़कों से कचरे के ढेर को हटाया गया। यह कार्रवाई कूड़ा बीनने वालों की हड़ताल के समापन के बाद हुई, जो 6 मार्च से चल रही थी। यह हड़ताल इन कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 57 से बढ़ाकर 59 करने के प्रस्ताव की प्रतिक्रिया थी।

स्थानीय फ्रांस के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विरोध की एक नई लहर आने का अनुमान है, जो सोमवार, 1 मई को पड़ता है। इन विरोधों से सार्वजनिक परिवहन और हवाई यात्रा जैसी सेवाओं में और वृद्धि और संभावित व्यवधान हो सकते हैं यदि संघ कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया।

एक सुरक्षा जोखिम और संकट प्रबंधन फर्म, क्राइसिस24 के सबसे हालिया अपडेट में, यह उल्लेख किया गया है कि कार्यकर्ताओं द्वारा सरकार के पेंशन सुधारों की निंदा करने के उद्देश्य से मई की शुरुआत तक पूरे फ्रांस में विरोध और हड़ताल का आयोजन जारी रखने की संभावना है। 26 अप्रैल तक, देश भर में प्रदर्शन जारी हैं। पुलिस बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने या बलपूर्वक पीछे धकेलने के उपाय किए हैं। यह उम्मीद की जाती है कि कुछ हिंसक मोड़ लेने की संभावना के साथ अतिरिक्त विरोध प्रदर्शन होंगे।

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राष्ट्रीय कौशल विकास निगम का G20 में “कार्य का भविष्य” प्रदर्शन

एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) ने भुवनेश्वर में G20 “फ्यूचर ऑफ वर्क” प्रदर्शनी में अपने कौशल विकास, उच्च शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय रोजगार पहलों का प्रदर्शन किया। संगठन का लक्ष्य भारतीय प्रतिभाओं के लिए स्किलिंग, री-स्किलिंग, अप-स्किलिंग और मल्टी-स्किलिंग के माध्यम से घरेलू और विश्व स्तर पर फलने-फूलने के समावेशी अवसर पैदा करना है।

प्रदर्शनी में एनएसडीसी स्टॉल को विभिन्न लक्षित दर्शकों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया था और एनएसडीसी अकादमी, एनएसडीसी इंटरनेशनल और एनएसडीसी डिजिटल समेत एनएसडीसी के सभी प्रमुख कार्यक्षेत्रों को प्रदर्शित किया गया था। स्टॉल की थीम, “हमारा भविष्य”, एनएसडीसी की उन पहलों की समावेशी प्रकृति पर प्रकाश डालती है जो कहीं भी, किसी को भी लाभ पहुंचाने के लिए डिजाइन की गई हैं।

एनएसडीसी के सीईओ वेद मणि तिवारी ने भारत के युवाओं को काम के भविष्य के लिए तैयार करने के लिए कुशल बनाने के महत्व पर जोर दिया क्योंकि प्रौद्योगिकी श्रम बाजार को बाधित करती है। एनएसडीसी के नवोन्मेषी मंच शिक्षा, कौशल और काम की दुनिया के बीच की खाई को पाटने के लिए अनुरूप शिक्षण समाधान, नौकरी के अवसर और उद्यमशीलता समर्थन प्रदान करते हैं।

एनएसडीसी अकादमी पाठ्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला, एंड-टू-एंड प्लेसमेंट तैयारी, उद्योग विशेषज्ञों द्वारा सलाह और आसान छात्र ऋण के साथ एक व्यापक मंच है। 640 से अधिक स्किलिंग पार्टनर्स, 50+ फ्यूचरिस्टिक स्किल प्रोवाइडर्स और लगभग 21 मिलियन उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करने के साथ, अकादमी भारत के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में करियर के लिए तैयार करती है। , वेब और मोबाइल विकास, आभासी वास्तविकता, रोबोटिक प्रक्रिया स्वचालन, और 3डी प्रिंटिंग।

स्किल इंडिया डिजिटल, एनएसडीसी की एक अन्य पहल, एक नागरिक-केंद्रित मंच है जो कौशल, रोजगार, शिक्षा और उद्यमिता के लिए भारत के प्राथमिक स्रोत के रूप में कार्य करता है। यह प्लेटफॉर्म अपनी व्यापक सेवाओं के माध्यम से शिक्षा, कौशल और काम की दुनिया के बीच की खाई को पाटते हुए पाठ्यक्रम, नौकरी और शिक्षुता की सिफारिशें, डिजिटल प्रमाणपत्र, सत्यापित क्रेडेंशियल्स, फंडिंग समर्थन और बहुत कुछ प्रदान करता है।

एनएसडीसी इंटरनेशनल भारत को दुनिया की कौशल राजधानी बनाने के लिए समर्पित है, अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर तलाशने वाले व्यक्तियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, नौकरी प्लेसमेंट सहायता, वीजा सहायता, पासपोर्ट सहायता, वित्त पोषण सहायता और पोस्ट-प्लेसमेंट समर्थन प्रदान करता है। व्यक्तिगत समर्थन और भरोसेमंद साझेदारी के साथ, एनएसडीसी इंटरनेशनल विदेश में काम करने की जटिलताओं को दूर करने में उम्मीदवारों की मदद करता है, हर कदम पर मूल्यवान संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान करता है।

भारत वर्तमान में G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। G20 (ग्रुप ऑफ़ ट्वेंटी) अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का एक मंच है जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। G20 के सदस्य अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड हैं। राज्यों।

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